Sun, 11 Oct 20264:12 PM
Sun, Oct 11, 2026Updated 4:12 PM IST
होम › पंजाब

पंजाब सरकार की नीतियों के खिलाफ मास्टर कैडर यूनियन का बिगुल: सीएम मान के हलके संगरूर में 10 अक्टूबर को होगा बड़ा प्रदर्शन

WhatsAppFacebookX

तरनतारन। वंदे भारत न्यूज़। पंजाब सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ राज्य के शिक्षकों ने अब तीखा मोर्चा खोल दिया है। तरनतारन जिले में मास्टर कैडर यूनियन पंजाब की जिला और राज्य स्तरीय नेतृत्व ने एक महत्वपूर्ण बैठक कर सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन का फैसला लिया है। यूनियन ने ऐलान किया है कि यदि उनकी लंबित मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो हजारों की संख्या में कर्मचारी 10 अक्टूबर को मुख्यमंत्री भगवंत मान के विधानसभा हलके संगरूर में जुटकर विशाल प्रदर्शन करेंगे। इस फैसले से पंजाब के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि यह प्रदर्शन सीधे तौर पर मुख्यमंत्री के अपने गृह हलके में आयोजित किया जा रहा है।

मास्टर कैडर यूनियन पंजाब के नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन किसी एक मुद्दे तक सीमित नहीं है, बल्कि पंजाब सरकार की समग्र कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ एक निर्णायक लड़ाई है। तरनतारन में हुई इस अहम बैठक में यूनियन के जिला स्तरीय पदाधिकारियों के साथ-साथ राज्य स्तरीय नेतृत्व ने भी शिरकत की। बैठक में मौजूद नेताओं ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने सत्ता में आने से पहले शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों से कई वादे किए थे, लेकिन सत्ता संभालने के बाद उन वादों को पूरा करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यूनियन का कहना है कि सरकार की नीतियां लगातार कर्मचारियों के हितों के खिलाफ जा रही हैं, जिससे शिक्षकों और अन्य सरकारी कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है।

यूनियन के नेताओं ने बताया कि उन्होंने पहले भी अपनी मांगों को लेकर सरकार के सामने अपना पक्ष रखा था। इसी क्रम में मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से उन्हें अक्टूबर महीने में बैठक बुलाकर बातचीत करने का आश्वासन दिया गया था। यूनियन ने इस आश्वासन को देखते हुए कुछ समय तक इंतजार किया, लेकिन उनका आरोप है कि सरकार की तरफ से इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल नहीं दिखाई दी। जब बातचीत और आश्वासनों का दौर बेनतीजा साबित होने लगा, तो यूनियन के जिला और राज्य नेतृत्व ने यह कड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया। नेताओं ने स्पष्ट किया कि वे सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों का इंतजार कर चुके हैं और अब उनके पास सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।

10 अक्टूबर को संगरूर में प्रस्तावित इस विशाल प्रदर्शन को लेकर यूनियन ने पूरी ताकत झोंक दी है। चूंकि संगरूर मुख्यमंत्री भगवंत मान का अपना विधानसभा क्षेत्र है, इसलिए यूनियन ने रणनीतिक रूप से इसी स्थान को चुना है ताकि सरकार और मुख्यमंत्री तक उनकी बात सीधे और सख्त तरीके से पहुंच सके। यूनियन का दावा है कि इस प्रदर्शन में पंजाब भर से हजारों की संख्या में मास्टर कैडर के शिक्षक और अन्य कर्मचारी शामिल होंगे। इसे केवल तरनतारन जिले का मामला न मानते हुए यूनियन ने इसे राज्यव्यापी आंदोलन का रूप दे दिया है। नेताओं का कहना है कि विभिन्न जिलों से कर्मचारी संगरूर पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं और इसके लिए जमीनी स्तर पर संपर्क अभियान तेज कर दिया गया है।

मास्टर कैडर यूनियन पंजाब ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 10 अक्टूबर से पहले उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है और सरकार बातचीत के लिए गंभीरता नहीं दिखाती है, तो संगरूर का प्रदर्शन निश्चित रूप से होगा। यूनियन ने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का उपयोग करते हुए प्रदर्शन करेंगे, लेकिन सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। यूनियन के अनुसार, शिक्षकों की उपेक्षा से राज्य की शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचे पर सीधा असर पड़ रहा है, जिसे नजरअंदाज करना सरकार के लिए भारी पड़ सकता है।

इस पूरे मामले में तरनतारन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि यहीं से इस आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई है। जिला और राज्य स्तरीय नेतृत्व के एक साथ आकर यह फैसला लेना यह दर्शाता है कि यूनियन के भीतर इस मुद्दे को लेकर कितनी एकजुटता है। हालांकि, सरकार या प्रशासन की तरफ से अभी तक इस घोषित प्रदर्शन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से अक्टूबर में दी गई बैठक की तिथि को लेकर कोई नया शेड्यूल जारी किया गया है या नहीं।

पंजाब में पिछले कुछ समय से विभिन्न कर्मचारी संगठन अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मुखर होते रहे हैं। ऐसे में मास्टर कैडर यूनियन का मुख्यमंत्री के ही हलके में जाकर प्रदर्शन करने का यह फैसला राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार 10 अक्टूबर से पहले यूनियन की मांगों पर ध्यान देती है और बैठक का आश्वासन पूरा करती है, या फिर संगरूर में हजारों कर्मचारियों का हुजूम उमड़ेगा, जो सीधे तौर पर मुख्यमंत्री भगवंत मान के लिए एक बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौती बन जाएगा। यूनियन ने अपने रुख को दोहराते हुए कहा है कि मांगें पूरी होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।