Thu, 08 Oct 202612:57 PM
Thu, Oct 8, 2026Updated 12:57 PM IST
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रायगढ़: बाकारुमा-लैलूंगा मार्ग पर वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, खैर की लकड़ी से भरा 14 चक्का ट्रक जब्त; तस्कर अंधेरे का फायदा उठाकर फरार

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रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में वन विभाग ने अवैध लकड़ी परिवहन और तस्करी के खिलाफ अपनी मुहिम को तेज करते हुए एक महत्वपूर्ण कार्रवाई को अंजाम दिया है। विभाग की टीम ने बाकारुमा रेंज के अंतर्गत आने वाले बाकारुमा-लैलूंगा मार्ग पर दबिश देकर खैर की लकड़ियों से भरे एक भारी-भरकम 14 चक्का ट्रक को जब्त किया है। यह कार्रवाई धातुनपारा क्षेत्र के समीप की गई, जहां वन कर्मियों ने मुखबिर की सूचना या गश्त के दौरान संदिग्ध वाहन को रोका था। हालांकि, वन विभाग की टीम द्वारा ट्रक को जब्त करने से पूर्व ही उसमें सवार तस्कर अंधेरे और भौगोलिक परिस्थितियों का लाभ उठाते हुए मौके से फरार होने में कामयाब रहे। विभाग ने वाहन और लकड़ी को अपने कब्जे में लेकर आगे की वैधानिक कार्रवाई प्रारंभ कर दी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना बाकारुमा रेंज के अधिकार क्षेत्र में घटित हुई है। वन विभाग की टीम लगातार इस क्षेत्र में अवैध कटाई और परिवहन पर अंकुश लगाने के लिए सक्रिय है। बाकारुमा-लैलूंगा मार्ग वन्य संपदा की तस्करी के लिहाज से एक संवेदनशील मार्ग माना जाता है, क्योंकि यह घने वनों से होकर गुजरता है और यहां निगरानी बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है। धातुनपारा के पास जब वन कर्मियों ने संदिग्ध ट्रक को रोकने का प्रयास किया, तो तस्करों ने भागने में ही अपनी भलाई समझी। रात्रि या कम रोशनी वाली स्थिति का फायदा उठाकर वे जंगल की ओर या अन्य दिशाओं में फरार हो गए, जिससे उनकी तत्काल गिरफ्तारी संभव नहीं हो सकी। इसके बावजूद, विभाग ने लाखों रुपये मूल्य की सरकारी संपत्ति (खैर की लकड़ी) और परिवहन में प्रयुक्त वाहन को जब्त कर तस्करों को आर्थिक रूप से बड़ा नुकसान पहुंचाया है।

जब्त किए गए ट्रक में खैर की लकड़ी का भंडा पाया गया है। खैर की लकड़ी वन्य जीव अधिनियम और भारतीय वन अधिनियम के तहत अत्यधिक सुरक्षित और मूल्यवान श्रेणी में आती है। इसका उपयोग मुख्य रूप से कथा उत्पादन, औषधीय उद्देश्यों और उच्च गुणवत्ता वाले फर्नीचर निर्माण में किया जाता है। बाजार में खैर की लकड़ी की ऊंची कीमत और मांग के कारण तस्कर इसे अवैध रूप से कटान करके अन्य राज्यों या प्रसंस्करण इकाइयों तक पहुंचाने का प्रयास करते रहते हैं। 14 चक्का ट्रक का उपयोग यह दर्शाता है कि तस्करी का यह नेटवर्क सुनियोजित और बड़े पैमाने पर था। छोटे वाहनों के विपरीत, इतने बड़े ट्रक में लकड़ी भरना यह साबित करता है कि तस्करों को वन विभाग की गश्त और चेकपोस्टों की जानकारी थी और उन्होंने सुरक्षा घेरे को भेदने के लिए विशेष समय और मार्ग का चयन किया होगा।

वन विभाग ने जब्त ट्रक और लकड़ी को बाकारुमा रेंज कार्यालय या संबंधित डिपो में सुरक्षित रखवाया है। अब विभाग की प्राथमिकता फरार आरोपियों की पहचान करना और उन्हें गिरफ्तार करना है। ट्रक के पंजीयन क्रमांक, इंजन नंबर और चेसिस नंबर के आधार पर परिवहन विभाग और पुलिस से समन्वय कर वाहन मालिक और ड्राइवर का पता लगाया जाएगा। साथ ही, लकड़ी की मात्रा, आयतन और अनुमानित मूल्य का आकलन करने के लिए मापन कार्य किया जा रहा है। भारतीय वन अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया जाएगा और न्यायालय में पेश किया जाएगा। यदि वाहन अवैध परिवहन में दोषी पाया जाता है, तो उसे स्थायी रूप से जब्त करने और नीलाम करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

रायगढ़ जिला प्रशासन और वन विभाग ने हाल के वर्षों में अवैध लकड़ी तस्करी पर रोक लगाने के लिए कई कड़े कदम उठाए हैं। बाकारुमा, लैलूंगा, धरमजयगढ़ और अन्य वन ब्लॉकों में नियमित गश्त, चेकपोस्टों पर सघन जांच और खुफिया तंत्र को मजबूत करने जैसे उपाय किए जा रहे हैं। इसके अलावा, वन सुरक्षा समितियों और ग्रामीणों को भी इस मुहिम में शामिल किया जा रहा है ताकि तस्करी की सूचनाएं समय पर मिल सकें। धातुनपारा में हुई यह कार्रवाई इसी सतत प्रयास का हिस्सा है। विभाग का मानना है कि केवल लकड़ी जब्त करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि तस्करी की चेन को तोड़ने के लिए सरगनाओं और आपूर्तिकर्ताओं तक पहुंचना आवश्यक है।

उल्लेखनीय है कि खैर की लकड़ी की तस्करी न केवल वन संपदा को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता के लिए भी खतरा है। अनियंत्रित कटाई से मिट्टी का कटाव, जल स्रोतों का क्षरण और वन्यजीवों के आवास का विनाश होता है। इसलिए, वन विभाग ऐसे मामलों में शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाता है। बाकारुमा रेंज अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अंधेरे का फायदा उठाकर भागे तस्करों की धरपकड़ के लिए सर्च ऑपरेशन जारी है और क्षेत्र में गश्त को और अधिक सघन किया गया है। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए तकनीकी निगरानी और मानव संसाधन की तैनाती बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है। यह कार्रवाई अन्य संभावित तस्करों के लिए एक कड़ा संदेश है कि वन अपराधों के प्रति प्रशासन पूरी तरह सतर्क और सक्रिय है।