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Sat, Oct 10, 2026Updated 4:42 PM IST
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पन्ना: सलेहा में लंपी वायरस के खतरे के बीच सरकारी पशु अस्पताल बंद मिला, घंटों इंतजार के बाद पशुपालक बिना इलाज लौटे

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वन्दे भारत न्यूज़, पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में पशुपालकों को एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली का सामना करना पड़ा है। जिले के सलेहा क्षेत्र में लंपी वायरस फैलने की आशंका गहराती जा रही है। इस संभावित खतरे के बीच शनिवार दोपहर तक क्षेत्र का सरकारी पशु अस्पताल पूरी तरह से बंद पाया गया। दूर-दराज के गांवों से अपने बीमार और स्वस्थ पशुओं को लेकर पहुंचे पशुपालकों को अस्पताल परिसर में घंटों तक इंतजार करना पड़ा, लेकिन उन्हें न तो कोई डॉक्टर उपलब्ध हो सका और न ही कोई अन्य कर्मचारी। अंततः पशुपालकों को बिना किसी इलाज या टीकाकरण के निराश होकर अपने घरों की ओर लौटना पड़ा।

मिली जानकारी के अनुसार, पन्ना जिले के सलेहा और इसके आसपास के इलाकों में इन दिनों लंपी वायरस को लेकर चिंता का माहौल बना हुआ है। लंपी वायरस मुख्य रूप से मवेशियों, विशेषकर गायों और भैंसों को प्रभावित करने वाली एक संक्रामक बीमारी है। इस वायरस के संक्रमण से पशुओं की त्वचा पर गांठें बन जाती हैं, तेज बुखार आता है और दूध उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की जाती है। समय रहते यदि उचित उपचार और रोकथाम के उपाय न किए जाएं, तो यह वायरस पूरे झुंड में तेजी से फैल सकता है और पशुओं की मौत का कारण भी बन सकता है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों के पशुपालकों के लिए सरकारी पशु अस्पताल ही एकमात्र सहारा होते हैं, जहां वे अपने पशुओं का मुफ्त इलाज और वैक्सीनेशन करवा सकते हैं।

शनिवार को जब लंपी वायरस के बढ़ते डर के बीच पशुपालक अपने पशुओं को लेकर सलेहा स्थित सरकारी पशु अस्पताल पहुंचे, तो वहां का नजारा चौंकाने वाला था। दोपहर का समय होने के बावजूद अस्पताल के दरवाजे बंद थे। परिसर में न तो कोई पशु चिकित्सक मौजूद था और न ही कोई सहायक स्टाफ या कर्मचारी दिखाई दिया। पशुपालकों ने बताया कि वे सुबह से ही अस्पताल के बाहर इंतजार कर रहे थे। कई लोग अपने गांवों से कई किलोमीटर की दूरी तय करके पैदल, साइकिल या ट्रैक्टर-ट्रॉली के जरिए यहां पहुंचे थे। गर्मी और धूप में पशुओं को खड़ा रखना उनके लिए बेहद कठिन हो रहा था, लेकिन अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई जिम्मेदार व्यक्ति नहीं पहुंचा।

ग्रामीण पशुपालकों का कहना है कि लंपी वायरस की आशंका के चलते वे काफी परेशान हैं। उन्होंने अपने पशुओं को सुरक्षित रखने और संक्रमण से बचाने के लिए टीकाकरण (वैक्सीनेशन) करवाने की योजना बनाई थी। इसके अलावा, कुछ पशुपालक अपने बीमार पशुओं को इलाज के लिए लेकर आए थे, जिन्हें तत्काल चिकित्सीय देखभाल की आवश्यकता थी। हालांकि, डॉक्टर और स्टाफ की अनुपस्थिति के कारण उनका यह उद्देश्य पूरा नहीं हो सका। घंटों तक इंतजार करने के बाद जब कोई अधिकारी या कर्मचारी नहीं पहुंचा, तो सभी पशुपालकों को बिना इलाज और बिना टीकाकरण के ही वापस लौटना पड़ा।

यह पहला अवसर नहीं है जब ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सेवाओं की ऐसी दुर्दशा सामने आई हो। पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ होता है। किसानों और पशुपालकों की आय का एक बड़ा हिस्सा दुग्ध उत्पादन और पशुपालन पर निर्भर करता है। जब लंपी वायरस जैसे संक्रामक रोगों का खतरा मंडरा रहा हो, तब सरकारी पशु अस्पतालों का बंद मिलना पशुपालकों के लिए किसी बड़े संकट से कम नहीं है। यदि समय रहते इस वायरस को नियंत्रित नहीं किया गया और पशुओं का उचित टीकाकरण नहीं हुआ, तो सलेहा और आसपास के गांवों में पशुधन को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

पशुपालकों ने इस लापरवाही पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उनका कहना है कि सरकार द्वारा पशुओं के स्वास्थ्य और टीकाकरण को लेकर लगातार दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। अस्पताल में न डॉक्टर की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जा रही है और न ही स्टाफ की व्यवस्था दुरुस्त है। पशुपालकों ने जिला प्रशासन और संबंधित पशुपालन विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि सलेहा पशु अस्पताल की इस समस्या पर तुरंत संज्ञान लिया जाए। अस्पताल में डॉक्टरों और कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, ताकि पशुपालकों को अपनी मूलभूत सुविधाओं के लिए घंटों दर-दर की ठोकरें न खानी पड़ें।

वहीं, लंपी वायरस के संभावित प्रकोप को देखते हुए पशुपालकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने पशुओं की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। यदि किसी पशु में बुखार, त्वचा पर गांठ या सुस्ती जैसे लक्षण दिखाई दें, तो उसे अन्य स्वस्थ पशुओं से तुरंत अलग कर दें। फिलहाल, सलेहा में सरकारी पशु अस्पताल के बंद मिलने की इस घटना ने पशुपालन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि विभागीय अधिकारी इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं और पशुपालकों की समस्याओं का कब तक समाधान किया जाता है।