पटना में छात्र संगठन दिशा का SIR के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन, चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के विरोध में लगे नारे

पटना। बिहार की राजधानी पटना में शनिवार को छात्र संगठन दिशा की ओर से एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन विशेष रूप से SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के खिलाफ आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने भिखना पहाड़ी मोड़ के पास इकट्ठा होकर न सिर्फ SIR के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया, बल्कि भारत निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार के विरोध में भी जमकर नारेबाजी की। छात्रों ने हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर सड़क पर उतरकर अपनी मांगों को बुलंद किया और साफ तौर पर कहा कि उनका यह आंदोलन थमने वाला नहीं है।
शनिवार को पटना के भिखना पहाड़ी मोड़ के पास छात्र संगठन दिशा के कार्यकर्ताओं और छात्रों की भारी भीड़ देखने को मिली। सुबह से ही छात्र इस स्थान पर जुटना शुरू हो गए थे। जैसे-जैसे समय बीतता गया, प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ती गई और पूरा इलाका नारों से गूंजने लगा। छात्रों ने अपने हाथों में ऐसे पोस्टर और बैनर पकड़ रखे थे, जिन पर SIR का विरोध करते हुए और चुनाव आयोग तथा केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए नारे लिखे हुए थे। सड़क पर उतरकर किए गए इस प्रदर्शन ने राजधानी पटना में एक बार फिर छात्र आंदोलन की ताकत को दिखाया।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर गंभीर आपत्तियां जताईं। छात्र संगठन दिशा का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम के नाम पर कई वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं या उनकी जानकारी में बदलाव किया जा रहा है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में आम नागरिकों की भागीदारी प्रभावित हो सकती है। छात्रों का कहना है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और इसे लेकर वे लगातार चिंतित हैं। इसी चिंता और विरोध को सड़कों पर लाने के लिए छात्र संगठन दिशा ने शनिवार को इस प्रदर्शन का आयोजन किया।
भिखना पहाड़ी मोड़ पर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में छात्रों ने सिर्फ SIR को ही निशाने पर नहीं लिया, बल्कि उनके निशाने पर देश का सर्वोच्च चुनावी निकाय यानी भारत निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार भी रही। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। छात्रों का तर्क था कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है और यदि इसमें किसी तरह की अनियमितता या त्रुटि हो रही है, तो इसके लिए आयोग को जवाबदेह होना चाहिए। इसके साथ ही छात्रों ने केंद्र सरकार के खिलाफ भी नारे लगाए और उस पर जनविरोधी नीतियों का आरोप लगाया। छात्रों ने कहा कि लोकतंत्र में मतदाता का अधिकार सबसे महत्वपूर्ण है और इसे किसी भी हालत में कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।
छात्र संगठन दिशा के नेताओं और प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने मीडिया और मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि उनका यह आंदोलन आज के प्रदर्शन तक सीमित नहीं है और न ही यह थमने वाला है। छात्रों ने चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक उनकी मांगों को नहीं माना जाता और SIR की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं लाई जाती, तब तक वे सड़कों पर उतरते रहेंगे। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और भी तेज किया जाएगा। छात्रों का यह रुख साफ करता है कि संगठन अपने इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और पीछे हटने के मूड में नहीं है।
पटना के भिखना पहाड़ी इलाके में अक्सर इस तरह के राजनीतिक और सामाजिक प्रदर्शन होते रहते हैं। यह स्थान शहर के केंद्रीय हिस्सों में से एक है, इसलिए यहां कोई भी विरोध प्रदर्शन तुरंत प्रशासन और आम जनता का ध्यान खींच लेता है। शनिवार को हुए इस प्रदर्शन के दौरान भी वहां से गुजरने वाले राहगीरों और स्थानीय लोगों ने छात्रों की मांगों में रुचि दिखाई। हालांकि, प्रदर्शन को लेकर पुलिस और प्रशासन की तरफ से क्या कदम उठाए गए या सुरक्षा के क्या इंतजाम थे, इस बारे में अभी तक विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
बिहार में मतदाता सूची के पुनरीक्षण का मुद्दा हमेशा से संवेदनशील रहा है। हर बार जब चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) किया जाता है, तो विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की तरफ से नाम छूटने या गलत तरीके से नाम काटे जाने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। इस बार छात्र संगठन दिशा ने इस मुद्दे को मुखरता से उठाया है और इसे एक बड़े आंदोलन का रूप देने की तैयारी कर रहा है। छात्रों का मानना है कि युवा वर्ग को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की शुद्धता और पारदर्शिता के लिए आगे आना चाहिए।
कुल मिलाकर, शनिवार को पटना के भिखना पहाड़ी मोड़ पर छात्र संगठन दिशा द्वारा किया गया यह विरोध प्रदर्शन SIR, चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ छात्रों के बढ़ते असंतोष का प्रतीक है। हाथों में पोस्टर-बैनर और जुबान पर कड़े नारों के साथ सड़क पर उतरे इन छात्रों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। अब यह देखना होगा कि चुनाव आयोग और प्रशासन इस आंदोलन पर क्या रुख अपनाता है और छात्रों की मांगों को लेकर आगे क्या कार्रवाई होती है।

