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Sun, Oct 11, 2026Updated 4:12 PM IST
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पठानकोट: सिविल अस्पताल के नशा छुड़ाऊ केंद्र की बदइंतजामी से आक्रोशित, दवा लेने वाले कॉलोनी में करते हैं नशा; स्थानीय लोगों ने किया प्रदर्शन

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पठानकोट। पंजाब के पठानकोट जिले में सिविल अस्पताल परिसर में संचालित नशा छुड़ाऊ केंद्र की बदइंतजामी और वहां से दवा लेने आने वाले कुछ लोगों द्वारा आसपास के रिहायशी इलाकों में किए जा रहे हुड़दंग के खिलाफ स्थानीय निवासियों का गुस्सा फूट पड़ा है। भारी संख्या में एकत्र हुए परेशान लोगों ने केंद्र के विरोध में प्रदर्शन किया और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नशा मुक्ति के लिए बनाए गए इस केंद्र के आसपास सुबह से लेकर देर रात तक असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे पूरे मोहल्ले में भय और अशांति का माहौल बना हुआ है।

स्थानीय निवासियों ने बताया कि पठानकोट के सिविल अस्पताल परिसर में स्थित नशा छुड़ाऊ केंद्र से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग नशा मुक्ति की दवा प्राप्त करने के लिए आते हैं। हालांकि, इनमें से कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगे हैं कि वे दवा लेने के बाद वापस अपने घर जाने के बजाय अस्पताल के ठीक बगल में स्थित रिहायशी कॉलोनियों और आसपास के क्षेत्रों में ही रुक जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ये व्यक्ति दवा प्राप्त करने के बाद वहीं आसपास के इलाकों में नशे का सेवन करना शुरू कर देते हैं। इस कारण जो केंद्र लोगों को नशे से दूर करने और उन्हें स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से बनाया गया था, वह अब खुद आसपास के इलाकों में नशे के प्रसार और अव्यवस्था का केंद्र बनता जा रहा है।

प्रदर्शन कर रहे स्थानीय लोगों ने विस्तार से अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि केंद्र के आसपास सुबह के समय से लेकर देर रात तक हुड़दंग मचाने वालों का तांता लगा रहता है। इन असामाजिक तत्वों की वजह से कॉलोनी में रहने वाले परिवारों का जीना मुहाल हो गया है। खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए इन गलियों और रास्तों से गुजरना बेहद कठिन और असुरक्षित हो गया है। लोगों का आरोप है कि नशे की हालत में ये व्यक्ति अक्सर गाली-गलौज करते हैं, आपस में झगड़ते हैं और राहगीरों से अभद्र व्यवहार करते हैं। कई बार तो स्थिति इतनी बिगड़ जाती है कि स्थानीय लोगों को अपने घरों के दरवाजे बंद करके बैठना पड़ता है। रात के समय होने वाले शोर-शराबे और हुड़दंग की वजह से मोहल्ले के लोगों की नींद खराब हो रही है और उनका मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है।

आक्रोशित निवासियों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी नाराजगी नशा छुड़ाऊ केंद्र की स्थापना या नशा मुक्ति की दवा देने की प्रक्रिया से नहीं है, बल्कि उनकी मुख्य चिंता केंद्र के संचालन में बरती जा रही घोर लापरवाही और बदइंतजामी को लेकर है। उनका कहना है कि अस्पताल प्रशासन और केंद्र के जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से उन लोगों पर कोई निगरानी नहीं रखी जा रही है जो दवा लेने आते हैं। यदि दवा वितरण के बाद इन व्यक्तियों की गतिविधियों पर ध्यान दिया जाए और उन्हें तुरंत अपने घरों की ओर रवाना किया जाए, तो इस तरह की समस्याएं पैदा ही नहीं होंगी। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि जब भी उन्होंने पहले इस संबंध में शिकायत करने का प्रयास किया, तो उनकी बात को अनसुना कर दिया गया, जिसके बाद उन्हें सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

प्रदर्शन के दौरान लोगों ने पठानकोट जिला प्रशासन, सिविल अस्पताल के प्रबंधन और पुलिस विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया और केंद्र के आसपास असामाजिक तत्वों का जमावड़ा जारी रहा, तो वे अपना विरोध प्रदर्शन और तेज करेंगे। लोगों ने मांग की है कि नशा छुड़ाऊ केंद्र पर आने-जाने वालों की उचित पहचान दर्ज की जाए और उनके व्यवहार पर नियंत्रण रखने के लिए सुरक्षा कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा, आसपास के रिहायशी क्षेत्रों में पुलिस की गश्त बढ़ाई जाए ताकि स्थानीय लोगों को सुरक्षा का अनुभव हो सके।

पठानकोट सिविल अस्पताल का यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पंजाब सरकार राज्य में नशे की समस्या से निपटने और नशा मुक्ति केंद्रों के प्रभावी संचालन को लेकर लगातार दावे कर रही है। ऐसे में एक सरकारी अस्पताल परिसर में चल रहे केंद्र के बाहर ही नशा करने और हुड़दंग मचाने की घटनाएं प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। स्थानीय निवासियों का यह प्रदर्शन स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि स्वास्थ्य सेवाओं और नशा मुक्ति कार्यक्रमों को लागू करते समय आम जनता की सुरक्षा और शांति का ध्यान रखना प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। फिलहाल, इस प्रदर्शन के बाद प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर पूरे इलाके की नजर टिकी हुई है।