Thu, 08 Oct 20266:04 PM
Thu, Oct 8, 2026Updated 6:04 PM IST
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सीवान: जर्जर भवन और पेड़ के नीचे पढ़ाई को लेकर छात्रों का प्रदर्शन, आइसा-आरवाईए ने बीईओ कार्यालय को घेरा

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बिहार के सीवान जिले में सरकारी विद्यालयों की बदहाल स्थिति और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर छात्रों और संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) और रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन (आरवाईए) के कार्यकर्ताओं ने ‘स्कूल ठीक करो’ नाम से एक अभियान चलाया, जिसके तहत प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) के कार्यालय को घेरकर विरोध जताया गया। प्रदर्शनकारियों ने स्कूलों के जर्जर भवनों, पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ाई करने की मजबूरी और अन्य शैक्षणिक समस्याओं को उजागर करते हुए तत्काल समाधान की मांग की।

प्रत्यक्ष प्रदर्शन से पहले, आइसा और आरवाईए के कार्यकर्ताओं ने प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न सरकारी विद्यालयों का विस्तृत निरीक्षण किया। इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य इन स्कूलों में उपलब्ध शैक्षणिक और बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का जायजा लेना था। कार्यकर्ताओं ने पाया कि कई विद्यालयों की स्थिति बेहद दयनीय है। स्कूल भवन जर्जर हो चुके हैं, जिससे छात्रों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कई जगहों पर कक्षाएं संचालित करने के लिए पर्याप्त कमरे नहीं हैं, जिसके कारण बच्चों को खुले आसमान और पेड़ों के नीचे बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। यह स्थिति विशेष रूप से बारिश और कड़ाके की धूप के मौसम में छात्रों के लिए अत्यंत कष्टदायक साबित होती है।

निरीक्षण के दौरान सामने आई इन गंभीर समस्याओं को लेकर कार्यकर्ताओं ने प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने बीईओ कार्यालय को घेरकर नारेबाजी की और सरकार तथा शिक्षा विभाग से स्कूलों की व्यवस्था सुधारने की मांग की। ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र, युवा और संगठन के सदस्य शामिल हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग की ओर से सरकारी स्कूलों के रखरखाव और विकास की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है, जिसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि सरकारी विद्यालयों में बुनियादी ढांचे की कमी केवल भवनों तक सीमित नहीं है। पीने के पानी, शौचालय, खेल के मैदान और फर्नीचर जैसी आवश्यक सुविधाओं का भी भारी अभाव देखा गया है। कई स्कूलों में बैठने के लिए पर्याप्त डेस्क-बेंच नहीं हैं, जिससे छात्रों को जमीन पर ही बैठकर पढ़ना पड़ता है। इसके अलावा, शिक्षकों की कमी भी एक बड़ी समस्या है, जिसके कारण समय पर पाठ्यक्रम पूरा नहीं हो पाता और छात्रों की शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित होती है। आइसा और आरवाईए के प्रतिनिधियों ने इन सभी मुद्दों को एक साथ उठाते हुए कहा कि जब तक स्कूलों की बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं होंगी, तब तक शिक्षा के अधिकार का वास्तविक लाभ छात्रों तक नहीं पहुंच सकता।

कार्यकर्ताओं ने बीईओ को अपने निरीक्षण की रिपोर्ट और मांगों से अवगत कराया। उन्होंने मांग की कि जिन स्कूलों के भवन जर्जर हो चुके हैं, उनकी तत्काल मरम्मत या पुनर्निर्माण कराया जाए। जहां छात्र पेड़ के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं, वहां अतिरिक्त कक्षाओं का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। इसके साथ ही, स्कूलों में पीने के साफ पानी और स्वच्छ शौचालयों की व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया, तो वे इस अभियान को और तेज करेंगे और व्यापक स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

बता दें कि बिहार में सरकारी विद्यालयों के बुनियादी ढांचे को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। सीवान जिले में भी इस तरह की समस्याएं नई नहीं हैं, लेकिन छात्र संगठनों द्वारा ‘स्कूल ठीक करो’ जैसे लक्षित अभियान चलाकर सीधे शिक्षा पदाधिकारियों को घेरने की घटना ने इस मुद्दे को एक बार फिर प्रमुखता से उभारा है। शिक्षा अधिकारियों और प्रशासन के लिए यह प्रदर्शन एक संकेत है कि छात्र और स्थानीय समुदाय अब स्कूलों की बदहाली को लेकर अधिक मुखर हो रहे हैं।

इस पूरे मामले में बीईओ की ओर से क्या प्रतिक्रिया दी गई या मांगों को पूरा करने के लिए क्या आश्वासन दिया गया, इसकी विस्तृत जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है। हालांकि, आइसा और आरवाईए के कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर दृढ़ रुख अपनाया हुआ है। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे भी बेहतर शिक्षा और सुरक्षित वातावरण के अधिकारी हैं, और उन्हें ऐसी सुविधाएं मिलनी चाहिए जो किसी भी मानक स्कूल में अपेक्षित होती हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्कूल ही शिक्षा का एकमात्र सहारा होते हैं। ऐसे में इन विद्यालयों की दुर्दशा का सीधा असर लाखों बच्चों के भविष्य पर पड़ता है। सीवान में हुए इस प्रदर्शन ने एक बार फिर इस बात पर बल दिया है कि शिक्षा के अधिकार को केवल कागजों तक सीमित न रखकर जमीनी स्तर पर लागू करना अत्यंत आवश्यक है। ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के माध्यम से छात्र संगठनों ने न केवल स्थानीय प्रशासन का ध्यान खींचा है, बल्कि पूरे राज्य में सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने की बहस को भी एक नई दिशा देने का प्रयास किया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले में क्या ठोस कार्रवाई करता है और छात्रों की इन जायज मांगों का समाधान किस प्रकार सुनिश्चित किया जाता है।