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Sun, Oct 11, 2026Updated 7:10 AM IST
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SIR के खिलाफ पटना में छात्र संगठन दिशा का उग्र प्रदर्शन: चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के विरुद्ध नारेबाजी, बोले- ये आंदोलन थमने वाला नहीं

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पटना। बिहार की राजधानी पटना में शनिवार को छात्र संगठन दिशा की ओर से एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन मुख्य रूप से SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के खिलाफ आयोजित किया गया था। छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं ने भिखना पहाड़ी मोड़ के पास एकत्र होकर चुनाव आयोग, केंद्र सरकार और SIR व्यवस्था के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान सैकड़ों छात्र हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर सड़कों पर उतरे और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।

शनिवार को हुए इस प्रदर्शन में छात्र संगठन दिशा के सदस्यों ने साफ तौर पर कहा कि यह आंदोलन यहीं थमने वाला नहीं है। उनका कहना था कि जब तक उनकी मांगों को पूरी तरह से नहीं माना जाता और SIR की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जवाब नहीं दिया जाता, तब तक वे सड़कों पर उतरते रहेंगे और अपना विरोध जारी रखेंगे। छात्रों ने आरोप लगाया कि मौजूदा प्रक्रिया से मतदाताओं, विशेषकर युवाओं और छात्रों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

भिखना पहाड़ी मोड़ के पास सुबह से ही छात्रों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। जैसे-जैसे समय बीता, प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ती गई। छात्रों ने अपने हाथों में ऐसे पोस्टर और बैनर पकड़े हुए थे, जिन पर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लिखे हुए थे। इन पोस्टरों और बैनरों के जरिए छात्रों ने SIR प्रक्रिया में खामियों का हवाला देते हुए इसे तत्काल प्रभाव से वापस लेने या इसमें व्यापक सुधार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान पूरा इलाका नारों से गूंजता रहा और छात्रों ने एकजुटता का परिचय दिया।

छात्र संगठन दिशा के नेताओं ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में जो बदलाव किए जा रहे हैं, उससे कई योग्य मतदाताओं के नाम सूची से कट रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और इसके कारण आम नागरिकों, खासकर पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। छात्रों का कहना था कि लोकतंत्र में हर नागरिक का वोट अमूल्य होता है और किसी भी तकनीकी या प्रशासनिक प्रक्रिया के नाम पर लोगों को उनके मताधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

इस विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने सीधे तौर पर भारत निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उनका आरोप था कि चुनाव आयोग द्वारा चलाई जा रही इस मुहिम में जमीनी स्तर पर कई अनियमितताएं देखने को मिल रही हैं, लेकिन अधिकारी इन शिकायतों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए छात्रों ने कहा कि सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी वास्तविक मतदाता सूची से बाहर न हो। छात्रों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी बात नहीं सुनी गई तो वे आने वाले दिनों में और भी बड़े पैमाने पर आंदोलन करेंगे।

प्रदर्शन के दौरान भिखना पहाड़ी मोड़ और उसके आसपास के इलाकों में कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ। सड़क पर उतरे छात्रों के कारण वाहनों की आवाजाही धीमी हो गई। हालांकि, स्थानीय पुलिस प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और यातायात को सुचारू बनाने के प्रयास किए। पुलिस अधिकारियों ने छात्रों से शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराने की अपील की। छात्रों ने भी शांति बनाए रखते हुए अपनी बात रखी और किसी प्रकार की हिंसा या तोड़फोड़ की घटना की सूचना नहीं मिली।

छात्र संगठन दिशा ने अपने इस आंदोलन को बिहार के अन्य जिलों तक ले जाने का भी संकेत दिया है। संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि पटना में आज जो प्रदर्शन हुआ है, वह सिर्फ शुरुआत है। राज्य भर के छात्र और युवा इस मुद्दे पर एकजुट हैं और वे अपने मताधिकार की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएंगे। उन्होंने अन्य छात्र संगठनों और युवाओं से भी अपील की कि वे इस अभियान में शामिल हों और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाएं।

ज्ञात हो कि चुनाव आयोग समय-समय पर मतदाता सूचियों के शुद्धिकरण और अपडेट के लिए विशेष अभियान चलाता है, जिसमें SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन एक प्रमुख हिस्सा होता है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची से फर्जी नामों को हटाना और नए योग्य मतदाताओं के नाम जोड़ना होता है। हालांकि, कई बार इस प्रक्रिया के दौरान वास्तविक मतदाताओं के नाम कटने या अन्य तकनीकी समस्याओं की शिकायतें सामने आती रही हैं। छात्र संगठन दिशा का वर्तमान प्रदर्शन इन्हीं शिकायतों और चिंताओं का परिणाम माना जा रहा है।

शनिवार को पटना के भिखना पहाड़ी मोड़ पर हुए इस प्रदर्शन ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि छात्र और युवा वर्ग अपने लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर कितने सजग हैं। चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए छात्रों ने जो आक्रोश व्यक्त किया है, उसने प्रशासन के लिए भी चुनौती खड़ी कर दी है। अब देखना यह होगा कि चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारी छात्र संगठन दिशा की इन मांगों पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या इस आंदोलन को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाता है। फिलहाल, छात्रों ने साफ कर दिया है कि उनका यह आंदोलन आने वाले समय में और तेज होगा।