Fri, 09 Oct 202611:43 AM
Fri, Oct 9, 2026Updated 11:43 AM IST
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शाजापुर: 9 महीने के मासूम के गले में फंसी काजल की प्लास्टिक डिब्बी, जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने लैरिंगोस्कोप से निकालकर बचाई जान

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शाजापुर। मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में एक बेहद संवेदनशील और गंभीर चिकित्सा घटना सामने आई है, जिसमें जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने अपनी तत्परता और तकनीकी कुशलता से नौ महीने के एक मासूम बच्चे की जान बचा ली। यह पूरा मामला शाजापुर जिले के लड़ावद गांव का है, जहां गुरुवार को खेलते समय एक नौ महीने के शिशु के गले में काजल रखने वाली एक छोटी प्लास्टिक की डिब्बी फंस गई। इस घटना के बाद बच्चे को सांस लेने में भारी परेशानी होने लगी, जिससे परिवार में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में परिजन बच्चे को लेकर शाजापुर जिला अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने लैरिंगोस्कोप उपकरण की मदद से सुरक्षित रूप से डिब्बी को बाहर निकालकर बच्चे की जान बचाई। फिलहाल बच्चे को अस्पताल के आईसीयू (गहन चिकित्सा इकाई) में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी निगरानी की जा रही है।

मिली जानकारी के अनुसार, शाजापुर जिले के लड़ावद गांव में रहने वाले एक परिवार का नौ महीने का बच्चा गुरुवार को घर में खेल रहा था। इसी दौरान खेलते-खेलते बच्चे ने काजल रखने वाली एक छोटी प्लास्टिक की डिब्बी को अपने मुंह में डाल लिया। मासूम बच्चे की उम्र बहुत कम होने के कारण वह इसे निगल नहीं सका और वह प्लास्टिक की डिब्बी उसके गले में जाकर फंस गई। डिब्बी के गले में फंसते ही बच्चे की सांस की नली अवरुद्ध हो गई, जिसके कारण उसे सांस लेने में गंभीर परेशानी होने लगी। बच्चे के रोने और सांस लेने में दिक्कत होते देख परिजन तुरंत समझ गए कि कोई गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है।

बच्चे की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए परिजनों ने बिना किसी देरी के उसे तत्काल शाजापुर जिला अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया। लड़ावद गांव से शाजापुर जिला अस्पताल तक का सफर परिजनों के लिए बेहद तनावपूर्ण रहा, क्योंकि बच्चे की सांसें तेजी से उखड़ रही थीं। जब परिजन बच्चे को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, तो उन्होंने वहां मौजूद चिकित्सा कर्मियों को पूरी स्थिति से अवगत कराया। बच्चे की गंभीर हालत को देखते हुए अस्पताल के डॉक्टरों ने तुरंत आपातकालीन प्रोटोकॉल के तहत कार्रवाई शुरू की।

शाजापुर जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने बच्चे की जांच के बाद पाया कि गले में कोई ठोस वस्तु फंसी हुई है, जो वायुमार्ग को रोक रही है। डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए लैरिंगोस्कोप नामक विशेष चिकित्सा उपकरण का उपयोग करने का निर्णय लिया। लैरिंगोस्कोप एक ऐसा उपकरण होता है जिसका उपयोग गले और स्वर यंत्र (लैरिंक्स) के भीतर देखने और फंसी हुई वस्तुओं को सुरक्षित रूप से बाहर निकालने के लिए किया जाता है। डॉक्टरों ने पूरी सावधानी और दक्षता के साथ इस उपकरण की मदद से बच्चे के गले में फंसी काजल की प्लास्टिक डिब्बी को बाहर निकाल लिया। डॉक्टरों की इस त्वरित और सटीक कार्रवाई से बच्चे की जान खतरे से बाहर आ सकी।

डिब्बी को गले से सफलतापूर्वक निकाले जाने के बाद भी बच्चे की स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने कोई जोखिम नहीं उठाया। चिकित्सकों ने एहतियातन बच्चे को अस्पताल के आईसीयू (इंटेंसिव केयर यूनिट) में भर्ती कर दिया है। आईसीयू में बच्चे की लगातार निगरानी की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सांस की नली में किसी प्रकार की सूजन या अन्य कोई जटिलता तो उत्पन्न नहीं हो रही है। हालांकि, डॉक्टरों द्वारा समय रहते की गई सटीक सर्जरी और उपचार के कारण बच्चे की जान बच गई, जिसे चिकित्सा टीम की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

छोटे बच्चों, विशेषकर एक साल से कम उम्र के शिशुओं में इस तरह की दुर्घटनाएं आम हैं, क्योंकि इस उम्र में बच्चे अपने आसपास की हर चीज को मुंह में डालकर उसका अनुभव करने की कोशिश करते हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे बच्चों की पहुंच से प्लास्टिक की डिब्बियां, सिक्के, बैटरी, छोटे खिलौने, बटन और अन्य ऐसी वस्तुओं को हमेशा दूर रखना चाहिए जिन्हें वे निगल सकते हैं या जो उनके गले में फंस सकती हैं। गले में कोई वस्तु फंसने पर बच्चे को सांस लेने में तुरंत परेशानी होती है, चेहरा नीला पड़ सकता है और खांसी या रोने की आवाज बदल सकती है। ऐसे में परिजनों को घबराने के बजाय तुरंत बच्चे को नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए।

शाजापुर जिला अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा दिखाई गई इस तत्परता और पेशेवर दक्षता की सराहना की जा रही है। सही समय पर सही उपकरण और तकनीक के उपयोग ने एक मासूम की जान बचा ली और एक परिवार को बड़े हादसे से बचा लिया। यह घटना अभिभावकों के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है कि वे अपने छोटे बच्चों की गतिविधियों पर विशेष ध्यान दें और घर में मौजूद छोटी-छोटी वस्तुओं को उनकी पहुंच से दूर रखें।