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Fri, Oct 9, 2026Updated 1:36 PM IST
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रतलाम में 53 पटवारियों को अंतिम चेतावनी पत्र: अब तक 5 हो चुके हैं बर्खास्त; कलेक्टर बोले- दायित्वों की अनदेखी स्वीकार्य नहीं

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रतलाम। मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। शासकीय कार्यों में लगातार सामने आ रही लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए जिला कलेक्टर अजय कटेसरिया ने एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। कलेक्टर ने तहसील पिपलोदा में पदस्थ एक परिवीक्षाधीन पटवारी को उसके दायित्वों की अनदेखी करने के आरोप में सीधे पद से पृथक कर दिया है। इसके साथ ही जिले भर के 53 अन्य पटवारियों को अंतिम चेतावनी पत्र जारी किए गए हैं, जिसमें स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि यदि उनके कार्य में सुधार नहीं हुआ तो उनके खिलाफ भी कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की इस सख्ती के बाद राजस्व अमले में हड़कंप मच गया है।

जानकारी के अनुसार, कलेक्टर अजय कटेसरिया ने तहसील पिपलोदा में पदस्थ परिवीक्षाधीन पटवारी रजनीश राज रैगा की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। रैगा पर आरोप था कि वह अपने शासकीय दायित्वों का निर्वहन ठीक से नहीं कर रहे थे और उनके कामकाज में गंभीर लापरवाही पाई गई। विशेष बात यह है कि रजनीश राज रैगा की नियुक्ति अनुकंपा के आधार पर हुई थी। अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य किसी सरकारी कर्मचारी की सेवाकाल के दौरान मृत्यु होने पर उसके आश्रित परिवार को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना होता है, लेकिन प्रशासन ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि अनुकंपा के आधार पर मिली नौकरी का अर्थ यह कतई नहीं है कि कर्मचारी अपने दायित्वों के प्रति लापरवाह रहे। नियमों की अनदेखी करने पर अनुकंपा नियुक्ति भी कर्मचारी को बर्खास्तगी से नहीं बचा सकती।

कलेक्टर अजय कटेसरिया ने इस कार्रवाई के पीछे का कारण बताते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि शासकीय दायित्वों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि पटवारी राजस्व प्रशासन की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है और आम जनता का सीधा संपर्क पटवारी से ही होता है। यदि पटवारी स्तर पर ही लापरवाही बरती जाएगी, तो आम नागरिकों को भू-अभिलेख, खसरा-खतौनी, सीमांकन और अन्य राजस्व संबंधी कार्यों में भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। कलेक्टर ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने आवंटित कार्यों को पूर्ण निष्ठा, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ पूरा करें। जो भी कर्मचारी या अधिकारी इस दिशा में कोताही बरतेगा, उसके खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, रतलाम जिले में अब तक ऐसे कुल 5 पटवारी बर्खास्त किए जा चुके हैं, जिन्होंने अपने पदीय कर्तव्यों के निर्वहन में घोर लापरवाही बरती। इन बर्खास्तगियों का सिलसिला हाल के दिनों में तेज हुआ है, क्योंकि जिले में राजस्व मामलों के लंबित रहने और किसानों व आम लोगों की शिकायतें बढ़ने के बाद प्रशासन ने इस मामले की गहन समीक्षा की थी। समीक्षा के दौरान कई पटवारियों का कामकाज संतोषजनक नहीं पाया गया, जिसके बाद यह कठोर कदम उठाए गए।

इसी कड़ी में जिन 53 पटवारियों को अंतिम चेतावनी पत्र जारी किए गए हैं, उन्हें स्पष्ट रूप से अवगत करा दिया गया है कि यह उनके लिए सुधार का अंतिम अवसर है। इन पटवारियों के कार्यक्षेत्रों और उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों की निरंतर निगरानी की जा रही है। यदि भविष्य में इन 53 पटवारियों के कामकाज में वांछित सुधार नहीं देखा गया या पुनः किसी प्रकार की लापरवाही सामने आई, तो इनकी सेवाएं भी समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। कलेक्टर ने यह भी निर्देश दिए हैं कि तहसीलदार और एसडीएम स्तर के अधिकारी अपने अधीनस्थ पटवारियों के कामकाज की नियमित समीक्षा करें और रिपोर्ट जिला मुख्यालय को उपलब्ध कराएं।

राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पटवारियों पर जमीन के रिकॉर्ड को अपडेट रखने, फसल सर्वेक्षण करने, प्राकृतिक आपदाओं के दौरान नुकसान का आकलन करने और सरकार की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की जिम्मेदारी होती है। जब इस स्तर पर लापरवाही होती है, तो पूरी राजस्व व्यवस्था प्रभावित होती है। रतलाम जिले में कलेक्टर अजय कटेसरिया द्वारा उठाया गया यह कदम न केवल जिले के राजस्व अमले में अनुशासन स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, बल्कि इससे अन्य जिलों के प्रशासन को भी यह संदेश गया है कि शासकीय कार्यों में लापरवाही को लेकर अब कोई रियायत नहीं बरती जाएगी।

गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा बार-बार यह निर्देश दिए जा रहे हैं कि आम जनता को राजस्व संबंधी कार्यों में किसी प्रकार की दिक्कत न हो और समय पर उनकी समस्याओं का निराकरण किया जाए। इसके बावजूद कुछ कर्मचारियों द्वारा लापरवाही बरती जा रही थी, जिस पर अब विराम लगाने के लिए प्रशासन ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। 53 पटवारियों को मिले अंतिम चेतावनी पत्र और एक पटवारी की सीधी बर्खास्तगी के बाद रतलाम जिले के समस्त तहसीलों और हल्कों में पटवारियों ने अपने कामकाज की गति बढ़ा दी है। प्रशासन की इस सख्ती से यह उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में जिले में राजस्व संबंधी लंबित प्रकरणों का तेजी से निपटारा होगा और आम नागरिकों को बेहतर और पारदर्शी सेवाएं मिल सकेंगी।