रायपुर: डिप्टी कलेक्टर मनोज बंजारे पर पत्नी ने लगाए गंभीर आरोप, 3 करोड़ रुपये और लग्जरी कार की दहेज मांग का मामला दर्ज

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक बेहद संवेदनशील और चर्चित मामला सामने आया है। रायपुर में तैनात डिप्टी कलेक्टर मनोज बंजारे के खिलाफ उनकी पत्नी पूजा बंजारे ने दहेज प्रताड़ना, मारपीट और मानसिक उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई है। इस मामले में पुलिस ने प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। FIR के अनुसार, पति मनोज बंजारे और ससुराल पक्ष के अन्य सदस्यों पर दो से तीन करोड़ रुपये नकद और एक लग्जरी कार दहेज के रूप में मांगने का गंभीर आरोप लगाया गया है। पीड़ित पत्नी ने यह भी आरोप लगाया है कि गर्भावस्था के दौरान उनके साथ मारपीट की गई, जिससे उनका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हुआ।
वंदे भारत न्यूज़ को प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले का है। पीड़िता पूजा बंजारे ने अपने पति और ससुराल वालों के खिलाफ स्थानीय थाने में पहुंचकर लिखित शिकायत दी। शिकायत में पूजा ने विस्तार से बताया कि शादी के बाद से ही उन्हें दहेज के लिए लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। FIR में दर्ज किए गए तथ्यों के मुताबिक, पति मनोज बंजारे और ससुराल पक्ष के लोगों ने उनसे दो से तीन करोड़ रुपये की भारी रकम और एक लग्जरी कार की मांग रखी थी। जब इन मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो पूजा के साथ घर में दुर्व्यवहार शुरू हो गया।
पीड़िता ने अपनी शिकायत में एक और बेहद गंभीर बात का जिक्र किया है। पूजा बंजारे का आरोप है कि जब वह गर्भवती थीं, उस दौरान भी उनके साथ मारपीट की गई। गर्भावस्था एक ऐसा समय होता है जब महिला को सबसे अधिक देखभाल और सुरक्षा की आवश्यकता होती है, लेकिन आरोपों के अनुसार, इस नाजुक दौर में भी उन्हें शारीरिक और मानसिक यातनाएं दी गईं। इस मारपीट और उत्पीड़न के कारण पीड़िता को काफी तकलीफ उठानी पड़ी।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्राथमिकी दर्ज कर ली है। FIR में दहेज प्रताड़ना, मारपीट और मानसिक उत्पीड़न से संबंधित धाराओं के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया है। चूंकि आरोपी मनोज बंजारे एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी हैं और वर्तमान में रायपुर में डिप्टी कलेक्टर के पद पर कार्यरत हैं, इसलिए यह मामला प्रशासनिक और सरकारी हल्कों में भी सुर्खियों में आ गया है। किसी आईएएस या राज्य सिविल सेवा के अधिकारी पर इस तरह के गंभीर घरेलू और आपराधिक आरोप लगना छत्तीसगढ़ प्रशासन के लिए एक चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा करता है।
उल्लेखनीय है कि भारतीय दंड संहिता और अब लागू नए कानूनों के तहत दहेज मांगना और उसके लिए प्रताड़ित करना एक गैर-जमानती अपराध है। दहेज निषेध अधिनियम के तहत भी ऐसे मामलों में सख्त सजा का प्रावधान है। पुलिस द्वारा दर्ज की गई इस FIR के आधार पर अब ससुराल पक्ष के खिलाफ विस्तृत जांच की जाएगी। पुलिस के सामने अब यह जिम्मेदारी है कि वह सभी साक्ष्यों को जुटाए और आरोपों की सत्यता की पुष्टि करे।
हालांकि, अभी तक आरोपी डिप्टी कलेक्टर मनोज बंजारे या उनके परिवार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि क्या इस मामले के संज्ञान में आने के बाद राज्य सरकार या राजस्व विभाग द्वारा मनोज बंजारे के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई की जाएगी या नहीं। अक्सर देखा गया है कि जब किसी सरकारी अधिकारी पर आपराधिक मामले दर्ज होते हैं, तो विभाग स्तर पर भी जांच बैठाई जाती है या अधिकारी को निलंबित किया जाता है, लेकिन इस मामले में अभी तक ऐसी किसी कार्रवाई की सूचना नहीं है।
पीड़िता पूजा बंजारे ने पुलिस से न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने अपनी शिकायत में यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि उन्हें और उनके परिवार को किसी भी प्रकार की धमकी न दी जाए। दहेज प्रताड़ना के मामले देश भर में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में एक बड़ा हिस्सा रखते हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े भी यह दर्शाते हैं कि दहेज से जुड़े मामलों में हर साल हजारों FIR दर्ज होती हैं, लेकिन जब आरोपी कोई प्रशासनिक अधिकारी हो, तो पीड़िता के लिए न्याय की राह और भी कठिन हो जाती है।
रायपुर पुलिस अब इस मामले की जांच आगे बढ़ा रही है। जांच अधिकारियों को पीड़िता के बयान, मेडिकल रिपोर्ट्स और अन्य गवाहों के बयान दर्ज करने होंगे। गर्भावस्था के दौरान हुई कथित मारपीट को लेकर मेडिकल साक्ष्य इस मामले में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। वंदे भारत न्यूज़ इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और जैसे-जैसे इस जांच में नए तथ्य सामने आएंगे या पुलिस कोई ठोस कार्रवाई करेगी, उसे विस्तार से प्रकाशित किया जाएगा। फिलहाल, यह मामला रायपुर में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग एक जिम्मेदार प्रशासनिक पद पर बैठे व्यक्ति पर लगे इन आरोपों को लेकर हैरान हैं।

