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Fri, Oct 9, 2026Updated 10:36 AM IST
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नोबेल शांति पुरस्कार 2026: आज ओस्लो में होगा विजेता का ऐलान, डोनाल्ड ट्रम्प और कनाडा के प्रधानमंत्री दावेदारों में शामिल

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नई दिल्ली। वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा आज शुक्रवार को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में की जाएगी। दुनिया भर की निगाहें इस महत्वपूर्ण ऐलान पर टिकी हुई हैं। हर साल की तरह इस बार भी पुरस्कार को लेकर कई नाम चर्चा में रहे हैं। इनमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, कनाडा के प्रधानमंत्री और यहां तक कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन) का नाम भी प्रमुखता से सामने आया है। नॉर्वेजियन नोबेल समिति द्वारा आज किए जाने वाले इस ऐलान को लेकर वैश्विक स्तर पर उत्सुकता का माहौल बना हुआ है।

नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा हमेशा नॉर्वे की राजधानी ओस्लो से ही की जाती है। यह परंपरा दशकों से चली आ रही है। अन्य नोबेल पुरस्कारों की घोषणा स्वीडन के स्टॉकहोम से होती है, लेकिन शांति पुरस्कार का ऐलान विशेष रूप से ओस्लो में ही किया जाता है। आज होने वाली इस घोषणा के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने विजेता के नाम का चयन कर लिया है और इसे गोपनीय रखा गया है। समिति के सदस्य आज औपचारिक रूप से विजेता के नाम की घोषणा करेंगे। इस पुरस्कार को विश्व में शांति, सद्भाव और मानवीय मूल्यों के संवर्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्ति या संस्था को प्रदान किया जाता है।

इस बार के संभावित दावेदारों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का नाम सबसे अधिक चर्चा में रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, डोनाल्ड ट्रम्प लगभग सात से आठ वर्षों से नोबेल शांति पुरस्कार की मांग करते रहे हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान किए गए विभिन्न कूटनीतिक प्रयासों और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता का हवाला देते हुए कई अवसरों पर यह इच्छा व्यक्त की है कि उन्हें यह सम्मान मिलना चाहिए। ट्रम्प ने पहले भी कई मौकों पर यह दावा किया है कि उनके द्वारा किए गए शांति प्रयासों को नोबेल समिति द्वारा अनदेखा किया गया है। हालांकि, नोबेल समिति की चयन प्रक्रिया पूर्णतः स्वतंत्र और गोपनीय होती है, इसलिए किसी भी राजनीतिक बयानबाजी का इसके निर्णय पर सीधा प्रभाव नहीं पड़ता। फिर भी, ट्रम्प की लगातार मांग ने इस बार के पुरस्कार को लेकर मीडिया और जनता के बीच एक अलग ही चर्चा का विषय बना दिया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति के अलावा, कनाडा के प्रधानमंत्री का नाम भी इस वर्ष के नोबेल शांति पुरस्कार के प्रबल दावेदारों में गिना जा रहा है। कनाडा के प्रधानमंत्री को उनकी वैश्विक कूटनीति, मानवीय सहायता कार्यों और अंतरराष्ट्रीय मंच पर शांति स्थापना के लिए किए गए प्रयासों के आधार पर एक मजबूत दावेदार के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, प्राप्त जानकारी के अनुसार अभी तक यह पुष्टि नहीं हो पाई है कि उन्हें औपचारिक रूप से नामांकित किया गया है या नहीं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया और जानकारों के बीच उनका नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकन प्रक्रिया बेहद गोपनीय होती है और नामांकित व्यक्तियों की सूची 50 वर्षों तक सार्वजनिक नहीं की जाती, इसलिए बाजार में चल रही अटकलों और वास्तविक नामांकन के बीच अंतर हो सकता है।

इस वर्ष की सबसे दिलचस्प और असामान्य चर्चाओं में से एक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) के नाम को लेकर है। आमतौर पर नोबेल शांति पुरस्कार किसी व्यक्ति, संगठन या आंदोलन को दिया जाता है, लेकिन इस बार एक वैज्ञानिक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रतीक के रूप में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का नाम भी दावेदारों की सूची में चर्चा का विषय बना हुआ है। आईएसएस को विभिन्न देशों के बीच वैज्ञानिक सहयोग और शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए अंतरिक्ष के उपयोग का एक बेहतरीन उदाहरण माना जाता है। यदि यह नामांकन वास्तविक है, तो यह नोबेल शांति पुरस्कार के इतिहास में एक अत्यंत दुर्लभ और ऐतिहासिक घटना होगी। यह दर्शाता है कि शांति की परिभाषा अब केवल युद्ध विराम या राजनीतिक समझौतों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि वैश्विक सहयोग और विज्ञान के क्षेत्र में भी इसकी खोज की जा रही है।

नोबेल शांति पुरस्कार की स्थापना स्वीडिश वैज्ञानिक और उद्योगपति अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत के आधार पर की गई थी। अल्फ्रेड नोबेल ने अपनी वसीयत में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया था कि उनका एक हिस्सा उस व्यक्ति या संस्था को दिया जाए जिसने राष्ट्रों के बीच भाईचारे, सेनाओं के उन्मूलन या कमी, और शांति सम्मेलनों के आयोजन या प्रचार के लिए सर्वश्रेष्ठ कार्य किया हो। यही कारण है कि शांति पुरस्कार का ऐलान स्वीडन के बजाय नॉर्वे से होता है, क्योंकि नोबेल ने इस जिम्मेदारी नॉर्वेजियन संसद द्वारा चुनी गई एक समिति को सौंपी थी।

आज जब ओस्लो में विजेता के नाम की घोषणा होगी, तो उसके साथ पुरस्कार राशि, एक स्वर्ण पदक और एक डिप्लोमा प्रदान करने की भी घोषणा की जाएगी। पुरस्कार वितरण समारोह हर साल 10 दिसंबर को अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि पर आयोजित किया जाता है। फिलहाल, पूरी दुनिया इस बात का इंतजार कर रही है कि 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार किसे मिलेगा। क्या यह डोनाल्ड ट्रम्प की वर्षों पुरानी इच्छा पूरी होगी, या कनाडा के प्रधानमंत्री को यह सम्मान मिलेगा, या फिर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के रूप में विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को यह सर्वोच्च पुरस्कार दिया जाएगा, यह कुछ ही घंटों में स्पष्ट हो जाएगा। वंदे भारत न्यूज़ इस ऐतिहासिक घोषणा पर लगातार नजर बनाए हुए है और विजेता के नाम की घोषणा होते ही ताजा अपडेट प्रदान करेगा।