रतलाम: मोरवानी रेलवे स्टेशन पर सिग्नल मेमो को लेकर स्टेशन मास्टर और JE में विवाद, कॉलर पकड़ने का मामला सामने आया

वंदे भारत न्यूज़ डेस्क। मध्य प्रदेश के रतलाम रेल मंडल के अंतर्गत आने वाले मोरवानी रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार सुबह एक गंभीर अनुशासनात्मक घटना सामने आई है। रेलवे स्टेशन परिसर के भीतर ही स्टेशन मास्टर और एक जूनियर इंजीनियर (JE) के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। यह विवाद इतना अधिक बढ़ गया कि स्टेशन मास्टर ने जूनियर इंजीनियर की कॉलर पकड़ ली। इस पूरी घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसके बाद रेलवे महकमे में हड़कंप मच गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा विवाद सिग्नल फेलियर होने के मामले में मेमो देने की बात को लेकर शुरू हुआ था।
घटना की विस्तृत जानकारी देते हुए सूत्रों ने बताया कि मोरवानी रेलवे स्टेशन पर तैनात स्टेशन मास्टर सुभाष यादव और जूनियर इंजीनियर यश व्यास के बीच शुक्रवार की सुबह किसी बात को लेकर कहासुनी शुरू हुई। यह कहासुनी मुख्य रूप से सिग्नल फेलियर होने की घटना को लेकर जारी किए जाने वाले मेमो से संबंधित थी। रेलवे संचालन में सिग्नल प्रणाली का ठीक से काम करना बेहद जरूरी होता है और सिग्नल फेलियर होने की स्थिति में इसके लिए जिम्मेदार कर्मचारियों या अधिकारियों को मेमो जारी किया जाता है। इसी मेमो को लेकर दोनों अधिकारियों के बीच मतभेद पैदा हो गया। शुरुआती बहस धीरे-धीरे इतनी उग्र हो गई कि स्टेशन मास्टर सुभाष यादव ने आवेश में आकर जूनियर इंजीनियर यश व्यास की कॉलर पकड़ ली। कार्यस्थल पर दो जिम्मेदार अधिकारियों के बीच इस तरह की भौतिक झड़प रेलवे के नियमों और अनुशासन के खिलाफ मानी जाती है।
इस घटनाक्रम के दौरान स्टेशन परिसर में मौजूद अन्य कर्मचारियों और लोगों ने दोनों को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही थी। विवाद बढ़ता देख रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवानों को मौके पर बुलाया गया। RPF जवानों के पहुंचने के बाद किसी तरह दोनों अधिकारियों को अलग किया गया और स्थिति को शांत कराया जा सका। RPF की समय रहते की गई कार्रवाई से एक बड़ी अनहोनी या विवाद को और अधिक बढ़ने से रोका जा सका। हालांकि, इस घटना ने रेलवे स्टेशन पर काम करने वाले अन्य कर्मचारियों के बीच असहजता का माहौल पैदा कर दिया।
इस विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि स्टेशन मास्टर और जूनियर इंजीनियर के बीच हुई इस झड़प की पूरी घटना वहां लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई है। सीसीटीवी फुटेज में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि किस प्रकार दोनों के बीच बहस हुई और फिर स्टेशन मास्टर द्वारा जूनियर इंजीनियर की कॉलर पकड़ी गई। यह सीसीटीवी फुटेज अब इस मामले में सबसे अहम सबूत माना जा रहा है। फुटेज सामने आने के बाद यह घटना केवल स्टेशन तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसकी जानकारी रतलाम रेल मंडल के उच्च अधिकारियों तक भी पहुंच गई है।
रेलवे के जानकारों का कहना है कि सिग्नल फेलियर होना रेल परिचालन में एक गंभीर तकनीकी खामी मानी जाती है, क्योंकि इससे ट्रेनों की सुरक्षा और समयबद्धता दोनों प्रभावित होती हैं। ऐसे में जब कोई सिग्नल फेल होता है, तो उसकी जांच की जाती है और लापरवाही पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी या अधिकारी को मेमो जारी किया जाता है। मोरवानी स्टेशन पर भी संभवतः इसी प्रक्रिया के तहत मेमो जारी करने या न करने को लेकर दोनों अधिकारियों में मतभेद उत्पन्न हुआ। स्टेशन मास्टर का काम स्टेशन पर ट्रेनों के सुरक्षित परिचालन को सुनिश्चित करना होता है, जबकि जूनियर इंजीनियर तकनीकी रखरखाव और सिग्नल प्रणाली जैसे कार्यों से जुड़े होते हैं। दोनों विभागों के बीच समन्वय का अभाव कई बार इस तरह के विवादों का कारण बन जाता है।
इस पूरे मामले में अभी तक रतलाम रेल मंडल के उच्च अधिकारियों की ओर से कोई औपचारिक बयान या कार्रवाई की पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं की गई है। हालांकि, सीसीटीवी फुटेज के आधार पर यह माना जा रहा है कि रेलवे प्रशासन इस घटना का संज्ञान लेगा और दोनों अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। रेलवे में कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता या मारपीट को बेहद गंभीरता से लिया जाता है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
यह घटना रेलवे के कार्यस्थलों पर अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच तनाव प्रबंधन और आपसी समन्वय की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है। दबाव वाले माहौल में काम करते हुए यदि अधिकारी अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख पाते हैं, तो ऐसी घटनाएं न केवल उनकी व्यक्तिगत छवि को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि रेलवे जैसे महत्वपूर्ण विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करती हैं। मोरवानी रेलवे स्टेशन पर हुई इस घटना के बाद अब सभी की निगाहें रतलाम रेल मंडल के उच्च अधिकारियों के अगले कदम पर टिकी हुई हैं कि वे इस अनुशासनहीनता के मामले में क्या कार्रवाई करते हैं। फिलहाल, RPF की रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आंतरिक जांच आगे बढ़ने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

