पश्चिम चंपारण: हर्डी बिरनी के काटने से दो वर्षीय मासूम की मौत, नवरात्र के पहले दिन घर में पसरा मातम, ग्रामीणों ने छत्ते को जलाया

बिहार के पश्चिम चंपारण जिले से एक अत्यंत दुखद और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जिले के योगापट्टी प्रखंड क्षेत्र में एक दो वर्षीय मासूम बच्ची की हर्डी बिरनी (एक प्रकार का खतरनाक ततैया) के काटने से दर्दनाक मौत हो गई। यह हृदयविदारक घटना योगापट्टी प्रखंड की चौमुखा पंचायत के वार्ड संख्या 5 स्थित चौमुखा गांव में घटी है। मृत बच्ची की पहचान गांव निवासी अशोक यादव की पुत्री खुश्बू कुमारी के रूप में हुई है। इस घटना के बाद पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया है और पीड़ित परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक हादसा उस समय हुआ जब शारदीय नवरात्रि का पहला दिन था। जिस समय पूरे देश और प्रदेश में मां दुर्गा की आराधना और भक्ति का माहौल था, त्योहारों की शुरुआत हो रही थी, ठीक उसी समय चौमुखा गांव में अशोक यादव के घर में मातम पसर गया। नवरात्र जैसे पवित्र और उत्साहपूर्ण अवसर पर किसी भी परिवार के साथ ऐसी अनहोनी हो जाना पूरे इलाके के लिए एक गहरा सदमा बन गया है। गांव के लोग जहां नवरात्रि की तैयारियों और पूजा-पाठ में जुटे हुए थे, वहीं अशोक यादव के घर से उठती चीख-पुकार ने सभी को स्तब्ध कर दिया।
घटना के विवरण के मुताबिक, दो साल की मासूम खुश्बू कुमारी अपने घर में ही मौजूद थी। इसी दौरान घर में या उसके आसपास बनाए गए हर्डी बिरनी के छत्ते से निकले जहरीले कीड़ों ने बच्ची पर हमला कर दिया और उसे डंक मार दिया। हर्डी बिरनी का डंक बेहद जहरीला होता है और छोटे बच्चों के लिए यह जानलेवा साबित हो सकता है। बच्ची के शरीर पर कई जगह इन कीड़ों ने डंक मारे, जिससे वह तड़पने लगी। परिजनों ने बच्ची की हालत बिगड़ते देख तुरंत उसे बचाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन बिरनी के जहरीले डंक का असर इतना तेज और घातक था कि मासूम खुश्बू अपनी जिंदगी की जंग हार गई और उसकी मौत हो गई।
मासूम खुश्बू की मौत की खबर जैसे ही गांव में फैली, पूरे चौमुखा गांव में कोहराम मच गया। जो लोग नवरात्र के पहले दिन की खुशी में शामिल होने वाले थे, वे सब पीड़ित परिवार को सांत्वना देने के लिए उनके घर पहुंचने लगे। पिता अशोक यादव और परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। दो साल की बच्ची, जो अभी जीवन की शुरुआत ही कर रही थी, उसका इस तरह अचानक चले जाना परिजनों के लिए सहन करना लगभग असंभव हो गया है। गांव के बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
इस घटना के बाद गुस्साए और भयभीत ग्रामीणों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उस हर्डी बिरनी के छत्ते को जलाकर नष्ट कर दिया, जिससे ये खतरनाक कीड़े निकले थे। ग्रामीणों ने यह कदम इसलिए उठाया ताकि गांव के अन्य बच्चों, बुजुर्गों या किसी अन्य व्यक्ति की जान को इन जहरीले कीड़ों से कोई और खतरा न रहे। छत्ते को जलाए जाने के बाद भी गांव में दहशत का माहौल देखा गया। लोगों ने एक-दूसरे से अपने घरों और आसपास के क्षेत्रों में ऐसे किसी भी छत्ते की जांच करने की अपील की है, ताकि भविष्य में इस तरह की कोई और दुर्भाग्यपूर्ण घटना न घट सके।
हर्डी बिरनी या इसी प्रकार के अन्य जहरीले ततैयों का डंक ग्रामीण इलाकों में एक गंभीर समस्या बनी हुई है। विशेषज्ञों और चिकित्सकों के अनुसार, हर्डी बिरनी का जहर मानव शरीर के लिए अत्यंत घातक होता है। जब यह कीड़े किसी व्यक्ति को काटते हैं, तो उनका जहर शरीर में तेजी से फैलता है। यदि काटे गए व्यक्ति की उम्र कम हो, जैसे कि छोटे बच्चे, या फिर उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो, तो यह जहर कुछ ही समय में जानलेवा साबित हो जाता है। बच्चों का शरीर नाजुक होने के कारण वे इस जहर के प्रभाव को सहन नहीं कर पाते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं, जहां मकानों की छतों, पेड़ों, दीवारों या झाड़ियों में बिरनी अपना छत्ता बना लेती है। कई बार लोगों को इसका पता भी नहीं चलता और अचानक हुए हमले में बड़ी दुर्घटना हो जाती है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि बिरनी के काटने पर यदि मरीज को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल ले जाया जाए और एंटी-एलर्जिक या आवश्यक उपचार दिया जाए, तो कई मामलों में जान बचाई जा सकती है। हालांकि, ग्रामीण इलाकों में समय पर उचित चिकित्सा सुविधा न मिल पाना भी कई बार मौत का कारण बन जाता है।
योगापट्टी प्रखंड के चौमुखा गांव में हुई इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। नवरात्र के पहले दिन अशोक यादव के घर में पसरा यह मातम पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। फिलहाल, पीड़ित परिवार के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं और पूरा गांव इस अपूरणीय क्षति के गम में डूबा हुआ है।

