Thu, 08 Oct 202611:59 AM
Thu, Oct 8, 2026Updated 11:59 AM IST
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नर्मदापुरम: शराब के नशे में स्कूल पहुंचकर महिला शिक्षिकाओं से अभद्रता करने वाले शिक्षक को किया गया निलंबित, मेडिकल रिपोर्ट में नशे की पुष्टि

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नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले से शिक्षा विभाग और सरकारी स्कूलों की छवि को शर्मसार करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। जिले के कसला स्थित एक शासकीय स्कूल में पदस्थ एक शिक्षक को शराब के नशे में धुत होकर विद्यालय परिसर में पहुंचने और वहां मौजूद महिला शिक्षिकाओं के साथ अभद्रता करने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि शिक्षक का मेडिकल परीक्षण कराया गया, जिसकी रिपोर्ट में उसके शराब के नशे में होने की स्पष्ट रूप से पुष्टि हुई है। मेडिकल रिपोर्ट में नशे की पुष्टि होने के बाद ही शिक्षा विभाग ने सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उक्त शिक्षक को उसके पद से निलंबित करने का निर्णय लिया।

जानकारी के अनुसार, यह घटना नर्मदापुरम जिले के कसला क्षेत्र में स्थित एक स्कूल की है। आरोप है कि उक्त शिक्षक नियमित कार्य दिवस के दौरान शराब पीकर विद्यालय परिसर में पहुंच गया था। शराब के तीव्र नशे में होने के कारण शिक्षक का व्यवहार पूरी तरह से अमर्यादित और असंतुलित था। स्कूल परिसर में मौजूद अन्य स्टाफ सदस्यों और विशेष रूप से महिला शिक्षिकाओं ने जब शिक्षक की इस हालत और उसके अमर्यादित आचरण को देखा, तो वे अत्यंत भयभीत और स्तब्ध रह गईं। नशे की हालत में शिक्षक ने महिला टीचर्स के साथ अभद्रता की और ऐसा व्यवहार किया जो किसी भी शैक्षणिक संस्थान की मर्यादा और गरिमा के सर्वथा विपरीत था।

महिला शिक्षिकाओं से की गई इस अभद्रता और शिक्षक के शराब पीकर स्कूल आने की सूचना जैसे ही संबंधित अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन तक पहुंची, तुरंत इस मामले को गंभीरता से लिया गया। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बिना किसी देरी के त्वरित संज्ञान लेते हुए जांच की प्रक्रिया शुरू की। चूंकि आरोप सीधे तौर पर शराब के नशे से जुड़ा था, इसलिए सबसे पहले और सबसे जरूरी कदम शिक्षक का मेडिकल परीक्षण कराना था। इसके लिए शिक्षक को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उसका मेडिकल टेस्ट किया गया।

मेडिकल परीक्षण की रिपोर्ट ने सभी संदेहों को दूर कर दिया और आरोपों पर पूरी तरह से मुहर लगा दी। मेडिकल रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से यह बात सामने आई कि शिक्षक ने शराब का सेवन किया हुआ था और वह ड्यूटी के समय पूर्ण रूप से नशे की हालत में था। मेडिकल साक्ष्य मिलने के बाद शिक्षा विभाग के पास कार्रवाई के लिए पुख्ता आधार उपलब्ध हो गया। मेडिकल रिपोर्ट में नशे की पुष्टि होने और महिला शिक्षिकाओं के साथ अभद्रता के सुनिश्चित आरोपों के मद्देनजर, विभागीय अधिकारियों ने उक्त शिक्षक के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया।

यह घटना न केवल कसला के उस विशिष्ट स्कूल बल्कि पूरे नर्मदापुरम जिले के शिक्षा विभाग के लिए एक बेहद शर्मनाक स्थिति पैदा करती है। स्कूल वह पवित्र स्थान होता है जहां बच्चों को शिक्षा और संस्कार दिए जाते हैं। ऐसे में यदि कोई शिक्षक ही शराब के नशे में धुत होकर विद्यालय पहुंच जाए और अपने सहयोगियों, खासकर महिला शिक्षिकाओं के साथ अभद्र व्यवहार करे, तो यह शिक्षक पेशे की गरिमा पर एक गहरा प्रश्नचिह्न लगाता है। महिला शिक्षिकाओं के साथ हुई इस अभद्रता ने स्कूल के पूरे वातावरण को अत्यधिक तनावपूर्ण बना दिया था और महिला स्टाफ में सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता उत्पन्न हो गई थी।

शिक्षा विभाग द्वारा की गई इस त्वरित और सख्त कार्रवाई को स्कूल के अन्य शिक्षकों, अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने उचित ठहराया है। विभाग ने यह स्पष्ट संदेश देने का प्रयास किया है कि ड्यूटी के दौरान शराब का सेवन करना और महिला सहकर्मियों के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार या अभद्रता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर की गई इस कार्रवाई से यह भी सुनिश्चित हुआ कि आरोपी शिक्षक के खिलाफ अनुमानों के बजाय ठोस वैज्ञानिक और चिकित्सीय साक्ष्यों के आधार पर ही निलंबन की कार्रवाई पूरी की गई है।

हालांकि, शिक्षक को फिलहाल निलंबित कर दिया गया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार इस पूरे मामले में आगे की विभागीय जांच भी जारी रहेगी। यह देखा जाएगा कि क्या शिक्षक के खिलाफ पुलिस थाने में कोई औपचारिक प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराई जाती है या केवल विभागीय स्तर पर ही कार्रवाई को सीमित रखा जाएगा। महिला शिक्षिकाओं से अभद्रता के मामले में यदि पीड़ित पक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराता है, तो कानूनी कार्रवाई की संभावनाएं भी बनी हुई हैं।

नर्मदापुरम जिले के कसला स्कूल में हुई यह घटना राज्य के शिक्षा विभाग के लिए एक चेतावनी भी है। शिक्षकों की कार्यप्रणाली, उनकी दिनचर्या और उनके आचरण पर नियमित निगरानी रखने की आवश्यकता पर अब फिर से जोर दिया जाने लगा है। शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों से यह अपेक्षा की जा रही है कि वे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी स्कूलों में सख्त दिशा-निर्देश जारी करेंगे, ताकि विद्यालयों का अनुशासन और मर्यादा हमेशा बनी रहे और छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों का भी एक सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित हो सके।