सीतामढ़ी: शौचालय की टंकी के लिए सात साल पहले खोदा गया गड्ढा बना काल, 4 वर्षीय बच्चे की गिरने से मौत

वन्दे भारत न्यूज़। बिहार के सीतामढ़ी जिले में एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिले के डुमरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले खजुरिया गांव में खुले पड़े एक गड्ढे में गिरने से महज चार साल के एक मासूम बच्चे की मौत हो गई। यह गड्ढा किसी हाल ही में हुई खुदाई का नहीं था, बल्कि बताया जा रहा है कि इसे करीब सात साल पहले शौचालय की टंकी बनवाने के उद्देश्य से खोदा गया था। इतने लंबे समय तक इस गड्ढे को बिना ढके खुले छोड़ दिया गया, जो अंततः एक छोटे से बच्चे की जान लेने का कारण बन गया। इस घटना ने स्थानीय प्रशासन की लापरवाही और ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह दुर्घटना डुमरा थाना क्षेत्र के खजुरिया गांव में घटी। मृतक बच्चे की आयु मात्र चार वर्ष बताई जा रही है। घटना के संबंध में जो विवरण सामने आए हैं, उनके मुताबिक बच्चा खेलते-खेलते या अपने घर के आसपास घूमते हुए उस खुले गड्ढे के पास पहुंच गया और उसमें गिर गया। गड्ढे में गिरने के बाद बच्चे की मौत हो गई। यह गड्ढा पड़ोस में रहने वाले दरेश महतो द्वारा खोदा गया था। बताया जा रहा है कि दरेश महतो ने लगभग सात वर्ष पूर्व अपने शौचालय की टंकी के निर्माण के लिए इस गड्ढे की खुदाई कराई थी। हालांकि, खुदाई के बाद न तो वहां शौचालय की टंकी का निर्माण पूरा किया गया और न ही उस गड्ढे को मिट्टी से भरकर या किसी ठोस आवरण से ढककर सुरक्षित किया गया। पिछले सात सालों से यह गड्ढा उसी खतरनाक स्थिति में खुला पड़ा हुआ था।
सात साल तक किसी भी गड्ढे का खुले रहना, खासकर तब जब वह आवासीय क्षेत्र में हो और आसपास छोटे बच्चे रहते हों, एक अत्यंत गंभीर लापरवाही का मामला है। खजुरिया जैसे ग्रामीण इलाकों में बच्चे अक्सर घरों के बाहर, गलियों और पड़ोस के खुले स्थानों पर खेलते हैं। ऐसे में यदि कोई गड्ढा बिना किसी बाड़, चेतावनी संकेत या ढक्कन के खुला छोड़ दिया जाए, तो इस तरह की दुर्घटनाएं होना स्वाभाविक हो जाता है। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बुनियादी सुरक्षा उपायों की कितनी भारी कमी है। लोगों को अपनी संपत्ति या निर्माण कार्यों के दौरान दूसरों, विशेषकर बच्चों की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए, लेकिन इस मामले में ऐसा होता नहीं दिखा।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय स्तर पर हड़कंप मच गया। बच्चे की मौत की खबर से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। चार साल का बच्चा परिवार की खुशियों का केंद्र होता है और उसकी इस तरह अचानक हुई मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। खजुरिया गांव में भी मातम पसरा हुआ है। पड़ोसी और गांव के अन्य लोग इस घटना से स्तब्ध हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस गड्ढे में यह हादसा हुआ, वह लंबे समय से उसी हालत में पड़ा था, लेकिन किसी ने भी उसे ढकने या भरने की पहल नहीं की।
इस घटना के बाद डुमरा थाना पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। हालांकि, स्रोत में उपलब्ध जानकारी के अनुसार अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि गड्ढा खोदने वाले व्यक्ति दरेश महतो के खिलाफ कोई प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की गई है या नहीं, और न ही पुलिस की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने आया है। यह भी अनिश्चित है कि प्रशासन ने इस लापरवाही के लिए क्या कदम उठाए हैं। पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं है, बल्कि यह सिस्टम की विफलता का भी प्रतीक है। स्वच्छ भारत अभियान के तहत देश भर में शौचालय निर्माण को बढ़ावा दिया गया है, लेकिन निर्माण कार्यों के दौरान और उसके बाद सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। यदि कोई गड्ढा खोदा जाता है और उसका उपयोग नहीं हो पाता, तो उसे तुरंत भर देना या सुरक्षित रूप से ढक देना संबंधित व्यक्ति की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी होती है। खजुरिया गांव में हुई यह घटना इसी जिम्मेदारी के निर्वहन न होने का सबसे भयावह परिणाम है।
बिहार में इससे पहले भी कई बार खुले गड्ढों, नालों या कुओं में गिरने से बच्चों की मौत की खबरें सामने आती रही हैं। सीतामढ़ी जिले की यह ताजा घटना प्रशासन और समाज दोनों के लिए एक चेतावनी है। अधिकारियों को ऐसे खुले और खतरनाक गड्ढों की पहचान कर उन्हें तुरंत बंद करवाने के लिए नियमित अभियान चलाने की आवश्यकता है। साथ ही, ग्रामीण स्तर पर लोगों को जागरूक करने की भी सख्त जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। फिलहाल, खजुरिया गांव में चार वर्षीय बच्चे की मौत का गम हर किसी को झकझोर कर रख देने वाला है।

