समस्तीपुर: शिरडी साईं बाबा की प्रतिकृति पर बन रहा 100 फीट ऊंचा भव्य दुर्गा पूजा पंडाल, मिथिला पद्धति से होगी माता की अराधना

बिहार के समस्तीपुर जिले में इस वर्ष दुर्गा पूजा की तैयारियां अपने चरम पर हैं। जिले के बारह पत्थर इलाके में एक ऐसा भव्य और विशालकाय पूजा पंडाल का निर्माण किया जा रहा है, जिसने पूरे क्षेत्र में आस्था और कला प्रेमियों के बीच भारी उत्साह पैदा कर दिया है। यह पंडाल महाराष्ट्र के प्रसिद्ध तीर्थस्थल शिरडी साईं बाबा मंदिर की हुबहू प्रतिकृति के रूप में तैयार किया जा रहा है। इस पंडाल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी ऊंचाई है, जो लगभग 100 फीट ऊंची बनाई जा रही है। इस अद्वितीय संरचना को देखकर लोगों की आंखें खुली रह जाती हैं और यह पंडाल इस वर्ष समस्तीपुर ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों के लिए भी आकर्षण का मुख्य केंद्र बन गया है।
बारह पत्थर स्थित इस दुर्गा पूजा समिति द्वारा आयोजित किए जा रहे इस भव्य कार्यक्रम की तैयारियां पिछले एक महीने से लगातार जारी हैं। जानकारी के अनुसार, इस विशाल पंडाल के निर्माण कार्य में दिन-रात कुल 15 अनुभवी और कुशल कलाकार जुटे हुए हैं। ये सभी कलाकार सुबह से देर रात तक बिना थके काम कर रहे हैं, ताकि पंडाल का निर्माण समय से पहले पूरी तरह से संपन्न हो सके। पंडाल की संरचना इतनी बड़ी और जटिल है कि इसके निर्माण में भारी मात्रा में बांस, कपड़े, लकड़ी, प्लास्टर ऑफ पेरिस और अन्य सजावटी सामग्रियों का उपयोग किया जा रहा है। इन 15 कलाकारों की मेहनत और उनके कौशल का परिणाम अब धीरे-धीरे लोगों के सामने आने लगा है, क्योंकि 100 फीट ऊंचे शिरडी साईं बाबा मंदिर का ढांचा दूर से ही स्पष्ट दिखाई देने लगा है।
पूजा समिति के सदस्यों ने बताया कि उनका लक्ष्य नवरात्रि की षष्ठी तिथि तक पंडाल का संपूर्ण निर्माण कार्य पूरी तरह से पूर्ण कर लेना है। षष्ठी के दिन से ही मां दुर्गा की विधिवत पूजा-अर्चना शुरू होती है, इसलिए समिति चाहती है कि उससे पहले पंडाल की हर एक बारीकी, रंगाई-पुताई और सजावट का काम अंतिम रूप ले चुका हो। समिति के अनुसार, वे अपनी इस समय सीमा पर पूरी तरह से खरे उतरने के लिए प्रतिबद्ध हैं और कलाकारों की टीम भी इसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर अपनी गति तेज किए हुए है।
इस पूजा आयोजन की एक और बेहद खास और अनोखी बात यह है कि यहां मां दुर्गा की आराधना मिथिला पद्धति से की जाती है। बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र की अपनी एक समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत रही है। मिथिला पद्धति से पूजा करने का अर्थ है कि यहां माता की स्थापना, मंत्रोच्चारण, विधि-विधान और अनुष्ठान उस प्राचीन एवं पारंपरिक तरीके से किए जाते हैं, जो मिथिला क्षेत्र में सदियों से चले आ रहे हैं। यह पद्धति वैदिक मंत्रों, शुद्धता और कर्मकांड की अत्यंत बारीकियों पर आधारित होती है। बारह पत्थर में इस मिथिला परंपरा का निर्वाह करना न केवल स्थानीय संस्कृति को जीवित रखने का एक सशक्त माध्यम है, बल्कि यह श्रद्धालुओं को एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभव भी प्रदान करता है।
पंडाल का थीम शिरडी साईं बाबा मंदिर को चुना जाना भी अपने आप में एक गहरा संदेश देता है। शिरडी साईं बाबा को सर्वधर्म समभाव, शांति और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। एक हिंदू त्योहार दुर्गा पूजा के अवसर पर साईं बाबा के मंदिर की प्रतिकृति बनाना समाज में आपसी सद्भाव, एकता और धार्मिक सहिष्णुता का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। 100 फीट की ऊंचाई वाला यह पंडाल जब रोशनी से जगमगाएगा, तो यह दृश्य निश्चित रूप से अविस्मरणीय होगा।
समस्तीपुर जिले में दुर्गा पूजा का अपना एक विशेष महत्व है और हर वर्ष यहां कई पूजा समितियां अपनी-अपनी थीम और भव्यता के लिए जानी जाती हैं। हालांकि, इस बार बारह पत्थर की इस समिति ने 100 फीट ऊंचे पंडाल और मिथिला पद्धति की पूजा के दोहरे आकर्षण के साथ एक नया मानक स्थापित करने का प्रयास किया है। स्थानीय निवासियों में इस पंडाल को लेकर भारी उत्सुकता देखी जा रही है। लोग दूर-दूर से इस निर्माणाधीन पंडाल को देखने के लिए आ रहे हैं और कलाकारों की दिन-रात की मेहनत की सराहना कर रहे हैं।
पूजा समिति ने सभी श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे निर्माण कार्य में किसी प्रकार की बाधा न डालें और सुरक्षा नियमों का पालन करें। षष्ठी के दिन जब पंडाल का उद्घाटन होगा और मां दुर्गा की प्रतिमा की स्थापना मिथिला पद्धति के अनुसार विधिवत की जाएगी, तब यह स्थान पूरी तरह से भक्तिमय वातावरण में डूब जाएगा। समिति को पूर्ण विश्वास है कि 15 कलाकारों की एक महीने की अथक मेहनत और शिरडी साईं बाबा के इस 100 फीट ऊंचे भव्य पंडाल की संरचना इस वर्ष समस्तीपुर की दुर्गा पूजा के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज की जाएगी।

