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Fri, Oct 9, 2026Updated 9:23 AM IST
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रायगढ़: बाकारुमा-लैलूंगा मार्ग पर वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, खैर की लकड़ियों से भरा 14 चक्का ट्रक जब्त, तस्कर अंधेरे का फायदा उठाकर भागे

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रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में वन विभाग ने अवैध लकड़ी परिवहन और तस्करी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम ने बाकारुमा रेंज के अंतर्गत आने वाले बाकारुमा-लैलूंगा मार्ग पर धातुनपारा के समीप छापेमारी करते हुए खैर की लकड़ियों से भरा एक भारी भरकम 14 चक्का ट्रक जब्त किया है। हालांकि, वन विभाग की टीम को अपनी ओर आता देख तस्करों ने रात के अंधेरे का फायदा उठाते हुए मौके से फरार होने में कामयाबी हासिल कर ली। इस घटना ने एक बार फिर जिले में वन संपदा की हो रही अवैध कटाई और तस्करी के बड़े नेटवर्क पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, रायगढ़ जिले के बाकारुमा रेंज में वन विभाग की टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि बाकारुमा-लैलूंगा मार्ग पर अवैध रूप से लकड़ियों का बड़ा खेप ले जाया जा रहा है। इस सूचना के आधार पर वन विभाग के अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए एक विशेष टीम का गठन किया और धातुनपारा के पास नाकाबंदी कर दी। जैसे ही संदिग्ध 14 चक्का ट्रक वहां पहुंचा, विभागीय अमले ने उसे घेर लिया और रोकने का प्रयास किया। लेकिन ट्रक में सवार तस्करों ने वन कर्मियों को देखते ही वाहन को वहीं छोड़ दिया और आसपास के जंगली तथा अंधेरे इलाके का लाभ उठाते हुए तेजी से भाग निकले। अंधेरा होने और रास्ता पगडंडियों वाला होने के कारण वन विभाग की टीम तस्करों को पकड़ने में असमर्थ रही।

इसके बाद वन विभाग की टीम ने ट्रक की तलाशी ली। जांच में पाया गया कि ट्रक में बड़ी मात्रा में खैर की लकड़ियां भरी हुई थीं। इन लकड़ियों के परिवहन के लिए किसी भी प्रकार का वैध परमिट या दस्तावेज वाहन में मौजूद नहीं था। खैर की लकड़ी की बाजार में काफी मांग रहती है और यह कीमती मानी जाती है, जिसके चलते तस्कर अक्सर इसे निशाना बनाते हैं। विभाग ने पूरे ट्रक और उसमें लदी खैर की लकड़ियों को विधिवत जब्त कर लिया है। जब्त किए गए 14 चक्का ट्रक और लकड़ियों की अनुमानित कीमत काफी अधिक बताई जा रही है, हालांकि अभी तक विभाग की ओर से जब्ती की गई लकड़ियों की सटीक मात्रा या उनकी कुल बाजार कीमत का आधिकारिक ब्योरा जारी नहीं किया गया है।

वन विभाग के अधिकारियों ने जब्त ट्रक और लकड़ियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया है। अब विभाग की प्राथमिकता उन तस्करों की पहचान करना है जो अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे। इसके लिए ट्रक के पंजीकरण नंबर, उसके मालिकाना हक और हाल के दिनों में इस मार्ग पर हुई गतिविधियों की जांच की जा रही है। माना जा रहा है कि ट्रक के नंबर और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर तस्करों तक पहुंचना विभाग के लिए संभव होगा। वन विभाग की टीम इस मामले में भारतीय वन अधिनियम और अन्य सुसंगत धाराओं के तहत अज्ञात आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई शुरू करेगी।

रायगढ़ जिला अपने घने जंगलों और बहुमूल्य वन संपदा के लिए जाना जाता है। यहां साल, सागौन, शीशम और खैर सहित कई कीमती प्रजातियों की लकड़ियां पाई जाती हैं। खैर की लकड़ी विशेष रूप से कत्था बनाने, फर्नीचर निर्माण और अन्य औद्योगिक कार्यों में उपयोग की जाती है, जिसके कारण इसकी अवैध कटाई और तस्करी का कारोबार हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है। तस्कर अक्सर रात के समय या ऐसे सुनसान मार्गों का चुनाव करते हैं जहां विभागीय गश्त कम होती है। बाकारुमा-लैलूंगा मार्ग भी ऐसा ही एक संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है, जहां से होकर अवैध लकड़ियों की ढुलाई की खबरें पूर्व में भी सामने आती रही हैं।

इस कार्रवाई को वन विभाग द्वारा अवैध लकड़ी तस्करी पर लगाम लगाने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में वन संपदा की सुरक्षा के प्रति वे पूरी तरह सतर्क हैं और तस्करों के खिलाफ ऐसी कार्रवाइयां लगातार जारी रहेंगी। जो भी व्यक्ति वन अपराध में लिप्त पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कानून के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, इस घटनाक्रम ने स्थानीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में वन संपदा की रक्षा को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया जा रहा है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि आम जनता या स्थानीय ग्रामीणों को किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि, संदिग्ध वाहनों या लकड़ियों की तस्करी की जानकारी मिलती है, तो वे तुरंत इसकी सूचना नजदीकी वन परिक्षेत्र कार्यालय या संबंधित अधिकारियों को दें। जनता के सहयोग के बिना इतने बड़े और सुदूर जंगली इलाकों में तस्करी को पूरी तरह रोकना विभाग के लिए अत्यंत कठिन है।

फिलहाल, वन विभाग की टीम जब्त किए गए ट्रक और खैर की लकड़ियों के संबंध में विस्तृत जांच पड़ताल में जुटी हुई है। तस्करों की पहचान और उनकी गिरफ्तारी के लिए विभिन्न बिंदुओं पर काम किया जा रहा है। यह देखा जाना बाकी है कि क्या विभाग भाग निकले तस्करों को जल्द गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त कर पाता है या नहीं। वन विभाग की इस ताजा कार्रवाई से लकड़ी तस्करों में हड़कंप मना हुआ है और उम्मीद जताई जा रही है कि इससे अवैध कारोबारियों पर एक मजबूत दबाव बनेगा।