संडे जज्बात- ‘साथ नहीं नाचूंगी’ कहते ही रिवॉल्वर तानकर नचाया:एक ने कमर में हाथ डालकर पूछा- कितना लोगी? डांसर हूं, शरीर बेचने वाली नहीं

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मैं अंजली चौधरी। पंजाब के लुधियाना की उस गली में रहती हूं, जहां से कई मशहूर कलाकार निकले हैं। बचपन में जब उन कलाकारों के किस्से सुनती थी, तो लगता था- स्टेज यानी मंच की जिंदगी कितनी अच्छी होती होगी। तेज म्यूजिक होती है। लोगों की तालियां बजती हैं, नाम होता है… और अच्छे पैसे भी मिलते हैं। तब नहीं जानती थी कि स्टेज की चमक के पीछे कितनी बेइज्जती छिपी है। एक लाइन में कहूं तो पंजाब में स्टेज डांसर की जिंदगी बर्बादी और दलदल में होती है, जहां बस धंसते जाना होता है। शुरू में सिर्फ पैसा दिखता है, आगे दलदल नजर नहीं आती। मैंने शौक में डांस शुरू किया, लेकिन अब दो बच्चों को पालने की मजबूरी में डांस करती हूं। छोटी जाति से हूं, इसलिए मेरे पास और कुछ करने का रास्ता नहीं है। 15 साल की थी। उन दिनों एक गाना जगह-जगह बजता सुनई देता था- ‘मेरे हाथों में नौ-नौ चूड़ियां हैं, जरा ठहरो सजन मजबूरियां हैं…’ वह गाना मेरे लिए जुनून बन गया। घर का काम करते हुए भी वही गाना चलाती। टीवी पर वह गाना दिखता सब छोड़कर नाचने लगती। घर वालों को यह बिल्कुल पसंद नहीं था। वे डांटते थे। कहते- ये क्या हर वक्त नाचती रहती हो, पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान दो, लेकिन जब वो गाना बजता तो रुक नहीं पाती थी। एक दिन घर पर कोई नहीं था। वह गाना टीवी पर आया। वॉल्यूम तेज किया और कमरे में नाचने लगी। मम्मी-पापा बाहर से लौटे। काफी देर तक दरवाजा खटखटाते रहे, लेकिन मुझे कुछ सुनाई नहीं दिया। फिर पापा ने दरवाजे पर जोर से लात मारी। मैं घबरा गई और दौड़कर दरवाजा खोला। घर में गाने की आवाज सुनकर पापा को बहुत गुस्सा आया। फिर उनके हाथ में जो कुछ आया, उससे मुझे पीटा। दो दिन तक रोती रही। सोचा अब कभी डांस नहीं करूंगी। लेकिन अब मम्मी-पापा के सामने नहीं नाचती थी। इंतजार करती कि वे कब बाहर जाएंगे। जैसे ही वे बाहर जाते, वही गाना चलाकर नाचना शुरू कर देती। इसी दौरान मेरी एक दोस्त अमृतसर में रहती थी। वह स्टेज डांसर थी। मैंने उसे फोन किया और कहा- डांस किए बिना रह नहीं पा रही हूं। घर वाले बहुत रोकते हैं। उसने कहा- अगर इतना ही मन है, तो अमृतसर आ जा। तब मैं 17 साल की हो चुकी थी। एक दिन मम्मी-पापा घर पर नहीं थे। जल्दी-जल्दी दो जोड़ी कपड़े सूटकेस में डाले। पास में सिर्फ 500 रुपए थे। बिना किसी को बताए घर से निकली और अमृतसर पहुंच गई। जब पापा को पता चला तो बहुत नाराज हुए। उनका साफ कहना था- ये काम ठीक नहीं है, वापस आ जाओ। मम्मी भी गुस्से में थीं। उस वक्त लगा कि अपना सपना पूरा करने निकली हूं। नहीं पता था कि असली मुश्किलें अब शुरू होने वाली हैं। अमृतसर पहुंचने के तीसरे दिन ही मेरा पहला शो था। मुझे पंजाबी गानों पर परफॉर्म करना था। स्टेज पर जाने से डर लग रहा था। समझ नहीं आ रहा था कि इतने लोगों के सामने कैसे नाचूंगी। लेकिन जैसे ही म्यूजिक बजा और मैं स्टेज पर पहुंची, लोगों की तालियां बजीं। घबराहट दूर होती चली गई। परफॉर्मेंस खत्म हुई तो आयोजक बहुत खुश थे। लोग भी तारीफ कर रहे थे। उस रात मुझे पहली बार 3,000 रुपए मिले। उन पैसों को बार-बार देख रही थी। यकीन ही नहीं हो रहा था कि डांस करके इतने पैसे भी कमाए जा सकते हैं। लगा कि शायद सही रास्ता चुन लिया है। पांच दिन बाद मेरा दूसरा शो था। स्टेज पर डांस करने गई थी, तो सामने खड़ा एक आदमी लगातार गंदे इशारे कर रहा था। डबल मीनिंग बातें कर रहा था। बार-बार उससे नजरें हटा रही थी, लेकिन वह नहीं मान रहा था। उसके इशारों से परेशान हो गई। डांस बंद किया और स्टेज के पीछे चली गई। वहां पहुंचते ही रोने लगी। मेरे मैनेजर और बाकी लोग समझाने लगे- ये सब नॉर्मल है, स्टेज पर ये सब चलता है। मुझे उनकी बात पर गुस्सा आया। बोली- नॉर्मल कैसे है? हम डांस करते हैं तो क्या हमारी कोई इज्जत नहीं है? यहां शरीर बेचने नहीं आई हूं। उन्होंने मुझे वापस स्टेज पर भेजने की बहुत कोशिश की, लेकिन नहीं गई। मेरे साथ ऐसा पहली बार हुआ था। नहीं पता था कि स्टेज पर खड़ी लड़की को लोग इतनी आसानी से गलत समझ लेते हैं। उस रात मां को फोन किया और रोते हुए कहा- मुझे यहां से ले चलो। मम्मी-पापा सुबह ही अमृतसर पहुंचे और मुझे वापस लुधियाना लेकर आ गए। करीब दो महीने तक लुधियाना में घर पर रही। पापा ने मुझसे बात करना बंद कर दिया था। आज भी नहीं करते। मम्मी अक्सर कहतीं- समझाया था न कि बाहर की दुनिया बहुत खराब है। चुपचाप उनकी बातें सुनती रहती। एक दिन मम्मी के साथ एक शादी में गई। वहां कुछ लड़कियां स्टेज पर डांस कर रही थीं। उन्हें देखकर मेरे अंदर दबा हुआ शौक फिर जाग गया। बार-बार स्टेज पर जाने का मन कर रहा था। अगले दिन मम्मी से साफ कह दिया- मुझे फिर से डांस करना है। इस बार उन्होंने नहीं रोका। बस इतना कहा- अगर डांस ही करना है, तो अपनी जिम्मेदारी भी खुद उठाना। वापस लौटकर मत आना। अगले दिन तैयार हुई और वापस अमृतसर अपनी दोस्त के पास पहुंच गई। अब मैं पहले जैसी नहीं रह गई थी। दिन में रिहर्सल, रात में शादियां, तेज म्यूजिक, मेकअप और लगातार शो। यही अपनी दुनिया बना ली। एक रात का डरावना किस्सा बताती हूं। तब मुझे स्टेज पर डांस करते सिर्फ एक साल हुआ था। अमृतसर में एक शादी में परफॉर्म करने गई थी। मेरे साथ एक और डांसर भी थी। डांस शुरू हुआ। तभी नशे में धुत एक लड़का स्टेज पर चढ़ आया। उसने मेरी साथी का हाथ पकड़ लिया और कहा- मेरे साथ नाचो। उसने तुरंत हाथ छुड़ाया और उसके साथ नाचने से मना कर दिया। वह भड़क गया। उसने जेब से रिवॉल्वर निकाली और सीधा उसके माथे पर तान दिया। जोर से चिल्लाया- अगर तू मेरे साथ नहीं नाची, तो यहीं गोली मार दूंगा। उसके बाद हमारी तो हालत खराब हो गई। वहां मौजूद लोग उसे शांत कराने में जुटे थे। मेरी साथी रोते हुए मैनेजर से कह रही थी- मुझे यहां से ले चलो, लेकिन उन्होंने कहा- थोड़ी देर की बात है, नाच लो… मामला शांत हो जाएगा। आखिर में अपनी जान बचाने के लिए मेरी साथी ने उस लड़के के साथ डांस किया। तब जाकर मामला शांत हुआ। लेकिन उस रात मेरे अंदर कुछ हमेशा के लिए बदल गया। मुझे समझ आ गया कि स्टेज पर नाचने वाली लड़कियों को लोग कलाकार नहीं समझते। उन्हें लगता है कि पैसे दिए हैं, तो हमारे साथ कुछ भी कर सकते हैं। ऐसे ही मैं एक शादी में अकेले गई थी। स्टेज पर डांस कर रही थी, तभी कुछ लोग अचानक स्टेज पर चढ़े। पहले तो उन्होंने साथ में नाचने की कोशिश की, फिर मेरा हाथ पकड़ने लगे। कोई मेरे कंधे पर हाथ रख रहा था, तो कोई कमर पर हाथ डाल रहा था। मैं घबरा गई। डांस रोक दिया और साफ बोली- पहले इन्हें नीचे उतारिए, तभी परफॉर्म करूंगी। काफी कहने के बाद उन लोगों को स्टेज से नीचे उतारा गया, तब शो आगे बढ़ पाया। ऐसी बदतमीजियां बार-बार होने लगीं। लोग स्टेज पर चढ़ जाते, जबर्दस्ती करते। यही नहीं, शो खत्म होने पर लोग स्टेज के पीछे आ जाते और मेरा फोन नंबर मांगते। मना करने पर गाली देते, धमकाते। ऐसे ही एक कार्यक्रम में डांस कर रही थी। कुछ लड़के नीचे नाच रहे थे और कुछ स्टेज पर चढ़ गए थे। किसी तरह परफॉर्मेंस खत्म करके स्टेज के पीछे गई, तो उनमें से एक लड़का पीछे-पीछे आ गया। वह लगातार मेरा फोन नंबर मांग रहा था। काफी देर तक कोशिश करता रहा। जब मैंने नंबर नहीं दिया, तो उसने मुझे थप्पड़ मार दिया। उस दिन काफी बवाल हुआ था। कई बार तो लोग सीधे पूछ लेते हैं- मैडम, एक रात का कितना लेती हो? साथ चलोगी? मैं सन्न रह जाती हूं। ऐसे ही एक और शो में डांस करने गई थी। शो खत्म हुआ तो एक लड़का स्टेज के पीछे आया। बातों ही बातों में उसने मेरे ब्लाउज में हाथ डाल दिया। उस दिन मैंने गुस्से में उसका कॉलर पकड़ लिया था यह सब इतना ज्यादा हो रहा था कि मन हुआ कि डांस छोड़ दूं, लेकिन वापस जाने का कोई रास्ता नहीं था। पापा बात नहीं करते थे। मम्मी ने भी फोन करना बंद कर दिया था। काफी परेशान थी। इस बीच मेरी मुलाकात एक भांगड़ा डांसर से हुई। वह मुझसे 10 साल बड़ा था। उसने शादी के लिए प्रपोज किया, लेकिन मैंने साफ मना कर दिया। वह पीछे पड़ गया। अक्सर फोन करके मिन्नतें करता। कहता- तुम्हें बहुत पसंद करता हूं। कभी धोखा नहीं दूंगा। तुम्हारे साथ रहना चाहता हूं। उस समय मेरी जिंदगी ऐसी हो गई थी कि हर तरफ से घिरी नजर आ रही थी। स्टेज पर बेइज्जती झेल रही थी, घर वालों से दूरी थी और भविष्य को लेकर चिंता में थी। ऐसे में पहली बार लगा कि शायद कोई इंसान है, जो मुझे सिर्फ डांसर नहीं समझता। मेरी इज्जत करता है। खाली रहती तो उससे बात होती। एक दिन घर पर थी। मन हुआ कि उसे फोन करके शादी के लिए हां कह दूं। उस दिन सबसे पहले मम्मी को फोन किया। सारी बात बताई। उन्होंने तुरंत कहा- वह आदमी तुमसे 10 साल बड़ा है। तुम्हें बर्बाद कर देगा। उससे दूर हो जाओ। मम्मी से बात करने के बाद मैंने उसे फोन किया और शादी करने से मना कर दिया। उस दिन उसका एक बार भी दोबारा फोन नहीं आया। रात हुई। अब मेरा मन हुआ कि उससे एक बार बात करूं। मैंने रात में उसे फोन किया। वह फिर शादी करने की गुजारिश करने लगा। आखिर में मैंने हां कह दी। मम्मी को भी फोन करके बताया। मम्मी ने फिर रोका, लेकिन मैं नहीं मानी। सोच रही थी कि शादी के बाद मेरी जिंदगी शायद थोड़ी स्थिर हो जाएगी। शादी हुई। हम किराए के एक फ्लैट में रहने लगे। शुरुआत में करीब तीन महीने सब ठीक रहा। अचानक उसका व्यवहार बदलने लगा। वह मुझ पर शक करता, छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा करने लगा और मारपीट भी करने लगा। वह फ्लैट पर अपने दोस्तों को बुलाता और उनके साथ पार्टियां करता। फ्लैट पर उसके दोस्त लड़कियां लेकर आते। मुझे बहुत बुरा लगता था। एक दिन अपनी सास को फोन किया और सारी बात बताई। उन्होंने पति को फोन करके तुरंत गांव वापस आने को कहा। उसके बाद हम गांव में रहने लगे। मुझे लगा था कि शायद अब जिंदगी थोड़ी शांत हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मैं गर्भवती हो गई। पति भांगड़ा डांस के लिए अक्सर घर से बाहर रहते थे, लेकिन एक पैसा भी नहीं देते थे। उधर, मेरे जेठ शुरू से नहीं चाहते थे कि मैं उस घर में रहूं। एक दिन किसी बात पर उनका गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने मुझे पीटना शुरू कर दिया। वह बार-बार यही कह रहे थे- ये नाचने वाली है, इसे हम अपने घर की बहू नहीं बना सकते। मेरी सास ने बीच-बचाव किया, तब मामला शांत हुआ। एक दिन तो हद हो गई। उस वक्त आठ महीने की गर्भवती हो चुकी थी। घर में मेरी सास, जेठ और घर के बाकी लोग आपस में धीमी आवाज में बातें कर रहे थे। मैं पास ही खड़ी थी। सास को कहते सुना- अभी इसे मत मारो-पीटो। बच्चा हो जाएगा, उसे अपने पास रख लेंगे… फिर इसे घर से निकाल देंगे। सुनकर मैं सन्न रह गई। सोचा अगर यहां रुकी, तो अपने बच्चे से भी हाथ धो बैठूंगी। चुपचाप अपना सामान पैक किया और घर से निकल गई। एक बस में बैठ चुकी थी, लेकिन ससुराल वाले पीछे-पीछे पहुंच गए। वे बस में चढ़े और ड्राइवर को धमकाने लगे कि- अगर तूने बस चलाई तो आग लगा देंगे। आखिरकार मुझे बस से उतरना पड़ा। करीब एक महीने बाद मेरे बेटे का जन्म हुआ। पैसे की बहुत किल्लत थी। पति जो भी कमा रहे थे, सिर्फ अपने ऊपर उड़ा रहे थे। मां को फोन करके मदद मांगी, तो उन्होंने मदद करने से इनकार कर दिया। कुछ समझ में नहीं आ रहा था। मैंने बच्चे की देखभाल के लिए एक पार्लर में नौकरी की। वहां दो साल काम किया और बच्चे को बड़ा किया। इस दौरान फिर गर्भवती हुई। सोचने लगी कि एक बच्चे का खर्च उठा नहीं पा रही हूं। दूसरे बच्चे को कैसे पालूंगी। इसी डर में अकेले ही डॉक्टर के पास अबॉर्शन कराने पहुंच गई। डॉक्टर ने जांच के बाद कहा- गर्भ तीन महीने से ज्यादा का हो चुका है, अब अबॉर्शन नहीं हो सकता। उस दिन वापस घर लौट आई। पति को सारी बात बताई और उनसे पैसों का इंतजाम करने को कहा। वह कहते- कहां से लाऊं पैसा? चोरी करूं या डाका डालूं? एक दिन पैसों को लेकर उनसे झगड़ा इतना बढ़ा कि उन्होंने मुझ पर चाकू से वार कर दिया। शिकायत के बाद घर पर पुलिस पहुंची। मैंने पुलिस को सारी बात बताई और अपने मायके पहुंचाने को कहा। पुलिस तुरंत मुझे लुधियाना मेरे मायके लेकर आ गई। घर पहुंची तो मेरी हालत देखकर मम्मी को दया आ गई। उन्होंने मुझे अपने साथ रख लिया। हालांकि, सालभर ही उनके पास रही। खर्च चल नहीं रहा था। एक किराए का कमरा लिया और फिर से स्टेज पर डांस शुरू कर दिया। अब डांस की कमाई से बच्चों को पाल रही हूं। पति आज भी बीच-बीच में झगड़ा करने आ जाता है। कई बार मारपीट करता है। कहता है कि बच्चों को अपने साथ लेकर जाएगा, लेकिन मैं अपने बच्चों से किसी भी कीमत पर अलग नहीं रह सकती। इन्हें अच्छे स्कूल में पढ़ा रही हूं। चाहती हूं कि इनके साथ वैसा कुछ न हो, जैसा मेरी जिंदगी में हुआ। आज जब पीछे मुड़कर देखती हूं, तो लगता है स्टेज की चमक सिर्फ बाहर से खूबसूरत दिखती है। तेज म्यूजिक, रंग-बिरंगी लाइटें, लोगों की तालियां और उड़ते हुए नोट- सब कुछ कुछ देर के लिए बहुत अच्छा लगता है। लेकिन म्यूजिक बंद होते ही वही लोग चले जाते हैं, और हम अपनी जिंदगी की लड़ाई फिर अकेले लड़ते रह जाते हैं। शायद पंजाब की मेरी जैसी कई डांसरों की कहानी भी इससे बहुत अलग नहीं है। (अंजली ने अपने ये जज्बात भास्कर रिपोर्टर मनीषा भल्ला से साझा किए) —————————————- 1- संडे जज्बात-हम अधेड़ कुंवारे कौवों जैसे अपशकुन माने जाते हैं:सरकार हमें देती है पेंशन, जाने कितने जानवरों से रेप करते पकड़े गए लोग मुझे मेरे नाम से कम, रं@#% कहकर ज्यादा बुलाते हैं। मुझे शुभ कामों से दूर रखा जाता है। गलती से पहुंच जाऊं तो लोगों का चेहरा उतर जाता है। मैं वीरेंद्र दून। हरियाणा के जिला हांसी के गांव पेटवाड़ का रहने वाला हूं। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- संडे जज्बात-मैंने 20 अपनों को गोली मारी:अपनों पर गोली चलाना आसान नहीं था, लेकिन बम-धमाके में साथियों की मौत ने मुझे झकझोर दिया था मैं शरतचंद्र बुरुदा हूं, ओडिशा के मलकानगिरी जिले के सरपल्ली गांव का रहने वाला। एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी हूं। 1990 के दशक के आखिर में जब मैंने पुलिस की नौकरी जॉइन की, तब ओडिशा के दंडकारण्य इलाके में नक्सलवाद अपने चरम पर था। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें



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