Mon, 12 Oct 20269:51 AM
Mon, Oct 12, 2026Updated 9:51 AM IST
होम › मध्य प्रदेश

सीहोर में किसानों का बिजली कटौती के खिलाफ उग्र प्रदर्शन: मशाल जुलूस निकालकर किया चक्काजाम, दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन की चेतावनी

WhatsAppFacebookX

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में लगातार हो रही बिजली कटौती और विद्युत लाइनों से झूलते तारों की समस्या से परेशान किसानों ने उग्र विरोध प्रदर्शन किया है। किसानों ने रात के अंधेरे में मशाल जुलूस निकालकर अपनी नाराजगी जाहिर की और बिजली कंपनी के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए सड़क पर उतरकर चक्काजाम भी किया। इस दौरान आक्रोशित किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को लेकर जल्द कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो वे दिल्ली के जंतर-मंतर पर जाकर बड़ा आंदोलन करेंगे।

सीहोर जिले के किसान पिछले काफी समय से बिजली की अनियमित आपूर्ति और बार-बार हो रही कटौती से बेहद परेशान हैं। खेतों में सिंचाई के लिए बिजली एक बुनियादी जरूरत है, लेकिन लगातार कटौती के कारण फसलों को पानी नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा, गांवों और खेतों के आसपास बिजली के तारों की दयनीय स्थिति ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। कई जगहों पर तार नीचे झूल रहे हैं, जिससे न केवल कृषि कार्यों में बाधा आ रही है, बल्कि किसानों, उनके परिवारों और मवेशियों की जान को भी गंभीर खतरा बना हुआ है। इन्हीं समस्याओं से तंग आकर किसानों ने अब सड़कों पर उतरने का फैसला किया है।

विरोध प्रदर्शन के दौरान किसानों ने हाथों में मशालें लेकर एक विशाल जुलूस निकाला। रात के समय निकाले गए इस मशाल जुलूस में बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए, जिन्होंने बिजली वितरण कंपनी और प्रशासन के खिलाफ तीखे नारे लगाए। जुलूस के बाद किसानों ने मुख्य मार्ग पर बैठकर चक्काजाम कर दिया, जिससे यातायात पूरी तरह से बाधित हो गया। किसानों का कहना था कि जब तक उनकी सुनवाई नहीं होती और बिजली की समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता, वे पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

प्रदर्शनकारी किसानों ने बताया कि उन्होंने पहले भी कई बार संबंधित अधिकारियों और बिजली कंपनी के प्रतिनिधियों को बिजली कटौती और झूलते तारों की समस्या से अवगत कराया था। हालांकि, उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। किसानों ने आरोप लगाया कि सिंचाई के लिए तय शेड्यूल के अनुसार बिजली नहीं दी जा रही है, जिससे खेतों में लगी फसलें सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं। बिजली की अनियमितता के कारण डीजल पंपों का सहारा लेना पड़ रहा है, जो किसानों की आर्थिक स्थिति पर भारी बोझ डाल रहा है।

आक्रोशित किसानों ने अपने आंदोलन को और तेज करने की रणनीति का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता है, तो वे दिल्ली जाएंगे और जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन करेंगे। किसानों का मानना है कि केंद्र और राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए अब दिल्ली में आंदोलन करना ही एकमात्र विकल्प बचा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर होने वाले इस आंदोलन में सीहोर जिले के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों के किसान भी बड़ी तादाद में शामिल होंगे।

बता दें कि मध्य प्रदेश में कृषि क्षेत्र के लिए बिजली आपूर्ति हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। किसानों को सिंचाई के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है, लेकिन जमीनी स्तर पर तकनीकी खामियों और रखरखाव की कमी के कारण अक्सर ऐसी समस्याएं सामने आती रहती हैं। सीहोर में झूलते तारों का मामला ग्रामीण विद्युतीकरण के बुनियादी ढांचे की देखभाल में कमियों को भी उजागर करता है। खुले और नीचे लटकते तार खासकर बारिश और तेज हवाओं के मौसम में हादसों का कारण बन सकते हैं।

इस पूरे मामले में अभी तक बिजली वितरण कंपनी या जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह स्पष्ट नहीं है कि किसानों की मांगों पर विचार के लिए प्रशासन द्वारा कोई वार्ता की पहल की गई है या नहीं। हालांकि, किसानों के उग्र होते प्रदर्शन और दिल्ली में जंतर-मंतर पर आंदोलन की चेतावनी के बाद स्थानीय प्रशासन और बिजली कंपनी पर दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है।

किसान संगठनों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन उनकी उपेक्षा किए जाने से उन्हें सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उनका मुख्य उद्देश्य सिर्फ यही है कि खेतों तक नियमित रूप से बिजली पहुंचे और झूलते तारों को दुरुस्त करके किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान को रोका जाए। सीहोर में किसानों के इस प्रदर्शन ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि बिजली आपूर्ति की व्यवस्था और उसके रखरखाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन किसानों के इस आक्रोश को शांत करने के लिए क्या कदम उठाता है।