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Sun, Oct 11, 2026Updated 9:28 AM IST
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सहरसा: बेटी के लिए दवा लाने बाजार जा रहे साइकिल सवार मजदूर को अज्ञात वाहन ने रौंदा, मौत; 4 बच्चों का पिता था संजीव मुखिया

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बिहार के सहरसा जिले से एक बेहद दर्दनाक और हृदय विदारक सड़क दुर्घटना की खबर सामने आई है। सहरसा-सुपौल मुख्य मार्ग पर एक अज्ञात वाहन ने साइकिल सवार मजदूर को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। यह हादसा तब हुआ जब मृतक अपनी बीमार बेटी के लिए दवा खरीदने बाजार जा रहा था। मृतक की पहचान बिहरा थाना क्षेत्र के सिहोल गांव, चकला वार्ड नंबर 14 निवासी नरेश मुखिया के 28 वर्षीय पुत्र संजीव मुखिया के रूप में हुई है। वह चार बच्चों का पिता था और मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। इस घटना के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

मिली जानकारी के अनुसार, यह सड़क दुर्घटना सहरसा-सुपौल मुख्य मार्ग पर हुई। संजीव मुखिया अपनी साइकिल से बाजार की ओर जा रहा था। उसकी बेटी बीमार थी और उसके इलाज के लिए दवा लाना जरूरी था। एक गरीब मजदूर होने के नाते संजीव के पास साइकिल के अलावा आवागमन का कोई अन्य साधन नहीं था। वह अपनी बेटी की चिंता में डूबा हुआ बाजार की तरफ निकला था, लेकिन उसे यह नहीं पता था कि वह कभी घर लौटकर नहीं आएगा। रास्ते में एक अज्ञात वाहन ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि संजीव मुखिया सड़क पर दूर जा गिरा और उसकी वहीं पर मौत हो गई।

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों की भीड़ घटनास्थल पर जुट गई। ग्रामीणों ने तत्काल इस बात की जानकारी बिहरा थाना पुलिस को दी। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने अज्ञात वाहन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और फरार वाहन तथा उसके चालक की तलाश शुरू कर दी है। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक दुर्घटनाग्रस्त करने वाले वाहन का कोई सुराग नहीं लग पाया था। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने और स्थानीय लोगों से पूछताछ करने में जुटी हुई है ताकि आरोपी वाहन चालक तक जल्द से जल्द पहुंचा जा सके।

संजीव मुखिया की मौत की खबर जैसे ही सिहोल गांव के चकला वार्ड नंबर 14 में पहुंची, पूरे गांव में मातम पसर गया। संजीव के पिता नरेश मुखिया और उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। संजीव महज 28 साल का था और उसके ऊपर उसके पूरे परिवार की जिम्मेदारी थी। वह चार बच्चों का पिता था, जिनमें से एक बेटी अभी बीमार चल रही थी और जिसके लिए वह दवा लाने निकला था, उसी की खातिर उसने अपनी जान गंवा दी। अब इन चार छोटे-छोटे बच्चों के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया है। परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य ही नहीं रहा, जिससे अब इस गरीब परिवार के सामने भविष्य में दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

स्थानीय ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सहरसा-सुपौल मुख्य मार्ग पर वाहनों की रफ्तार अक्सर बहुत तेज रहती है। इस मार्ग पर भारी वाहनों और तेज रफ्तार गाड़ियों का आवागमन लगातार बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि इस सड़क पर पहले भी कई बार दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। पैदल चलने वाले लोग और साइकिल सवार इस मार्ग पर खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मुख्य मार्ग पर वाहनों की गति को नियंत्रित करने के लिए स्पीड ब्रेकर या उचित संकेतक लगाए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों को रोका जा सके।

संजीव मुखिया के अंतिम संस्कार की तैयारियां गांव में शुरू हो गईं। उनके पार्थिव शरीर को जब घर लाया गया तो परिजनों की चीख-पुकार से पूरा माहौल गमगीन हो गया। बेटी के लिए दवा लाने गए पिता का शव देखकर गांव के हर व्यक्ति की आंखें नम थीं। इस घटना ने एक बार फिर बिहार में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और ग्रामीण इलाकों में सड़क सुरक्षा की कमी के गंभीर मुद्दे को उजागर किया है। बिहरा थाना पुलिस ने मामले की जांच जारी रखने और दोषी वाहन चालक को जल्द गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया है। फिलहाल, संजीव मुखिया के परिवार को न्याय और मदद की सख्त जरूरत है, क्योंकि एक 28 वर्षीय युवा मजदूर की मौत ने पूरे परिवार को गहरे अंधेरे में धकेल दिया है।