पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा में इमरजेंसी लागू, शहबाज सरकार ने इमरान खान की पार्टी की सरकार बर्खास्त की; आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में मदद न करने का लगाया आरोप

इस्लामाबाद। पाकिस्तान में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ने रविवार को एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाते हुए खैबर-पख्तूनख्वा (केपी) प्रांत में इमरजेंसी लागू कर दी है। इस इमरजेंसी के लागू होने के साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की प्रांतीय सरकार को बर्खास्त कर दिया गया है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने संघीय कैबिनेट की इस सिफारिश को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी है, जिसके बाद प्रांत में संघीय शासन की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
केंद्र सरकार की ओर से यह सख्त कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत की पीटीआई सरकार पर आतंकवाद के खिलाफ चलाए जा रहे राष्ट्रीय अभियान में सहयोग नहीं करने का गंभीर आरोप लगाया गया है। संघीय सरकार का स्पष्ट मत है कि प्रांतीय प्रशासन सुरक्षा बलों के आतंकवाद विरोधी मिशन में बाधा उत्पन्न कर रहा था और आवश्यक समन्वय स्थापित करने में पूरी तरह विफल रहा। इसी आधार पर संघीय कैबिनेट ने प्रांत में इमरजेंसी लगाने और पीटीआई सरकार को बर्खास्त करने की सिफारिश राष्ट्रपति के समक्ष रखी थी।
राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने संविधान में निहित अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए संघीय कैबिनेट की सिफारिश पर अपनी मुहर लगा दी। इसके साथ ही खैबर-पख्तूनख्वा में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया है। पाकिस्तान के संवैधानिक ढांचे के तहत जब किसी प्रांत में संवैधानिक तंत्र विफल हो जाता है या केंद्र सरकार को लगता है कि प्रांत का शासन संविधान के अनुसार नहीं चल रहा है, तो ऐसी स्थिति में इमरजेंसी लगाकर वहां का प्रशासन सीधे केंद्र के अधीन कर दिया जाता है। रविवार को लिया गया यह फैसला इसी संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है।
खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत पाकिस्तान का वह क्षेत्र है जो अफगानिस्तान की सीमा से लगा हुआ है और ऐतिहासिक रूप से आतंकवादी गतिविधियों से सबसे अधिक प्रभावित रहा है। हाल के वर्षों में इस प्रांत में आतंकवादी घटनाओं में काफी वृद्धि देखी गई है। पाकिस्तानी सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां यहां आतंकवाद के खात्मे के लिए लगातार अभियान चला रही हैं। शहबाज शरीफ सरकार का आरोप है कि इन संवेदनशील सुरक्षा अभियानों में पीटीआई की प्रांतीय सरकार ने जानबूझकर सहयोग नहीं किया, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया था। आतंकवाद के खिलाफ मदद नहीं करने का यही आरोप सरकार बर्खास्तगी का मुख्य आधार बना।
यह पूरा घटनाक्रम पाकिस्तान की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में शहबाज शरीफ नीतित संघीय सरकार और इमरान खान की पार्टी पीटीआई के बीच जारी तीखे टकराव का ही एक नया और अत्यंत गंभीर अध्याय है। इमरान खान वर्तमान में कई कानूनी मामलों में जेल की सजा काट रहे हैं और उनकी पार्टी केंद्र सरकार के खिलाफ लगातार मुखर रही है। खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत पीटीआई का सबसे बड़ा और मजबूत राजनीतिक गढ़ माना जाता है। ऐसे में इस प्रांत की सरकार को बर्खास्त करना पीटीआई के लिए एक बहुत बड़ा राजनीतिक झटका है।
संघीय सरकार ने इस कार्रवाई को विशुद्ध रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियान की अनिवार्यता से जोड़कर पेश किया है। सरकार का कहना है कि देश की अखंडता और नागरिकों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। यदि कोई प्रांतीय सरकार केंद्र के सुरक्षा मिशन में सहयोग करने के बजाय बाधा बनती है, तो उसके खिलाफ संवैधानिक कार्रवाई करना संघीय सरकार की जिम्मेदारी है।
इमरजेंसी लागू होने के बाद अब खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत का संपूर्ण प्रशासन सीधे तौर पर इस्लामाबाद में बैठे केंद्रीय अधिकारियों के नियंत्रण में आ जाएगा। प्रांत की कानून व्यवस्था, पुलिस प्रशासन और सुरक्षा से जुड़े सभी महत्वपूर्ण फैसले अब संघीय सरकार द्वारा लिए जाएंगे। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार जल्द ही प्रांत में अपना प्रशासनिक तंत्र स्थापित करेगी ताकि आतंकवाद के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन को बिना किसी राजनीतिक रुकावट के तेजी से आगे बढ़ाया जा सके।
हालांकि, स्रोत सामग्री में पीटीआई या इमरान खान की ओर से इस बर्खास्तगी पर आई कोई प्रतिक्रिया या बयान उपलब्ध नहीं है। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि पीटीआई इस संवैधानिक कार्रवाई के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी या नहीं। लेकिन पाकिस्तान के राजनीतिक इतिहास को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि पीटीआई इस कदम का कड़ा विरोध कर सकती है।
पाकिस्तान में पहले भी विभिन्न प्रांतों में राजनीतिक संकट या कानून व्यवस्था की विफलता के कारण इमरजेंसी लगाई जाती रही है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी मिशन में सहयोग न देने के आधार पर किसी प्रांतीय सरकार की सीधे बर्खास्तगी एक अत्यंत संवेदनशील और दुर्लभ कदम माना जा रहा है। रविवार को उठाए गए इस कदम ने पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर भूचाल ला दिया है और आने वाले दिनों में केंद्र और पीटीआई के बीच राजनीतिक संघर्ष और अधिक तीव्र होने की संभावना जताई जा रही है।

