Thu, 08 Oct 202611:59 AM
Thu, Oct 8, 2026Updated 11:59 AM IST
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सिंगरौली: चितरंगी के जंगल में चींटियों से लिपटा मिला नवजात शिशु, ग्रामीण महिलाओं ने बचाया; SNCU में भर्ती

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मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में मानवता को शर्मसार करने वाला एक संवेदनशील मामला सामने आया है। जिले के चितरंगी क्षेत्र अंतर्गत बगैया गांव के समीपस्थ घने जंगल की झाड़ियों में बुधवार रात एक नवजात शिशु लावारिस हालत में मिला है। जब ग्रामीणों द्वारा इस शिशु को देखा गया, तो उसका शरीर पूरी तरह से चींटियों से ढका हुआ था और वह दर्द से रो रहा था। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों का दिल दहल गया। स्थानीय ग्रामीण महिलाओं ने तत्परता दिखाते हुए शिशु को चींटियों से मुक्त कराया और उसकी जान बचाई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और नवजात को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल ले गई। वर्तमान में शिशु को विशेष नवजात देखभाल इकाई (SNCU) में भर्ती कराया गया है, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार चल रहा है और उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।

बगैया गांव के जंगली इलाके में बुधवार की रात को यह हृदयविदारक घटना सामने आई। अंधेरे और सन्नाटे के बीच जंगल की झाड़ियों से किसी शिशु के रोने की आवाज सुनकर स्थानीय निवासियों का ध्यान उस ओर गया। जब कुछ ग्रामीण आवाज का पीछा करते हुए झाड़ियों के पास पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि एक नवजात शिशु जमीन पर पड़ा है और उसके नाजुक शरीर पर हजारों की तादाद में चींटियां रेंग रही हैं। शिशु लगातार रो रहा था, जिससे स्पष्ट था कि उसे काफी समय से वहां छोड़ा गया था या वह किसी कारणवश वहां पहुंच गया था। चींटियों के काटने से शिशु को असहनीय पीड़ा हो रही थी, लेकिन ग्रामीणों की समय पर पहुंचने वाली सतर्कता ने एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया।

इस घटना में स्थानीय ग्रामीण महिलाओं ने अत्यंत साहस और करुणा का परिचय दिया। बिना किसी हिचकिचाहट के उन्होंने शिशु को अपनी गोद में लिया और धैर्यपूर्वक उसके शरीर से एक-एक करके चींटियों को हटाया। यह प्रक्रिया बेहद नाजुक थी, क्योंकि नवजात की त्वचा अत्यंत संवेदनशील होती है और किसी भी प्रकार की लापरवाही से उसे गंभीर चोट या संक्रमण हो सकता था। महिलाओं ने न केवल शिशु को शारीरिक पीड़ा से मुक्त किया, बल्कि उसे सुरक्षा और ऊष्मा भी प्रदान की। ग्रामीणों की इस त्वरित कार्रवाई और मानवीय सहयोग के बिना शिशु का जीवित रहना कठिन था। इस सामूहिक प्रयास ने समाज में अभी भी जीवित मानवीय मूल्यों की मिसाल पेश की है।

ग्रामीणों द्वारा शिशु को बचाने के बाद तुरंत ही इसकी सूचना स्थानीय पुलिस प्रशासन को दी गई। सूचना प्राप्त होते ही चितरंगी थाना पुलिस दल-बल के साथ मौके पर पहुंची। पुलिस ने शिशु को अपने संरक्षण में लिया और प्राथमिक उपचार तथा उच्चतर चिकित्सा सुविधा के लिए उसे निकटतम स्वास्थ्य केंद्र ले गई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए बिना कोई देरी किए शिशु को जिला स्तर पर बेहतर सुविधाओं से लैस अस्पताल में रेफर किया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शिशु को मिलने पर उसकी स्थिति चिंताजनक थी, लेकिन ग्रामीणों की मदद और समय पर मिले उपचार के कारण अब खतरा टल चुका है।

वर्तमान में नवजात शिशु को अस्पताल की विशेष नवजात देखभाल इकाई (Special Newborn Care Unit – SNCU) में भर्ती कराया गया है। SNCU उन नवजात शिशुओं के लिए होती है जिन्हें जन्म के तुरंत बाद विशेष चिकित्सीय देखभाल, ऑक्सीजन सपोर्ट या संक्रमण से बचाव की आवश्यकता होती है। चूंकि इस शिशु के शरीर पर चींटियों ने हमला किया था, इसलिए संक्रमण और अन्य जटिलताओं के जोखिम को देखते हुए उसे इस विशेष इकाई में रखा गया है। चिकित्सकों के अनुसार, फिलहाल शिशु की स्थिति स्थिर है और वह खतरे से बाहर है। मेडिकल टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही है और आवश्यक दवाएं तथा पोषण प्रदान कर रही है। अस्पताल प्रशासन ने पुष्टि की है कि शिशु को पूर्ण सुरक्षा और देखभाल मिल रही है।

यह घटना सिंगरौली और समस्त मध्य प्रदेश में बाल सुरक्षा एवं सामाजिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। जंगल में नवजात को इस प्रकार असहाय अवस्था में छोड़ना भारतीय दंड संहिता और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत एक संगीन अपराध है। पुलिस ने इस मामले में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। जांच दल यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि शिशु को किसने, क्यों और कब जंगल में छोड़ा। पुलिस आसपास के क्षेत्रों में सीसीटीवी फुटेज खंगालने और स्थानीय लोगों से पूछताछ करने में जुटी है ताकि दोषियों को कानूनी कार्रवाई के दायरे में लाया जा सके।

प्रशासन और बाल कल्याण समिति (CWC) भी अब इस मामले में सक्रिय हो गई है। शिशु के स्वस्थ होने के बाद उसकी देखभाल और भविष्य की योजना बाल कल्याण समिति द्वारा निर्धारित की जाएगी। यदि माता-पिता या अभिभावकों का पता नहीं चलता है, तो कानूनी प्रक्रिया के तहत शिशु को सरकारी संरक्षण या दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया के लिए पात्र घोषित किया जाएगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि शिशु के सर्वोत्तम हित को सर्वोपरि रखते हुए सभी कानूनी और सामाजिक कदम उठाए जाएंगे। इस घटना ने एक बार फिर समाज के सामने उन कमजोर वर्गों की दुर्दशा को उजागर किया है जो बुनियादी सुरक्षा और देखभाल से वंचित हैं।

सिंगरौली जैसे क्षेत्रों में जहां स्वास्थ्य और सामाजिक सेवाओं की चुनौतियां मौजूद हैं, वहां बगैया गांव के ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं द्वारा दिखाई गई तत्परता सराहनीय है। उनकी सूझबूझ और मानवीय संवेदना ने एक जीवन को बचा लिया। वहीं, प्रशासन और चिकित्सा विभाग की समयबद्ध प्रतिक्रिया ने इस मानवीय प्रयास को सफल बनाया। अब यह सुनिश्चित करना प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है कि ऐसे हादसे भविष्य में दोबारा न हों और हर नवजात को सुरक्षित वातावरण मिले। पुलिस जांच जारी है और आगामी दिनों में इस मामले में और तथ्य सामने आने की संभावना है।