Fri, 09 Oct 202611:43 AM
Fri, Oct 9, 2026Updated 11:43 AM IST
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सतना: वाहन बीमा क्लेम खारिज करना ओरिएंटल इंश्योरेंस को पड़ा महंगा, उपभोक्ता आयोग ने 5.12 लाख रुपये हर्जाना देने का दिया आदेश

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मध्य प्रदेश के सतना जिले में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा कंपनी द्वारा वाहन दुर्घटना के बाद क्लेम खारिज करने के मामले में एक महत्वपूर्ण और ग्राहक-हितैषी फैसला सुनाया है। आयोग ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी की इस कार्रवाई को स्पष्ट रूप से सेवा में कमी मानते हुए कंपनी के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। पीड़ित उपभोक्ता राजेश कुमार सोनी की शिकायत पर सुनवाई करते हुए आयोग ने बीमा कंपनी को कुल 5 लाख 12 हजार 952 रुपये बतौर मुआवजा देने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, आयोग ने यह भी आदेश दिया है कि कंपनी को इस राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज का भुगतान भी करना होगा, साथ ही मुकदमे का खर्च भी वहन करना होगा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला सतना जिले का है, जहां के निवासी राजेश कुमार सोनी ने अपने वाहन का बीमा ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से करवाया हुआ था। बीमा पॉलिसी की वैधता अवधि के दौरान उनके वाहन का एक दुर्घटनाग्रस्त होना बताया गया है। वाहन दुर्घटना के तुरंत बाद नियमानुसार उपभोक्ता ने अपनी बीमा कंपनी को इसकी सूचना दी और क्षतिपूर्ति के लिए क्लेम प्रक्रिया शुरू की। हालांकि, कंपनी ने संबंधित दस्तावेजों और वाहन की जांच के बाद उपभोक्ता का बीमा क्लेम खारिज कर दिया। कंपनी द्वारा क्लेम रद्द किए जाने के कारणों की पूरी विस्तृत जानकारी स्रोत सामग्री में उपलब्ध नहीं है, लेकिन उपभोक्ता ने कंपनी के इस फैसले को अनुचित और मनमाना मानते हुए न्याय के लिए जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का दरवाजा खटखटाया।

उपभोक्ता राजेश कुमार सोनी ने आयोग के समक्ष अपनी याचिका दायर करते हुए यह आरोप लगाया कि उन्होंने समय पर बीमा प्रीमियम का भुगतान किया था और सभी नियमों का पालन किया था, इसके बावजूद कंपनी ने बिना किसी ठोस और उचित कारण के उनका वैध क्लेम खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता ने आयोग से गुहार लगाई कि कंपनी के इस रवैये से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा है। इसलिए कंपनी को सेवा में कमी का दोषी ठहराते हुए उचित मुआवजा दिलवाया जाए।

दोनों पक्षों की दलीलों और प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों का गहन अध्ययन करने के बाद सतना जिला उपभोक्ता आयोग ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब आयोग ने इस मामले में अपना अंतिम आदेश जारी कर दिया है। आयोग ने अपने निर्णय में स्पष्ट रूप से कहा है कि ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी द्वारा उपभोक्ता का क्लेम खारिज करना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत ‘सेवा में कमी’ की श्रेणी में आता है। आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में विफल रही है और उसने उपभोक्ता के साथ अनुचित व्यवहार किया है।

इसी आधार पर आयोग ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया है कि वह पीड़ित उपभोक्ता राजेश कुमार सोनी को 5 लाख 12 हजार 952 रुपये हर्जाने के रूप में अदा करे। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह राशि कंपनी को एक निर्धारित समय सीमा के भीतर देनी होगी। यदि कंपनी इस अवधि के भीतर भुगतान करने में असमर्थ रहती है या देरी करती है, तो उसे मूल राशि के साथ 9 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज भी चुकाना होगा। यह ब्याज तब तक लागू रहेगा जब तक कि पूरी राशि का भुगतान उपभोक्ता को नहीं कर दिया जाता।

मुआवजे और ब्याज के अलावा, उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी पर मुकदमे का खर्च भी थोपा है। यानी उपभोक्ता को न्याय पाने के लिए जो कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी, उसमें हुए व्यय की भरपाई भी कंपनी को करनी होगी। यह प्रावधान इसलिए किया गया है ताकि उपभोक्ताओं को न्याय मांगने की प्रक्रिया में खुद की जेब से अतिरिक्त बोझ न उठाना पड़े और कंपनियां भी मनमाने ढंग से क्लेम खारिज करने से पहले कई बार सोचें।

उपभोक्ता अधिकार विशेषज्ञों और कानूनी जानकारों का मानना है कि सतना जिला उपभोक्ता आयोग का यह फैसला बीमा क्षेत्र में ग्राहकों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक मजबूत कदम है। अक्सर देखा जाता है कि बीमा कंपनियां प्रीमियम लेने में कोई देरी नहीं करतीं, लेकिन जब दावा (क्लेम) चुकाने की बारी आती है, तो वे तरह-तरह के तकनीकी बहाने बनाकर उपभोक्ताओं के क्लेम खारिज कर देती हैं या भुगतान में अनावश्यक देरी करती हैं। ऐसे में आम उपभोक्ता खुद को ठगा हुआ महसूस करता है और उसके पास लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।

आयोग के इस आदेश से यह संदेश साफ होता है कि यदि कोई उपभोक्ता बीमा कंपनी की सेवाओं से संतुष्ट नहीं है या उसे लगता है कि उसका क्लेम अन्यायपूर्ण तरीके से खारिज किया गया है, तो उसे उपभोक्ता फोरम का रुख करने से नहीं हिचकिचाया चाहिए। कानून उपभोक्ताओं के पक्ष में है और सेवा में कमी पाए जाने पर कंपनियों को भारी जुर्माना और मुआवजा देना पड़ सकता है।

हालांकि, यह ध्यान रखना भी आवश्यक है कि आयोग के इस आदेश के खिलाफ ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी के पास राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में अपील करने का कानूनी अधिकार सुरक्षित है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कंपनी इस आदेश को स्वीकार करती है या इसे उच्च न्यायिक मंच पर चुनौती देगी। स्रोत सामग्री में कंपनी की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या बयान दर्ज नहीं किया गया है। फिलहाल, सतना जिला उपभोक्ता आयोग का यह फैसला अन्य उपभोक्ताओं के लिए एक मिसाल कायम करता है और बीमा कंपनियों को उनकी जिम्मेदारियों की याद दिलाता है।