नर्स बनने के लिए ओलिंपिक विजेता का संन्यास:कहा- मुझे ‘असली दुनिया’ का आकर्षण खींच रहा; कॉमनवेल्थ 2026 की टीम में शामिल थीं केटी आर्चीबाल्ड

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ब्रिटेन की सबसे सफल और दिग्गज साइकिलिस्ट में से एक, तीन बार की ओलिंपिक मेडलिस्ट केटी आर्चीबाल्ड ने अचानक संन्यास ले लिया है। हैरानी की बात यह है कि उन्हें इसी साल होने वाले 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए स्कॉटलैंड की टीम में चुना गया था। लेकिन 32 वर्षीय केटी ने ट्रैक को हमेशा के लिए अलविदा कहकर अपना नया करियर चुन लिया है। अब वह एक नर्स के रूप में मरीजों की सेवा करती नजर आएंगी। केटी ने बताया कि काफी समय से ‘असली दुनिया’ का आकर्षण उन्हें अपनी ओर खींच रहा था। वह उस दुनिया को छोड़ने से डर रही थीं जिसे वह जानती हैं और उसमें माहिर हैं। लेकिन उनका मानना है कि अब उनके अंदर कोई डर नहीं बचा है। केटी ने कहा कि मैं उस स्टार्ट लाइन तक पहुंचने के लिए बेताब थी लेकिन अब मेरा दिमाग और शरीर साथ नहीं दे रहा है। समय आ गया है कि नई पीढ़ी अपना जलवा बिखेरे। अपने नए सफर के बारे में बात करते हुए केटी ने बताया कि वह फिलहाल एक नर्स बनने की ट्रेनिंग ले रही हैं और उन्हें इस नए पेशे से प्यार हो गया है। उनका कहना है कि जब लोगों को मदद की सख्त जरूरत हो और वे आप पर भरोसा कर सकें, तो उनके लिए वह भरोसेमंद इंसान बनना बहुत ही खास एहसास देता है। इस भावुक मौके पर केटी ने अपने शानदार सफर के लिए कोच, टीम के साथियों और परिवार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से अपनी मां और अपने दिवंगत पार्टनर रैब वार्डेल को याद किया। गौरतलब है कि रैब का 2022 में 37 साल की उम्र में कार्डियक अरेस्ट से अचानक निधन हो गया था। केटी ने कहा कि रैब ने ही उन्हें सिखाया था कि जीवन में रिलैक्स रहने और मजे करने से ज्यादा जरूरी कुछ नहीं है और वह हर दिन इन दोनों चीजों में बेहतर हो रही हैं। 13 साल लंबा रहा करियर, 7 वर्ल्ड टाइटल जीते – केटी ने 19 साल की उम्र में ब्रिटेन की एंड्योरेंस स्क्वाड में जगह बनाई थी। अपने शानदार करियर में उन्होंने कुल 51 प्रमुख मेडल जीते। उनके नाम ओलिंपिक में दो स्वर्ण और एक रजत पदक, सात वर्ल्ड टाइटल, रिकॉर्ड 21 यूरोपियन टाइटल और एक कॉमनवेल्थ गेम्स का स्वर्ण पदक दर्ज है। – वह महिला ‘टीम परस्यूट’ में विश्व रिकॉर्ड धारक टीम का हिस्सा भी हैं। उनके पदकों की संख्या और भी अधिक हो सकती थी, यदि उन्हें 2022 के बर्मिंघम गेम्स और बाद में ओलिंपिक से ठीक पहले चोट व अन्य कारणों से अपना नाम वापस नहीं लेना पड़ता।



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