सुपौल: करंट से युवक की मौत की जांच में खुला बड़ा राज, धान के खेत से 240 किलो गांजा बरामद, कीमत 96 लाख रुपये

बिहार के सुपौल जिले में पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। भपटियाही थाना क्षेत्र के गढ़िया पलार इलाके में करंट लगने से हुई एक युवक की मौत की जांच के दौरान पुलिस ने भारी मात्रा में गांजे की खेप बरामद की है। मृत्यु समीक्षा के दौरान मिली गुप्त सूचना के आधार पर सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और भपटियाही थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने कोसी नदी के पलार इलाके में स्थित धान के खेत में छापेमारी की। इस कार्रवाई में पुलिस ने कुल 240.09 किलोग्राम गांजा जब्त किया है। बरामद किए गए इस मादक पदार्थ को आठ बोरों में पैक किया गया था। अनुमान लगाया जा रहा है कि बाजार में इस जब्त गांजे की कीमत लगभग 96 लाख रुपये है।
यह पूरी कार्रवाई उस समय शुरू हुई, जब भपटियाही थाना क्षेत्र के गढ़िया पलार में करंट लगने से एक युवक की मौत हो गई थी। इस दुर्घटनात्मक मौत के बाद पुलिस ने नियमानुसार मृत्यु समीक्षा की प्रक्रिया शुरू की। इसी समीक्षा के दौरान पुलिस को कुछ अहम गुप्त सूचनाएं प्राप्त हुईं। इन सूचनाओं से यह संकेत मिला कि जिस इलाके में घटना हुई है, उसके आसपास अवैध रूप से गांजे की बड़ी खेप छिपाकर रखी गई है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत कार्रवाई का निर्णय लिया। चूंकि मामला सीमावर्ती क्षेत्र से जुड़ा था और खेप काफी बड़ी थी, इसलिए भपटियाही थाना पुलिस ने सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के साथ मिलकर एक संयुक्त टीम का गठन किया।
संयुक्त टीम ने सूचना के आधार पर कोसी नदी के पलार इलाके में पहुंचकर धान के खेतों की बारीकी से तलाशी अभियान चलाया। कोसी नदी का यह इलाका काफी दूरदराज और दुर्गम माना जाता है, जहां अपराधी अक्सर अवैध सामान छिपाने के लिए खेतों या नदी के किनारों का इस्तेमाल करते हैं। पुलिस और एसएसबी के जवानों ने जब धान के खेत में छापेमारी की, तो उन्हें वहां आठ बड़े-बड़े बोरे रखे हुए मिले। जब इन बोरों की जांच की गई, तो वे पूरी तरह से गांजे से भरे हुए थे। बरामद गांजे का कुल वजन 240.09 किलोग्राम पाया गया।
पुलिस के अनुसार, धान के खेत में इस तरह भारी मात्रा में गांजा छिपाकर रखना यह दर्शाता है कि यह किसी संगठित तस्करी गिरोह का काम है। 240.09 किलोग्राम गांजे की बाजार में अनुमानित कीमत 96 लाख रुपये बताई जा रही है। इतनी बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ की बरामदगी से यह स्पष्ट होता है कि तस्कर इसे अन्य राज्यों या जिलों में खपाने की योजना बना रहे थे। धान की फसल के बीच बोरों को छिपाकर रखने का तरीका इसलिए अपनाया गया था ताकि ऊपर से देखने पर किसी को शक न हो और पुलिस या सुरक्षाबलों की नजर से यह खेप बची रहे। हालांकि, युवक की मौत की जांच के दौरान मिली सूचना ने तस्करों की इस चाल को नाकाम कर दिया।
इस कार्रवाई में एसएसबी और भपटियाही थाना पुलिस की संयुक्त टीम की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। सीमावर्ती क्षेत्रों में नशीले पदार्थों की तस्करी एक बड़ी चुनौती होती है, ऐसे में एसएसबी और स्थानीय पुलिस का समन्वय इस प्रकार की बड़ी बरामदगी में मददगार साबित होता है। पुलिस ने बरामद किए गए सभी आठ बोरों को अपने कब्जे में ले लिया है और उन्हें थाने पहुंचाया गया है।
फिलहाल, पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि यह गांजा कहां से लाया गया था और इसे किन लोगों द्वारा किस गंतव्य तक पहुंचाया जाना था। करंट लगने से हुई युवक की मौत और इस गांजे की खेप के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं, यह भी जांच का विषय है। पुलिस इस मामले में तस्करों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी तेज कर सकती है। सूत्रों के अनुसार, जिन लोगों ने मृत्यु समीक्षा के दौरान पुलिस को यह गुप्त सूचना दी, उनकी जानकारी को गोपनीय रखा जा रहा है।
बिहार में नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ पुलिस लगातार अभियान चला रही है। सुपौल जिला नेपाल सीमा से सटा होने के कारण यहां तस्करी के मार्ग सक्रिय रहते हैं। कोसी नदी का पलार क्षेत्र और इसके आसपास के धान के खेत अक्सर तस्करों द्वारा सामान छिपाने के लिए उपयोग किए जाने की आशंका रहती है। 96 लाख रुपये मूल्य के इस गांजे की बरामदगी से तस्करों के नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।
भपटियाही थाना पुलिस ने इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जब्त किए गए 240.09 किलोग्राम गांजे को न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा और नियमानुसार उसे नष्ट करने की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए एसएसबी के साथ मिलकर संयुक्त गश्ती और छापेमारी अभियान आगे भी जारी रखा जाएगा, ताकि ऐसे अपराधियों पर कड़ी नकेल कसी जा सके।

