ओबीसी आरक्षण कानून ठीक से तैयार नहीं किया गया: मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कमलनाथ सरकार को ठहराया जिम्मेदार, दिल्ली आंदोलन को बताया साजिश

नरसिंहपुर। वंदे भारत न्यूज़। मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने शनिवार शाम नरसिंहपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस पार्टी और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने राज्य में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण को लेकर उत्पन्न हुई कानूनी अड़चनों के लिए सीधे तौर पर तत्कालीन कमलनाथ सरकार को जिम्मेदार ठहराया। इसके साथ ही, उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में चल रहे आंदोलन को भी एक सुनियोजित साजिश करार दिया। मंत्री की यह टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब प्रदेश में ओबीसी वर्ग के आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है।
शनिवार शाम नरसिंहपुर पहुंचे कैबिनेट मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने पत्रकारों और उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि ओबीसी आरक्षण से संबंधित कानून को उस समय ठीक से तैयार नहीं किया गया था। उनका स्पष्ट आरोप था कि तत्कालीन कमलनाथ सरकार की वजह से ही यह पूरा मामला कानूनी रूप से उलझ गया। मंत्री ने विस्तार से समझाते हुए कहा कि किसी भी आरक्षण व्यवस्था को लागू करने के लिए उसे मजबूत कानूनी आधार पर खड़ा करना आवश्यक होता है, ताकि भविष्य में उसे अदालतों में चुनौती न दी जा सके। लेकिन, उनके अनुसार, पूर्व की कांग्रेस सरकार ने इस दिशा में गंभीरता नहीं दिखाई और जिसके परिणामस्वरूप ओबीसी वर्ग के हितों को नुकसान पहुंचा।
मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर विशेष रूप से जोर दिया। उन्होंने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समाज प्रदेश की जनसंख्या का एक बहुत बड़ा हिस्सा है और उन्हें उनका संवैधानिक अधिकार मिलना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि आरक्षण का मामला वर्तमान में कानूनी अड़चनों से गुजर रहा है, लेकिन इसकी जड़ें पिछली सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली में निहित हैं। उन्होंने दावा किया कि यदि कानून निर्माण के समय उचित सावधानी बरती गई होती और सभी कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखा गया होता, तो आज ओबीसी समाज को इस प्रकार की समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता।
ओबीसी आरक्षण के विषय से इतर, कैबिनेट मंत्री ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जारी आंदोलन का भी जिक्र किया। उन्होंने इस आंदोलन को कोई स्वतःस्फूर्त जन-आक्रोश मानने से इनकार किया और इसे एक सोची-समझी साजिश बताया। मंत्री ने बिना किसी विशिष्ट संगठन का नाम लिए आरोप लगाया कि देश और प्रदेश की स्थिरता को भंग करने तथा वर्तमान सरकार की छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से कुछ तत्वों द्वारा इस तरह के आंदोलनों को प्रायोजित किया जा रहा है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे ऐसी साजिशों को समझें और भ्रामक प्रचार से दूर रहें।
नरसिंहपुर में मंत्री के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी का दौर शुरू होने की संभावना है। कांग्रेस पार्टी की तरफ से अभी तक मंत्री के इन आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में कांग्रेस नेता इन आरोपों का पुरजोर तरीके से खंडन कर सकते हैं। ओबीसी आरक्षण का मुद्दा मध्य प्रदेश की राजनीति में हमेशा से ही बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण रहा है, क्योंकि राज्य में ओबीसी मतदाताओं की संख्या चुनावी परिणामों को सीधे तौर पर प्रभावित करने की क्षमता रखती है।
मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान सरकार ओबीसी वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कानूनी अड़चनों को दूर करने के लिए सरकार उचित कदम उठा रही है और विशेषज्ञों से सलाह ली जा रही है ताकि 27 फीसदी आरक्षण को पूरी तरह से सुरक्षित और प्रभावी बनाया जा सके। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ओबीसी समाज के साथ कोई अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और जो भी कानूनी कमियां पिछली सरकार के समय रह गई थीं, उन्हें अब दुरुस्त किया जा रहा है।
नरसिंहपुर के इस कार्यक्रम में स्थानीय भाजपा नेता, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में आम नागरिक भी मौजूद थे। मंत्री ने उपस्थित लोगों से सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विकास और जनकल्याण ही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ के लिए भ्रम फैलाने का काम कर रहा है।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर पिछले कई वर्षों से राजनीतिक और कानूनी घमासान चल रहा है। विभिन्न न्यायालयों में इस संबंध में याचिकाएं दायर की गई हैं और समय-समय पर अलग-अलग आदेश भी पारित हुए हैं। ऐसे में, कैबिनेट मंत्री राव उदय प्रताप सिंह का यह बयान इस बात का संकेत देता है कि आगामी दिनों में ओबीसी आरक्षण का मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और अधिक गर्मा सकता है। दिल्ली में चल रहे आंदोलन को साजिश बताने वाले उनके बयान ने भी राष्ट्रीय स्तर पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल मंत्री के इन आरोपों का किस प्रकार से जवाब देते हैं और ओबीसी आरक्षण के कानूनी मामले में आगे क्या रुख अख्तियार किया जाता है।

