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Tue, Oct 13, 2026Updated 9:37 AM IST
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सागर: लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत आवेदनों के निराकरण में लापरवाही पर नायब तहसीलदार सहित तीन सचिवों पर जुर्माना, कलेक्टर प्रतिभा पाल ने की सख्त कार्रवाई

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सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को सुचारू और पारदर्शी बनाए रखने तथा आम जनता को समय पर सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने एक बड़ी और सख्त कार्रवाई की है। सागर जिले की कलेक्टर प्रतिभा पाल ने लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदनों का निराकरण नहीं करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कदम उठाते हुए जुर्माना लगाने का आदेश जारी किया है। इस कार्रवाई के तहत जैसीनगर के नायब तहसीलदार समेत कुल तीन ग्राम पंचायत सचिवों पर वित्तीय दंड लगाया गया है। सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे तीन दिन की निर्धारित अवधि के भीतर जुर्माने की राशि जमा करें। यह कार्रवाई जिले के प्रशासनिक अमले में उन तमाम अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है जो जनता से जुड़े मामलों में ढिलाई या लापरवाही बरतते हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, लोक सेवा गारंटी अधिनियम के प्रावधानों के तहत विभिन्न विभागों में प्राप्त होने वाले आवेदन पत्रों का निराकरण एक निश्चित और पूर्व निर्धारित समय-सीमा के भीतर करना अनिवार्य होता है। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य ही यही है कि राज्य के नागरिकों को सरकारी सेवाओं के लिए अनावश्यक रूप से चक्कर न लगाने पड़ें और उन्हें तय समय में उनका हक मिल सके। हालांकि, जैसीनगर क्षेत्र में कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था। शिकायतों और समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि नायब तहसीलदार और कुछ सचिवों के पास लंबित आवेदनों का निराकरण समय-सीमा के भीतर नहीं हो पाया है। इसके पीछे अधिकारियों की ओर से बरती गई लापरवाही को मुख्य कारण माना गया है।

जिला प्रशासन की ओर से बताया गया है कि यह कार्रवाई अचानक या बिना किसी पूर्व चेतावनी के नहीं की गई है। कलेक्टर प्रतिभा पाल के स्तर से पूर्व में भी कार्यालयीन पत्रों के माध्यम से संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को कई बार निर्देश दिए जा चुके थे। इन पत्रों में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत प्राप्त आवेदनों का निराकरण हर हाल में निर्धारित समय-सीमा के भीतर सुनिश्चित किया जाए। इसके बावजूद, जब संबंधित अधिकारियों ने इन निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया और अपने कार्य में लगातार लापरवाही बरतते रहे, तो जिला प्रशासन को उनके खिलाफ सख्त कदम उठाने के लिए बाध्य होना पड़ा। पूर्व चेतावनियों को नजरअंदाज किए जाने के बाद ही कलेक्टर ने जुर्माना लगाने का निर्णय लिया है, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोहराई न जाए।

कलेक्टर प्रतिभा पाल द्वारा की गई इस कार्रवाई में जैसीनगर के नायब तहसीलदार के अलावा तीन सचिवों को भी शामिल किया गया है। इन सभी पर लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत जुर्माना लगाया गया है। आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों पर यह जुर्माना लगाया गया है, उन्हें तीन दिन के भीतर संबंधित राशि जमा करानी होगी। यदि निर्धारित समय के भीतर जुर्माने की राशि जमा नहीं की जाती है, तो उनके खिलाफ आगे और कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, यह जुर्माना सीधे तौर पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करता है और उनकी कार्यप्रणाली में सुधार लाने के लिए एक दबाव बनाने का काम करता है।

लोक सेवा गारंटी अधिनियम मध्य प्रदेश सरकार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानून है, जिसका उद्देश्य आम नागरिकों को समयबद्ध तरीके से सरकारी सेवाएं प्रदान करना है। इस अधिनियम के तहत राजस्व, पंचायत, नगरीय निकाय और अन्य विभागों से जुड़ी विभिन्न सेवाओं के लिए समय-सीमा निर्धारित की गई है। यदि कोई पदस्थ अधिकारी या कर्मचारी बिना किसी ठोस और मान्य कारण के इस समय-सीमा का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ जुर्माना लगाने का कानूनी प्रावधान है। सागर जिले में कलेक्टर प्रतिभा पाल द्वारा उठाया गया यह कदम इसी कानूनी प्रावधान के तहत किया गया है। प्रशासन का मानना है कि जब तक अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय नहीं की जाएगी, तब तक जनता को समय पर सेवाएं मिलने में दिक्कतें आती रहेंगी।

इस कार्रवाई से जिले के अन्य तहसीलों और पंचायतों में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों में भी हड़कंप की स्थिति देखी जा रही है। जैसीनगर में नायब तहसीलदार और सचिवों पर हुई इस कार्रवाई के बाद अन्य अधिकारियों ने भी अपने यहां लंबित आवेदनों की समीक्षा शुरू कर दी है, ताकि वे भी समय-सीमा के भीतर निराकरण सुनिश्चित कर सकें और किसी प्रकार की अनुशासनात्मक कार्रवाई से बच सकें। कलेक्टर प्रतिभा पाल ने इस मामले में स्पष्ट संकेत दिए हैं कि प्रशासन अब कार्य में किसी भी प्रकार की ढिलाई या लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगा। पूर्व में दिए गए निर्देशों का पालन न करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

सागर जिला प्रशासन का यह कदम सुशासन और पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। आम जनता को सरकारी दफ्तरों में होने वाली देरी से अक्सर भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत अधिकारियों पर जुर्माना लगाने की यह कार्रवाई जनता के लिए राहत की खबर है। प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी सेवाओं का वितरण एक जिम्मेदारी है और इसे निर्धारित समय पर पूरा करना हर अधिकारी और कर्मचारी का कर्तव्य है। कलेक्टर प्रतिभा पाल की इस पहल से जिले में प्रशासनिक कार्यप्रणाली में तेजी और सुधार आने की उम्मीद जताई जा रही है।