Thu, 08 Oct 202612:57 PM
Thu, Oct 8, 2026Updated 12:57 PM IST
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समस्तीपुर में चार घंटे की मूसलाधार बारिश से शहर जलमग्न, थानेश्वर स्थान मंदिर के गर्भगृह में घुसा पानी

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समस्तीपुर। बिहार के समस्तीपुर जिले और इसके आसपास के क्षेत्रों में गुरुवार तड़के सुबह करीब पांच बजे से शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार हो रही झमाझम बारिश के कारण शहर के कई प्रमुख मोहल्लों की सड़कों पर भारी जलजमाव हो गया है, जिससे यातायात व्यवस्था चरमरा गई है और आम नागरिकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस तीव्र वर्षापात का सबसे चिंताजनक असर शहर के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले थानेश्वर स्थान मंदिर पर देखने को मिला है, जहां मंदिर के पवित्र गर्भगृह में ही बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन द्वारा प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, मात्र चार घंटों के भीतर समस्तीपुर में लगभग 50 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो कि एक कम अवधि में हुई अत्यधिक वर्षा का संकेत है।

गुरुवार सुबह से हो रही इस बेमौसम और तेज बारिश ने तापमान में भी काफी गिरावट ला दी है। पिछले कुछ दिनों से उमस और गर्मी से परेशान लोगों को तापमान में आई इस गिरावट से राहत तो मिली है, लेकिन साथ ही जलजमाव की समस्या ने नई मुसीबतें खड़ी कर दी हैं। शहर के निचले इलाकों और उन मोहल्लों में जहां जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त नहीं है, वहां सड़कें तालाब में तब्दील हो गई हैं। बारिश का पानी घरों और दुकानों में भी घुसने लगा है, जिससे व्यापारियों और स्थानीय निवासियों को अपने सामान को सुरक्षित रखने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। मुख्य मार्गों पर जमा पानी के कारण वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई है और कई जगहों पर ट्रैफिक जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई है। स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्रों तथा कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों को इस जलभराव के बीच आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

थानेश्वर स्थान मंदिर में पानी घुसने की घटना स्थानीय श्रद्धालुओं और पुजारियों के लिए विशेष चिंता का विषय बनी हुई है। यह मंदिर समस्तीपुर की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का प्रतीक है। गर्भगृह, जो मंदिर का सबसे पवित्र और मुख्य भाग होता है, वहां पानी पहुंचना न केवल पूजा-अर्चना में बाधा डालता है, बल्कि प्राचीन संरचना और प्रतिमाओं की सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा करता है। स्थानीय लोग और मंदिर प्रबंधन समिति ने प्रशासन से मांग की है कि मंदिर परिसर से पानी की निकासी के लिए तत्काल प्रभाव से पंपिंग व्यवस्था की जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए स्थायी समाधान निकाला जाए। मानसून और पूर्व-मानसून गतिविधियों के दौरान अक्सर देखा गया है कि अपर्याप्त जलनिकासी प्रणाली के कारण ऐसे ऐतिहासिक स्थलों को नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता है। वर्तमान स्थिति में, गर्भगृह से पानी निकालने और मंदिर की स्वच्छता बहाल करने के प्रयास जारी हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश इन कार्यों में बाधा बन रही है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र और पूर्वी हवाओं के सक्रिय होने के कारण बिहार के अधिकांश हिस्सों में, विशेषकर उत्तर और मध्य बिहार में, भारी वर्षा हो रही है। समस्तीपुर में चार घंटे में 50 मिमी बारिश इसी मौसमी सिस्टम का परिणाम है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें और जलजमाव वाली सड़कों पर चलने से बचें, क्योंकि खुले नाले और गड्ढे पानी में छिपे होने के कारण दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही, बिजली के खंभों और ट्रांसफॉर्मरों से दूर रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि बारिश के दौरान बिजली संबंधी हादसों की संभावना बनी रहती है।

जिला प्रशासन और नगर निगम की टीमें जलजमाव प्रभावित क्षेत्रों में तैनात की गई हैं। जल निकासी के लिए पंपों का उपयोग किया जा रहा है और रुके हुए नालों को साफ करने का कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। हालांकि, बारिश अभी भी जारी है, जिससे राहत कार्यों में चुनौतियां बनी हुई हैं। स्वास्थ्य विभाग को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे जलजनित बीमारियों के प्रकोप को रोकने के लिए आवश्यक एहतियाती कदम उठाएं, क्योंकि बारिश के बाद गंदे पानी के फैलने से संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ जाता है। थानेश्वर स्थान मंदिर की स्थिति पर विशेष नजर रखी जा रही है और संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है ताकि क्षति का आकलन किया जा सके और आवश्यक मरम्मत कार्य योजना बनाई जा सके।

समस्तीपुर की यह घटना बिहार में शहरी जलनिकासी बुनियादी ढांचे की कमजोरियों को एक बार फिर उजागर करती है। विकास के दावों के बावजूद, मामूली से अधिक बारिश होने पर शहर के प्रमुख मार्ग और धार्मिक स्थल जलमग्न हो जाते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर वर्ष बारिश के मौसम में उन्हें इसी तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकाला जा सका है। फिलहाल, मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में भी हल्की से मध्यम बारिश जारी रहने का अनुमान जताया है, जिससे जलजमाव की समस्या और बढ़ सकती है। प्रशासन और आम जनता दोनों को इस प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए सतर्कता और सहयोग बनाए रखने की आवश्यकता है।