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Fri, Oct 9, 2026Updated 3:42 PM IST
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सिंगरौली: बीएड अंकसूची में 100 अंक बढ़ाकर अतिथि शिक्षक की फर्जी नियुक्ति, एक महीने बाद माड़ा स्कूल के प्रभारी प्राचार्य रामलल्लू शाह सस्पेंड

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वंदे भारत न्यूज़, सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में अतिथि शिक्षक चयन प्रक्रिया में हुए बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आने के करीब एक महीने बाद शिक्षा विभाग ने आखिरकार अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए संबंधित विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य को निलंबित कर दिया है। बुधवार को जारी किए गए आदेश के अनुसार, माड़ा स्थित स्कूल के प्रभारी प्राचार्य रामलल्लू शाह को उनके पद से तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने अतिथि शिक्षक की नियुक्ति प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं बरतीं और दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर एक अभ्यर्थी को लाभ पहुंचाने का कार्य किया। यह पूरा मामला बीएड (बैचलर ऑफ एजुकेशन) की अंकसूची में 100 अंक अवैध रूप से बढ़ाकर फर्जी तरीके से अतिथि शिक्षक की नियुक्ति करने से जुड़ा हुआ है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, सिंगरौली जिले के माड़ा क्षेत्र में संचालित इस विद्यालय में अतिथि शिक्षक की रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान कुछ लोगों को संदेह हुआ कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। जब दस्तावेजों की गहन जांच-पड़ताल की गई, तो एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ। पाया गया कि जिस अभ्यर्थी को अतिथि शिक्षक के रूप में नियुक्त किया गया था, उसकी बीएड की मूल अंकसूची में भारी हेराफेरी की गई थी। आरोप है कि अंकसूची में सीधे तौर पर 100 अंक जोड़ दिए गए थे, ताकि वह अभ्यर्थी मेरिट लिस्ट में ऊपर आ सके और उसे नियुक्ति मिल सके। इतनी बड़ी संख्या में अंकों की वृद्धि ने साफ तौर पर यह संकेत दिया कि यह कोई छोटी-मोटी गलती नहीं, बल्कि एक सोचा-समझा और सुनियोजित फर्जीवाड़ा है।

इस मामले में सबसे गंभीर बात यह रही कि उक्त विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य रामलल्लू शाह की देखरेख और जिम्मेदारी में ही यह पूरी चयन प्रक्रिया संपन्न हुई थी। अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति में स्कूल के प्राचार्य या प्रभारी प्राचार्य की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। वे ही आवेदन पत्रों, शैक्षणिक योग्यता और अंकसूचियों के सत्यापन के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार होते हैं। ऐसे में जब 100 अंकों जैसी बड़ी छेड़छाड़ उनकी नाक के नीचे हो गई, तो सीधा संदेह उनकी भूमिका और निष्पक्षता पर उठना स्वाभाविक था। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने जब इस फर्जीवाड़े की पुष्टि की, तो इसे बेहद गंभीरता से लिया गया।

हालांकि, यह धांधली पहली बार लगभग एक महीने पहले ही उजागर हो गई थी, लेकिन विभागीय कार्रवाई में देरी होने से कई तरह के सवाल भी खड़े हो रहे थे। फर्जीवाड़े की सूचना मिलने के बाद से ही स्थानीय स्तर पर और शिक्षक संगठनों में इस बात को लेकर चर्चा गर्म थी कि आखिर दोषी अधिकारी के खिलाफ कठोर कदम क्यों नहीं उठाया जा रहा है। अब घटना के एक महीने बाद बुधवार को शिक्षा विभाग ने औपचारिक रूप से कार्रवाई करते हुए प्रभारी प्राचार्य रामलल्लू शाह को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया है। निलंबन की इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि विभाग ने इस फर्जीवाड़े को हल्के में नहीं लिया है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

सिंगरौली जिले में शिक्षा विभाग द्वारा की गई यह कार्रवाई इसलिए भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। अतिथि शिक्षक सरकारी स्कूलों में शिक्षण कार्य को सुचारू रूप से चलाने की रीढ़ होते हैं। यदि उनकी नियुक्ति में ही फर्जी दस्तावेजों और अंकों की हेराफेरी का सहारा लिया जाने लगे, तो इससे न केवल योग्य और प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों के साथ घोर अन्याय होता है, बल्कि छात्रों की शिक्षा की गुणवत्ता पर भी इसका सीधा और नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। 100 अंक बढ़ाकर नियुक्ति पाने वाले व्यक्ति की वास्तविक शैक्षणिक योग्यता पर सवाल खड़े होना लाजिमी है।

प्रभारी प्राचार्य रामलल्लू शाह के निलंबन के बाद अब यह देखा जाना बाकी है कि शिक्षा विभाग इस मामले में आगे क्या कदम उठाता है। क्या केवल प्राचार्य को सस्पेंड करके जांच को विराम दे दिया जाएगा, या फिर इस फर्जीवाड़े में शामिल अन्य संदिग्ध व्यक्तियों और जिस अभ्यर्थी ने फर्जी अंकसूची पेश की थी, उसके खिलाफ भी पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। फिलहाल, विभाग की ओर से इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है कि क्या निलंबित प्राचार्य के खिलाफ कोई विभागीय जांच समिति गठित की गई है या उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला भी दर्ज किया जाएगा।

माड़ा स्कूल में हुए इस फर्जीवाड़े ने पूरे सिंगरौली जिले के शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है। माना जा रहा है कि इस एक मामले के सामने आने के बाद विभाग अब अन्य स्कूलों में हुई अतिथि शिक्षक नियुक्तियों के दस्तावेजों और अंकसूचियों का भी व्यापक स्तर पर सत्यापन और क्रॉस-चेकिंग करा सकता है, ताकि भविष्य में इस तरह की धांधली को रोका जा सके। बुधवार को हुए निलंबन के आदेश के बाद स्कूल में नए प्रभारी प्राचार्य की नियुक्ति की प्रक्रिया भी शुरू होनी तय है, ताकि विद्यालय का शैक्षणिक कार्य बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से चलता रहे। वंदे भारत न्यूज़ इस पूरे मामले पर शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों के रुख और आगे की कार्रवाई पर लगातार नजर बनाए हुए है।