सांप के डसने के बाद परिजन रातभर करते रहे झाड़-फूंक, वनपाल ने समय पर अस्पताल पहुंचाकर बचाई जान

शाहनगर। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में शाहनगर थाना क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो ग्रामीण इलाकों में आज भी व्याप्त अंधविश्वास और झाड़-फूंक की खतरनाक प्रवृत्ति को उजागर करता है। यहां सांप के काटने (सर्पदंश) के बाद एक व्यक्ति के परिजनों ने उसे तुरंत अस्पताल ले जाने के बजाय रातभर झाड़-फूंक कराने में ही समय गंवा दिया। हालांकि, समय रहते वन विभाग के एक वनपाल की नजर इस घटना पर पड़ी और उन्होंने त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़ित व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसका उपचार कर उसकी जान बचा ली। यह पूरी घटना ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच और जागरूकता की कमी को लेकर कई सवाल खड़े करती है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शाहनगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक गांव में एक व्यक्ति को सांप ने डस लिया था। सर्पदंश की ऐसी स्थिति में चिकित्सा विज्ञान स्पष्ट रूप से निर्देश देता है कि मरीज को बिना किसी देरी के तुरंत नजदीकी अस्पताल या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाना चाहिए, ताकि एंटी स्नेक वेनम (ASV) यानी सांप के जहर का निवारक इंजेक्शन लगाया जा सके। लेकिन इस मामले में पीड़ित के परिजनों ने वैज्ञानिक उपचार का रास्ता चुनने के बजाय अंधविश्वास का सहारा लिया। सांप के काटने के बाद परिजन मरीज को अस्पताल ले जाने के लिए तैयार नहीं हुए और वे रातभर गांव में ही झाड़-फूंक करने वालों को बुलाकर उसका इलाज कराने में जुटे रहे।
परिजनों का मानना था कि झाड़-फूंक से सांप का जहर उतर जाएगा और मरीज ठीक हो जाएगा। इस चक्कर में रात का पूरा समय बीत गया और पीड़ित व्यक्ति की हालत लगातार बिगड़ती गई। सांप का जहर शरीर में तेजी से फैल रहा था, लेकिन परिवार के लोगों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। झाड़-फूंक करने वाले भी कोई असर नहीं दिखा पा रहे थे, जिससे मरीज की जान पर बन आई थी। यह स्थिति दर्शाती है कि कैसे अंधविश्वास के चलते लोग अपने ही परिजनों की जिंदगी को दांव पर लगा देते हैं और बहुमूल्य समय खो देते हैं, जो सर्पदंश जैसे मामलों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण होता है।
इसी बीच, वन विभाग में कार्यरत एक वनपाल को इस घटना की जानकारी मिली। सूत्रों के मुताबिक, जब वनपाल ने देखा कि पीड़ित व्यक्ति की स्थिति गंभीर है और परिजन उसे अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक में लगे हुए हैं, तो उन्होंने बिना समय गंवाए तुरंत हस्तक्षेप किया। वनपाल ने परिजनों को समझाया कि झाड़-फूंक से सांप का जहर नहीं उतरता है और अगर मरीज को तुरंत अस्पताल नहीं ले जाया गया तो उसकी मौत हो सकती है। वनपाल की सूझबूझ और तत्परता ने पीड़ित की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभाई। उन्होंने खुद पहल करते हुए पीड़ित व्यक्ति को वाहन से अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की और उसे सुरक्षित चिकित्सकीय देखरेख में पहुंचाया।
अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए तुरंत उपचार शुरू किया। चिकित्सकों ने आवश्यक दवाइयां दीं और एंटी स्नेक वेनम का उपयोग करके सांप के जहर के प्रभाव को कम किया। डॉक्टरों की टीम ने समय रहते किए गए सही उपचार से पीड़ित व्यक्ति की जान बचा ली। चिकित्सकों ने बताया कि अगर मरीज को अस्पताल लाने में और देरी होती, तो जहर पूरे शरीर में फैल सकता था और स्थिति जानलेवा हो सकती थी। वनपाल द्वारा समय पर अस्पताल पहुंचाए जाने के कारण ही डॉक्टरों को उपचार के लिए जरूरी समय मिल सका और मरीज की जान बच पाई।
यह घटना एक बार फिर इस बात की पुष्टि करती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश के मामलों में अंधविश्वास कितना भारी पड़ सकता है। भारत में हर साल हजारों लोग सांप के काटने से अपनी जान गंवाते हैं, और इनमें से एक बड़ा हिस्सा उन लोगों का होता है जिन्हें समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जाता। झाड़-फूंक और ओझाओं के चक्कर में पड़कर लोग ‘गोल्डन ऑवर’ यानी वह स्वर्णिम समय खो देते हैं, जिसमें सही इलाज मिलने पर मरीज की जान बचाई जा सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ और प्रशासन लगातार लोगों से अपील करते रहे हैं कि सांप के काटने पर किसी भी प्रकार के झाड़-फूंक या टोटकों पर विश्वास न करें और सीधे नजदीकी सरकारी या निजी अस्पताल जाएं।
वनपाल की इस सराहनीय पहल और समय सूझबूझ की हर तरफ प्रशंसा हो रही है। उन्होंने न केवल एक जिम्मेदार सरकारी कर्मचारी होने का फर्ज निभाया, बल्कि एक इंसान के नाते भी जीवन रक्षा का महत्वपूर्ण कार्य किया। वहीं, इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के सामने यह चुनौती भी रख दी है कि ग्रामीण इलाकों में सर्पदंश के दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं, इसको लेकर जागरूकता अभियानों को और अधिक तेज किया जाए। लोगों को यह समझाना बेहद जरूरी है कि झाड़-फूंक कोई इलाज नहीं है और केवल चिकित्सा विज्ञान ही ऐसी स्थिति में जान बचा सकता है। शाहनगर थाना क्षेत्र की यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी और वनपाल की तत्परता एक मिसाल के रूप में सामने आई है।

