पटना: 1731 पूर्व KYP केंद्रों को दोबारा चालू कराने की मांग, नियोजन भवन के सामने 200 से अधिक संचालकों का धरना, पुलिस ने खदेड़ा

पटना। वंदे भारत न्यूज। बिहार की राजधानी पटना में सोमवार को बिहार कौशल विकास मिशन (बीएसडीएम) के तहत संचालित रहे कुशल युवा कार्यक्रम (KYP) के पूर्व केंद्र संचालकों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया। राज्य भर में बंद हो चुके 1731 पूर्व KYP केंद्रों को दोबारा चालू कराने की मांग को लेकर 200 से अधिक संचालक पटना स्थित नियोजन भवन के गेट के पास एकत्र हुए और धरने पर बैठ गए। हालांकि, कुछ ही देर बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने प्रदर्शनकारी संचालकों को वहां से खदेड़ दिया। इस घटनाक्रम से नियोजन भवन परिसर और उसके आसपास के इलाके में अस्थायी तनाव का माहौल बन गया।
जानकारी के अनुसार, बिहार कौशल विकास मिशन के KYP केंद्र संचालक सुबह से ही बड़ी संख्या में नियोजन भवन के गेट के पास जुटने लगे थे। प्रदर्शन में शामिल होने के लिए राज्य के विभिन्न जिलों से लगभग 200 से अधिक संचालक पटना पहुंचे थे। इन सभी संचालकों की मुख्य मांग थी कि राज्य सरकार द्वारा पूर्व में बंद किए गए 1731 KYP केंद्रों को पुनः चालू किया जाए। प्रदर्शनकारियों ने अपने हाथों में बैनर और तख्तियां ले रखी थीं, जिन पर केंद्रों को दोबारा शुरू करने और उनकी रोजी-रोटी का रास्ता खोलने संबंधी बातें लिखी हुई थीं। संचालकों ने नियोजन भवन के बाहर नारेबाजी करते हुए प्रशासन और सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया।
कुशल युवा कार्यक्रम (KYP) बिहार सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना रही है, जिसका उद्देश्य राज्य के बेरोजगार युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार के योग्य बनाना था। इस मिशन के तहत राज्य के लगभग हर प्रखंड और जिले में प्रशिक्षण केंद्र खोले गए थे। इन केंद्रों का संचालन निजी संचालकों या एजेंसियों द्वारा किया जाता रहा है। पिछले कई वर्षों में इन केंद्रों के माध्यम से लाखों युवाओं को कंप्यूटर, सिलाई, इलेक्ट्रिशियन, प्लंबिंग और अन्य तकनीकी कार्यों का प्रशिक्षण दिया गया। हालांकि, समय के साथ नीतियों में बदलाव और अन्य कारणों से राज्य भर के 1731 KYP केंद्रों का संचालन बंद कर दिया गया। केंद्र बंद होने से उन पर निर्भर संचालकों, प्रशिक्षकों और अन्य स्टाफ की आजीविका पर सीधा असर पड़ा है।
प्रदर्शन कर रहे संचालकों का कहना है कि उन्होंने इन केंद्रों को स्थापित करने और चलाने में अपना भारी निवेश किया था। केंद्र बंद होने के बाद उनके सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। संचालकों ने मांग की है कि यदि सरकार की नई नीति के तहत कौशल विकास का कार्य जारी है, तो अनुभवी पूर्व संचालकों को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए और उनके बंद पड़े 1731 केंद्रों को फिर से खोलने की अनुमति दी जानी चाहिए। उनका तर्क है कि उनके पास पहले से बुनियादी ढांचा, अनुभव और प्रशिक्षण देने की क्षमता मौजूद है, ऐसे में नए सिरे से केंद्र खोलने के बजाय पुराने केंद्रों को पुनर्जीवित करना सरकार और युवाओं दोनों के हित में होगा।
जैसे ही संचालकों की भीड़ नियोजन भवन के गेट के पास बढ़ी और धरने का रूप ले लिया, वहां सुरक्षा व्यवस्था देख रही पुलिस सक्रिय हो गई। सरकारी भवन के गेट पर भीड़ जमा होने और धरना-प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने हस्तक्षेप किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया और वहां से हटने को कहा। जब संचालक अपनी मांगों पर अड़े रहे और पीछे हटने को तैयार नहीं हुए, तो पुलिस ने बलपूर्वक उन्हें वहां से खदेड़ दिया। पुलिस की इस कार्रवाई के दौरान धक्का-मुक्की की स्थिति भी उत्पन्न हुई। संचालकों को नियोजन भवन के गेट के आसपास से हटाकर दूर किया गया, जिससे वहां जमा भीड़ छंट गई।
बिहार कौशल विकास मिशन के तहत संचालित होने वाले इन केंद्रों का मामला पिछले काफी समय से चर्चा में रहा है। राज्य में युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने के लिए सरकार समय-समय पर अपनी योजनाओं और दिशा-निर्देशों में बदलाव करती रही है। इन बदलावों के बीच कई पुराने केंद्र बंद हो गए हैं, जबकि नए मानकों पर कुछ केंद्र काम कर रहे हैं। पूर्व KYP केंद्र संचालकों का यह धरना इसी असंतोष का परिणाम है। फिलहाल, प्रदर्शन के दौरान किसी भी अधिकारी द्वारा संचालकों की मांगों को लेकर कोई औपचारिक बयान या आश्वासन दिए जाने की सूचना नहीं है।
पुलिस द्वारा खदेड़े जाने के बाद संचालकों ने अपने आंदोलन को जारी रखने का संकेत दिया है। उनका कहना है कि जब तक 1731 पूर्व KYP केंद्रों को दोबारा चालू कराने की मांग पूरी नहीं होती, वे संघर्ष करते रहेंगे। नियोजन भवन के सामने हुए इस प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई ने एक बार फिर बिहार में कौशल विकास मिशन के क्रियान्वयन और पूर्व संचालकों की समस्याओं को उजागर किया है। अब यह देखना होगा कि राज्य सरकार और संबंधित विभाग इन संचालकों की मांगों पर क्या रुख अपनाता है और क्या इन बंद पड़े केंद्रों को दोबारा शुरू करने की कोई ठोस पहल की जाती है।

