Fri, 09 Oct 202611:43 AM
Fri, Oct 9, 2026Updated 11:43 AM IST
होम › बिहार

पटना उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला: सिनेपोलिस और कोका-कोला पर लगा 85 हजार रुपये का जुर्माना, बाहर से पानी की बोतल ले जाने से रोकना पड़ा भारी

WhatsAppFacebookX

पटना। बिहार की राजधानी पटना में उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और चर्चित फैसला सामने आया है। पटना उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने सिनेमा हॉल में बाहर से पानी की बोतल ले जाने पर रोक लगाने और दर्शकों को अंदर अत्यधिक महंगे दामों पर पानी खरीदने के लिए मजबूर करने के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए एक बड़ा निर्णय दिया है। आयोग ने इस मामले में सुनवाई करते हुए सिनेपोलिस सिनेमा हॉल और कोका-कोला कंपनी पर कुल 85 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह फैसला उन सभी उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है जो अक्सर सिनेमा हॉलों और अन्य मनोरंजन स्थलों पर जबरन महंगी चीजें खरीदने को मजबूर होने की शिकायत करते रहे हैं।

वन्दे भारत न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरा मामला पटना के सिनेपोलिस सिनेमा हॉल से जुड़ा हुआ है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि जब वे फिल्म देखने के लिए सिनेमा हॉल गए, तो वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों और प्रबंधन ने उन्हें अपने साथ लाई गई बाहर की पानी की बोतल को अंदर ले जाने से स्पष्ट रूप से रोक दिया। इसके बाद उन्हें हॉल के अंदर ही पानी खरीदने के लिए कहा गया, जहां पानी की बोतल की कीमत बाजार में मिलने वाले सामान्य मूल्य से कई गुना अधिक रखी गई थी। शिकायतकर्ता का कहना था कि इस तरह की नीति अपनाकर उपभोक्ताओं को उनकी इच्छा के विरुद्ध महंगे दामों पर पेय पदार्थ खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर उपभोक्ता संरक्षण कानून के प्रावधानों का उल्लंघन है और इसे अनुचित व्यापारिक व्यवहार की श्रेणी में रखा जाना चाहिए।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पटना उपभोक्ता आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुना। आयोग ने अपनी सुनवाई के दौरान इस बात पर विशेष ध्यान दिया कि क्या कोई भी निजी कंपनी या सिनेमा हॉल प्रबंधन किसी उपभोक्ता को उसके साथ लाए गए पीने के पानी की बोतल को अंदर ले जाने से रोक सकता है। आयोग ने इस बात पर गहरी आपत्ति जताई कि पानी जैसे बुनियादी और आवश्यक पेय पदार्थ को सिनेमा हॉल के अंदर अत्यधिक ऊंची दरों पर बेचा जा रहा है, जिससे आम जनता को आर्थिक रूप से नुकसान उठाना पड़ता है। आयोग ने इसे उपभोक्ताओं के अधिकारों का हनन और सेवा में स्पष्ट कमी माना।

आयोग ने अपने फैसले में यह स्पष्ट किया कि सिनेमा हॉल प्रबंधन द्वारा बाहर से पानी लाने पर प्रतिबंध लगाना और फिर अंदर महंगे दाम पर पानी बेचना अनुचित व्यापारिक प्रथा (अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस) के दायरे में आता है। इसी आधार पर आयोग ने सिनेपोलिस सिनेमा और कोका-कोला कंपनी को दोषी ठहराते हुए उन पर कुल 85 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश पारित किया है। हालांकि, इस जुर्माने की राशि का दोनों कंपनियों के बीच किस अनुपात में विभाजन किया गया है, इसकी विस्तृत जानकारी स्रोत में उपलब्ध नहीं है, लेकिन कुल जुर्माने की राशि 85 हजार रुपये निर्धारित की गई है।

यह फैसला इसलिए भी बहुत अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि देश भर में सिनेमा हॉलों के अंदर खाने-पीने की वस्तुओं की अत्यधिक ऊंची कीमतों को लेकर लंबे समय से उपभोक्ता संगठनों और आम लोगों द्वारा असंतोष व्यक्त किया जाता रहा है। कई बार देखा गया है कि लोग अपनी सुविधा के अनुसार बाहर से पानी या अन्य खाद्य पदार्थ लेकर जाते हैं, लेकिन सिनेमा हॉलों की सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर उन्हें ऐसा करने से रोक दिया जाता है। इसके पीछे हॉल के अंदर मौजूद फूड कोर्ट या विशेष काउंटरों से बिक्री बढ़ाने का उद्देश्य होता है, जिसमें कोका-कोला जैसी बड़ी पेय पदार्थ कंपनियों के उत्पाद शामिल होते हैं। पटना उपभोक्ता आयोग के इस ताजा फैसले ने इस पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं और स्पष्ट संकेत दिए हैं कि उपभोक्ताओं के साथ किसी भी प्रकार की मनमानी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत हर नागरिक को उचित मूल्य पर वस्तुएं और सेवाएं प्राप्त करने का पूर्ण अधिकार है। यदि कोई कंपनी या संस्था इस अधिकार का हनन करती है, तो उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया जा सकता है। पटना के इस मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यदि उपभोक्ता अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें और न्याय के लिए उचित मंच पर अपनी आवाज उठाएं, तो बड़ी से बड़ी कंपनियों को भी नियमों का पालन करना पड़ता है।

वन्दे भारत न्यूज़ के संज्ञान में आया है कि इस फैसले के बाद सिनेपोलिस सिनेमा और कोका-कोला कंपनी की ओर से इस आदेश के खिलाफ किसी उच्च न्यायालय या राज्य आयोग में अपील की जाएगी या नहीं, इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी या बयान सामने नहीं आया है। दोनों कंपनियों की तरफ से इस मामले में क्या प्रतिक्रिया दी जाती है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल, पटना उपभोक्ता आयोग का यह फैसला अन्य सिनेमा हॉलों और मल्टीप्लेक्स चेन के लिए एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इस फैसले के बाद अन्य सिनेमा हॉल प्रबंधन भी अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर हो सकते हैं, ताकि भविष्य में उन्हें ऐसे कानूनी पचड़ों और आर्थिक जुर्माने से बचा जा सके। उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं ने भी आयोग के इस कदम का स्वागत किया है।