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Thu, Oct 8, 2026Updated 5:03 PM IST
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सिकटी के ढेंगड़ी में 169 साल पुराना दुर्गा मंदिर: सप्तमी पर सफेद और अष्टमी पर काले पाठे की बलि, 60 साल से पूजा करा रहे पुरोहित

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अररिया। बिहार के अररिया जिले के सिकटी प्रखंड स्थित ढेंगड़ी गांव में मां दुर्गा का एक बेहद प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर है, जो आज भी श्रद्धालुओं की गहरी आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। वर्ष 1857 में स्थापित यह मंदिर अब 169 साल पुराना हो चुका है। इस लंबे ऐतिहासिक कालखंड में मंदिर ने अपनी प्राचीन परंपराओं, अनूठी पूजा पद्धतियों और श्रद्धालुओं की अटूट भक्ति को पूरी तरह संजोकर रखा है। वंदे भारत न्यूज़ की इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको इस ऐतिहासिक मंदिर की उन विशेषताओं से रूबरू करा रहे हैं, जो इसे पूरे क्षेत्र में एक अलग पहचान प्रदान करती हैं।

ढेंगड़ी गांव में स्थित यह दुर्गा मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह सिकटी प्रखंड और आसपास के इलाकों के लोगों की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। 1857 का वह दौर भारतीय इतिहास में अपने आप में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे ऐतिहासिक समय में इस मंदिर की स्थापना हुई थी। पिछले 169 वर्षों में देश और समाज में कई बड़े बदलाव आए हैं, लेकिन इस मंदिर की प्राचीन परंपराएं और यहां की पूजा-अर्चना की विधियां आज भी उसी प्रकार निभाई जा रही हैं, जैसे पूर्वजों के समय में होती थीं। यही कारण है कि दूर-दराज के गांवों और शहरों से भी श्रद्धालु यहां माता के दर्शन करने और मन्नतें मांगने के लिए आते हैं।

इस मंदिर की सबसे खास और चर्चित बात यहां नवरात्रि के दौरान दी जाने वाली बलि की प्राचीन परंपरा है। मंदिर में सदियों से चली आ रही इस परंपरा के अनुसार, नवरात्रि के विशिष्ट दिनों में विशेष प्रकार के पाठे (बकरे) की बलि दी जाती है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, महासप्तमी के दिन माता को सफेद रंग के पाठे की बलि देने का विधान है। वहीं, महाअष्टमी के दिन काले रंग के पाठे की बलि दी जाती है। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और स्थानीय श्रद्धालुओं की मान्यता है कि इन विशिष्ट दिनों में इसी विधि-विधान से पूजा और बलि देने पर मां दुर्गा विशेष रूप से प्रसन्न होती हैं और उनके भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। बलि की यह परंपरा मंदिर की प्राचीनता और यहां के अनुष्ठानों की मौलिकता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।

मंदिर की एक अन्य उल्लेखनीय विशेषता यहां के पुरोहित की समर्पित सेवा है। जानकारी के अनुसार, वर्तमान पुरोहित पिछले लगभग 60 वर्षों से लगातार इस मंदिर में पूजा-अर्चना का कार्य कर रहे हैं। छह दशकों का यह लंबा समय किसी भी व्यक्ति के जीवन का एक बहुत बड़ा हिस्सा होता है। इन 60 वर्षों में पुरोहित ने हर नवरात्रि, हर त्योहार और हर विशेष अवसर पर माता की पूजा पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ की है। उनका यह अटूट समर्पण मंदिर की गरिमा और पवित्रता को बनाए रखने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। बुजुर्ग पुरोहित के मार्गदर्शन में ही मंदिर की सभी प्राचीन विधियां और अनुष्ठान बिना किसी त्रुटि के संपन्न कराए जाते हैं। उनकी उपस्थिति श्रद्धालुओं के लिए भी एक बड़े आकर्षण और आस्था का कारण है।

सिकटी प्रखंड के ढेंगड़ी गांव में स्थित होने के कारण यह मंदिर ग्रामीण परिवेश की सादगी और धार्मिक गहराई का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है। नवरात्रि के नौ दिनों में इस मंदिर का पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। माता के जयकारों से पूरा गांव गूंज उठता है। स्थानीय ग्रामीणों के साथ-साथ सिकटी प्रखंड के अन्य गांवों और अररिया जिले के विभिन्न हिस्सों से भी भारी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मेले जैसा माहौल बन जाता है और लोग सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना में भाग लेते हैं। यह मंदिर लोगों को धार्मिक और सामाजिक रूप से एक सूत्र में बांधने का भी महत्वपूर्ण कार्य करता है।

आज के आधुनिक युग में जब कई प्राचीन परंपराएं धीरे-धीरे लुप्त हो रही हैं या उनमें बदलाव आ रहा है, ऐसे में ढेंगड़ी का यह 169 साल पुराना दुर्गा मंदिर अपनी मूल पहचान और विधि-विधानों को सुरक्षित रखे हुए है। सप्तमी पर सफेद और अष्टमी पर काले पाठे की बलि की परंपरा हो या फिर 60 साल से एक ही पुरोहित द्वारा पूजा कराने की अद्भुत निष्ठा, ये सभी बातें इस मंदिर को अन्य मंदिरों से अलग और विशेष बनाती हैं। अररिया जिले के सिकटी प्रखंड के लिए यह मंदिर गर्व और आस्था का विषय है। श्रद्धालुओं का मानना है कि मां दुर्गा की कृपा इस गांव और पूरे क्षेत्र पर सदैव बनी रहती है, जिससे यहां शांति और समृद्धि का वास होता है। आने वाले समय में भी यह प्राचीन मंदिर अपनी ऐतिहासिक परंपराओं के साथ श्रद्धालुओं की आस्था का ऐसा ही मजबूत केंद्र बना रहेगा।