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पंजाब CM ऑफिस में कथित भ्रष्टाचार: CBI की FIR में लुधियाना के कारोबारी राजदीप नागरा का नाम, कांग्रेस नेताओं से रहे करीबी

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खन्ना/लुधियाना। पंजाब में सत्ता परिवर्तन होने के बावजूद खन्ना के रहने वाले कारोबारी राजदीप नागरा एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यालय में कथित तौर पर हुए भ्रष्टाचार के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने जो प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है, उसमें राजदीप नागरा का नाम भी सामने आया है। इस एफआईआर में मुख्यमंत्री के विशेष कार्य अधिकारी (OSD) राजबीर सिंह घुम्मण सहित कुल छह लोगों को नामजद किया गया है। यह मामला राज्य की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सीबीआई ने पंजाब के मुख्यमंत्री कार्यालय में कथित भ्रष्टाचार से जुड़े इस मामले में जो एफआईआर दर्ज की है, वह बेहद संवेदनशील मानी जा रही है। इस एफआईआर में मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मण का नाम प्रमुखता से शामिल है। उनके अलावा पांच अन्य व्यक्तियों के खिलाफ भी इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है। इन सभी आरोपितों के साथ ही खन्ना के कारोबारी राजदीप नागरा का नाम भी इस जांच के दायरे में आ गया है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि नागरा की इस कथित भ्रष्टाचार मामले में क्या ठोस भूमिका थी या वे किस क्षमता में इस प्रकरण से जुड़े हुए थे।

राजदीप नागरा पंजाब की राजनीति में कोई नया नाम नहीं हैं। वे लंबे समय से कांग्रेस पार्टी के नेताओं के करीबी रहे हैं। पंजाब में जब कांग्रेस की सरकार थी, तब नागरा का उठना-बैठना कई प्रभावशाली कांग्रेसी नेताओं के साथ रहा है। सत्ता बदलने और आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार बनने के बाद भी उनका नाम किसी बड़े मामले में सामने आना यह दर्शाता है कि पिछली सरकारों के दौरान हुए लेनदेन या प्रशासनिक कार्यों की जांच अब भी जारी है। सूत्रों के मुताबिक, नागरा का कारोबारिक नेटवर्क काफी विस्तृत है और उनका संबंध लुधियाना तथा खन्ना क्षेत्र के व्यापारिक हलकों से गहरा रहा है।

मुख्यमंत्री कार्यालय में भ्रष्टाचार का यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्तमान में पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है और मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सत्ता संभालते समय पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त शासन का वादा किया था। ऐसे में उनके ही कार्यालय से जुड़े ओएसडी के खिलाफ सीबीआई द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने से राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। विपक्षी दल इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा सकते हैं, वहीं सत्ताधारी दल का रुख अभी तक इस विशिष्ट मामले में पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है।

सीबीआई की इस प्राथमिकी में कुल छह लोगों को नामजद किया गया है। इनमें राजबीर सिंह घुम्मण सबसे वरिष्ठ पद पर कार्यरत व्यक्ति हैं, क्योंकि वे सीधे तौर पर मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े हुए थे। ओएसडी का पद राज्य प्रशासन में अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है, जहां से नीतियों और फाइलों के निपटारे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जाती है। ऐसे में किसी ओएसडी के खिलाफ भ्रष्टाचार की एफआईआर दर्ज होना पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए एक गंभीर संदेश है।

इस मामले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो के हाथों में है। सीबीआई अपनी जांच प्रक्रिया के तहत इन सभी छह नामजद आरोपियों से पूछताछ कर सकती है। इसके अलावा, राजदीप नागरा से भी उनके कारोबारिक लेनदेन और मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों के साथ उनके संबंधों को लेकर सवाल किए जाने की संभावना है। चूंकि नागरा कांग्रेस नेताओं के करीबी रहे हैं, इसलिए जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि क्या पूर्ववर्ती सरकार के समय के कुछ मामले वर्तमान प्रशासन में भी प्रभाव डाल रहे थे या नहीं।

बता दें कि पंजाब में पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े भ्रष्टाचार मामले सामने आए हैं। सरकार बदलने के बाद अक्सर पिछली सरकारों या प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ जांच तेज होती देखी गई है। खन्ना के कारोबारी राजदीप नागरा का नाम आना इसी कड़ी का हिस्सा प्रतीत होता है। हालांकि, अभी यह जांच का प्रारंभिक चरण है और एफआईआर दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि नामजद व्यक्ति दोषी हैं। कानूनी प्रक्रिया के अनुसार, सभी आरोपियों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा।

वहीं, दूसरी ओर लुधियाना और खन्ना के स्थानीय स्तर पर भी इस खबर ने दस्तक दे दी है। कारोबारी हलकों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिरकार राजदीप नागरा का मुख्यमंत्री कार्यालय के कथित भ्रष्टाचार से क्या संबंध है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों में इस बात को लेकर उत्सुकता है कि सीबीआई की जांच में आगे क्या तथ्य सामने आते हैं।

फिलहाल, सीबीआई ने इस मामले में आधिकारिक तौर पर अधिक विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। जांच एजेंसी गोपनीयता के साथ अपने काम को आगे बढ़ा रही है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस बात की संभावना है कि और भी कई नाम या तथ्य सामने आ सकते हैं। पंजाब की जनता और राजनीतिक विश्लेषक इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े इस संवेदनशील मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो किस दिशा में आगे बढ़ता है और इसके क्या परिणाम निकलते हैं।