Thu, 08 Oct 20265:45 PM
Thu, Oct 8, 2026Updated 5:45 PM IST
होम › बिहार

पटना सैटेलाइट सिटी भूमि अधिग्रहण विवाद: राकेश टिकैत ने कहा- 2013 का सर्किल रेट अमान्य, किसानों को मिले उचित मुआवजा

WhatsAppFacebookX

पटना। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता और वरिष्ठ किसान नेता राकेश टिकैत ने बुधवार को पटना में बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी सैटेलाइट सिटी परियोजना को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि इस परियोजना के तहत किसानों से अधिग्रहित की जा रही भूमि के मुआवजे के निर्धारण में 2013 के पुराने सर्किल रेट को आधार बनाना पूरी तरह से अनुचित और अस्वीकार्य है। टिकैत ने मांग की है कि सरकार वर्तमान बाजार मूल्य और न्यायोचित मानकों के अनुसार किसानों को उनकी जमीन का उचित मुआवजा प्रदान करे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब राजधानी पटना के विस्तार और नए शहरी केंद्र के विकास को लेकर राज्य सरकार की योजनाएं चर्चा में हैं, लेकिन स्थानीय किसानों में भूमि अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर असंतोष व्याप्त है।

बुधवार को पटना पहुंचने पर राकेश टिकैत ने सांसद सुधाकर सिंह के आवास पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने सैटेलाइट सिटी निर्माण से जुड़े भूमि अधिग्रहण मामले पर अपनी चिंताएं विस्तार से रखीं। टिकैत ने कहा कि पिछले एक दशक में भूमि की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है, ऐसे में दस साल से अधिक पुराने सर्किल रेट के आधार पर आज के किसानों को मुआवजा देना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने तर्क दिया कि 2013 का सर्किल रेट अब वर्तमान आर्थिक स्थितियों और भूमि के वास्तविक बाजार मूल्य को प्रतिबिंबित नहीं करता है। यदि सरकार इसी पुराने दर पर मुआवजा देने पर अड़ी रहती है, तो इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होगा और वे अपनी जीविका तथा पुनर्वास के लिए पर्याप्त संसाधन जुटाने में असमर्थ हो जाएंगे।

किसान नेता ने इस बात पर विशेष बल दिया कि भूमि अधिग्रहण संबंधी सभी कार्रवाइयां पारदर्शी और न्यायसंगत होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सैटेलाइट सिटी जैसे बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट निश्चित रूप से क्षेत्र के विकास के लिए आवश्यक हैं, लेकिन इस विकास की कीमत किसानों के शोषण या उनके अधिकारों की अनदेखी करके नहीं चुकाई जानी चाहिए। टिकैत ने सरकार से अपील की कि वह किसानों की मांगों को गंभीरता से ले और मुआवजे की राशि का पुनर्मूल्यांकन करे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों की वैध मांगों को नहीं सुना गया, तो भारतीय किसान यूनियन इस मुद्दे पर आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगी। उनका कहना था कि किसान अपनी जमीन देने को तैयार हैं, लेकिन इसके बदले उन्हें ऐसा मुआवजा मिलना चाहिए जो उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने और वैकल्पिक व्यवस्था करने में सक्षम बनाए।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सांसद सुधाकर सिंह भी मौजूद रहे, जिनके आवास पर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इससे संकेत मिलता है कि सैटेलाइट सिटी का भूमि अधिग्रहण विवाद अब केवल प्रशासनिक स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का केंद्र बिंदु बन गया है। टिकैत के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि किसान संगठन इस मुद्दे पर सरकार के साथ संवाद और दबाव दोनों की रणनीति अपना रहे हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापना (भूमि अर्जन) अधिनियम, 2013 की भावना और प्रावधानों का पूर्णतः पालन किया जाना चाहिए, जिसमें सामाजिक प्रभाव आकलन और सहमति आधारित अधिग्रहण जैसे पहलुओं पर जोर दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि पटना सैटेलाइट सिटी परियोजना का उद्देश्य राजधानी के बढ़ते जनसंख्या दबाव को कम करना और आधुनिक शहरी सुविधाओं से लैस एक नया उपनगरीय केंद्र विकसित करना है। हालांकि, इस प्रकार की बड़ी परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण हमेशा से ही संवेदनशील मुद्दा रहा है। राकेश टिकैत का वर्तमान बयान इस संवेदनशीलता को फिर से उजागर करता है और सरकार के समक्ष यह चुनौती प्रस्तुत करता है कि वह विकास और न्याय के बीच संतुलन कैसे स्थापित करती है। किसान नेता ने अपने संबोधन में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता से बचते हुए सीधे तौर पर 2013 के सर्किल रेट को खारिज किया और उचित मुआवजे की मांग को दोहराया।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बिहार सरकार और संबंधित प्रशासनिक एजेंसियां राकेश टिकैत और किसानों की इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं। क्या सरकार मुआवजे की दरों में संशोधन करेगी या फिर मौजूदा नीति पर ही आगे बढ़ेगी, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल, टिकैत के बयान ने सैटेलाइट सिटी परियोजना से जुड़े भूमि विवाद को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है और किसानों के अधिकारों के प्रति सार्वजनिक बहस को तेज किया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए बयानों से यह स्पष्ट है कि किसान संगठन इस मुद्दे पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और वे सरकार से ठोस एवं न्यायोचित समाधान की अपेक्षा कर रहे हैं।