पटना में 100 करोड़ की ठगी का खुलासा: चार्टर्ड अकाउंटेंट श्रीधर पाठक दो साल बाद गिरफ्तार, जानिए कैसे बनाया साम्राज्य

पटना। बिहार की राजधानी पटना में रुपए डबल करने के नाम पर लोगों से करीब 100 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले आरोपी चार्टर्ड अकाउंटेंट श्रीधर पाठक को पुलिस ने आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी लगभग दो साल की लंबी कवायद और जांच के बाद हुई है। श्रीधर पाठक की गिरफ्तारी होते ही उन तमाम पीड़ितों का दर्द एक बार फिर सामने आ गया है, जिन्होंने अपने बेहतर भविष्य, पैसों के दोगुना होने की लालच और बेटे-बेटियों की शादी जैसे जरूरी कामों के लिए अपनी गाढ़ी कमाई इस चार्टर्ड अकाउंटेंट की कंपनी में निवेश की थी। वंदे भारत न्यूज़ की इस रिपोर्ट में जानिए कि कैसे एक चार्टर्ड अकाउंटेंट ने अपने प्रोफेशनल रुतबे का इस्तेमाल करके 100 करोड़ रुपये की ठगी का विशाल साम्राज्य खड़ा किया।
आरोपी चार्टर्ड अकाउंटेंट श्रीधर पाठक ने लोगों को झांसा देने के लिए जिस तरह की रणनीति अपनाई, वह बेहद सोची-समझी थी। ठगी के इस पूरे खेल में उसने पटना और बोधगया जैसे महत्वपूर्ण शहरों में अपने आलीशान ऑफिस स्थापित किए हुए थे। इन दफ्तरों की भव्यता देखकर आम लोग सहज ही उसकी बातों में आ जाते थे। एक चार्टर्ड अकाउंटेंट होने के नाते श्रीधर पाठक के पास पहले से ही लोगों का भरोसा था, और जब इस भरोसे के साथ पटना और बोधगया के आलीशान दफ्तरों का दिखावा जुड़ गया, तो निवेशकों को लगा कि वे किसी बहुत बड़ी और सुरक्षित कंपनी में अपना पैसा लगा रहे हैं।
इस ठगी के साम्राज्य की एक और चौंकाने वाली हकीकत यह है कि आरोपी के दफ्तरों में नोट गिनने की मशीनें भी रखी हुई थीं। नोट गिनने की मशीनों का इस्तेमाल मुख्य रूप से निवेशकों को यह दिखाने के लिए किया जाता था कि कंपनी के पास भारी मात्रा में नकदी मौजूद है और उनका पैसा पूरी तरह से सुरक्षित है। जब कोई संभावित निवेशक दफ्तर आता था, तो आलीशान इंटीरियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट का पेशेवर रवैया और नोट गिनने की मशीनों की गड़गड़ाहट उसे इस बात के लिए मानसिक रूप से तैयार कर देती थी कि वह बिना किसी संदेह के अपना पैसा यहां जमा कर सकता है। यही वजह थी कि छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों और आम गृहस्थों तक ने इस कंपनी में निवेश किया।
श्रीधर पाठक ने लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए तीन से आठ महीने की अवधि में उनके पैसे को डबल करने का दावा किया था। यही दावा इस पूरे घोटाले की बुनियाद बना। तीन से आठ महीने में पैसा दोगुना होने का मतलब था कि निवेशकों को बाजार के किसी भी वैध माध्यम से कई गुना अधिक मुनाफा मिल रहा था। इसी लालच में आकर लोगों ने अपने भविष्य की बचत, बच्चों की शादी के लिए जोड़े गए रुपये और अन्य जरूरतों के लिए रखे गए धन को श्रीधर पाठक की कंपनी में निवेश कर दिया। चूंकि वह खुद को एक योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट बताता था, इसलिए लोगों ने उसके वित्तीय ज्ञान पर आंख मूंदकर भरोसा कर लिया। उन्हें यह समझ नहीं आया कि इतनी कम अवधि में पैसा डबल करने का वादा वास्तव में एक बहुत बड़े धोखे की शुरुआत है।
पीड़ितों की कहानी इस घोटाले का सबसे दर्दनाक पहलू है। श्रीधर पाठक की गिरफ्तारी के बाद वे लोग सामने आए हैं जिन्होंने अपनी जिंदगी भर की कमाई इस ठगी में गंवा दी। कई परिवार ऐसे हैं जिन्होंने अपने बेटे-बेटियों की शादी के लिए वर्षों से जोड़े गए रुपये इस उम्मीद में लगा दिए थे कि कुछ ही महीनों में उनकी रकम दोगुनी हो जाएगी और वे शादी की तैयारियां और भी अच्छी तरह कर सकेंगे। वहीं, कई लोगों ने अपने बेहतर भविष्य और आर्थिक सुरक्षा के सपने को साकार करने के लिए इस कंपनी में पैसा लगाया था। अब जब पैसा डूब चुका है, तो इन पीड़ितों के सामने न केवल आर्थिक संकट खड़ा हो गया है, बल्कि मानसिक तौर पर भी वे गहरे सदमे से गुजर रहे हैं।
पुलिस ने श्रीधर पाठक को लगभग दो साल की कानूनी प्रक्रिया और छानबीन के बाद गिरफ्तार किया है। इन दो सालों के दौरान आरोपी कानून के शिकंजे से बचने की कोशिश करता रहा। हालांकि, पुलिस की लगातार कोशिशों के चलते अंततः उसे पकड़ लिया गया। 100 करोड़ रुपये की यह ठगी बिहार के हाल के वर्षों के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक मानी जा रही है। एक चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा इस तरह के अपराध को अंजाम दिया जाना समाज में पेशेवर वर्ग की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है।
इस मामले में पुलिस की ओर से आगे की जांच जारी है। यह देखा जा रहा है कि ठगी के इन 100 करोड़ रुपये का निवेश किस-किस क्षेत्र में किया गया और क्या इसमें अन्य लोगों की भी संलिप्तता है। पीड़ितों को उम्मीद है कि श्रीधर पाठक की गिरफ्तारी के बाद पुलिस उनके डूबे हुए पैसे को वापस दिलाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाएगी। फिलहाल, पटना और बोधगया के आलीशान दफ्तरों और नोट गिनने की मशीनों के पीछे छिपा यह 100 करोड़ का काला सच अब कानून के सामने बेनकाब हो चुका है।

