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Tue, Oct 13, 2026Updated 9:39 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने विपक्षी नेताओं की याचिका में गिनाईं 14 खामियां, कोर्ट फीस कम और खड़गे का आईडी कार्ड धुंधला पाया गया

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नई दिल्ली। वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में बड़े पैमाने पर नाम हटाने और गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर विपक्षी नेताओं द्वारा दायर की गई याचिका में सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने कई खामियां पाई हैं। रजिस्ट्री की ओर से इस याचिका में कुल 14 खामियां बताई गई हैं, जिनमें कोर्ट फीस 220 रुपये कम दिए जाने और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का आईडी कार्ड धुंधला होने जैसी बातें शामिल हैं। इन खामियों के सामने आने के बाद याचिका पर आगे की सुनवाई को लेकर प्रक्रियागत अड़चनें पैदा हो गई हैं।

विपक्षी नेताओं की ओर से यह याचिका वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के मुद्दे पर दायर की गई थी। इस याचिका में देश के प्रमुख विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं को शामिल किया गया था। जानकारी के अनुसार, राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव समेत कुल 11 विपक्षी नेताओं की तरफ से यह याचिका सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई थी। इन सभी नेताओं ने चुनाव आयोग की इस विशेष प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की थी।

हालांकि, जब यह याचिका सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री के पास जांच और प्रक्रियागत औपचारिकताओं के लिए पहुंची, तो रजिस्ट्री ने इसमें 10 से अधिक, यानी कुल 14 खामियां पाईं। रजिस्ट्री द्वारा बताई गई इन खामियों में सबसे चर्चित मामला कोर्ट फीस का है। रजिस्ट्री ने स्पष्ट रूप से बताया कि याचिकाकर्ताओं की ओर से निर्धारित कोर्ट फीस से 220 रुपये कम जमा किए गए हैं। सर्वोच्च न्यायालय की प्रक्रियाओं के तहत किसी भी याचिका को स्वीकार करने के लिए निर्धारित कोर्ट फीस का पूरा भुगतान अनिवार्य होता है। यदि कोर्ट फीस में कोई कमी रह जाती है, तो रजिस्ट्री उसे दोषपूर्ण मानकर वापस कर सकती है या खामियां दूर करने का निर्देश देती है।

कोर्ट फीस के अलावा एक अन्य महत्वपूर्ण खामी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे से जुड़ी पाई गई है। रजिस्ट्री ने अपनी रिपोर्ट में दर्ज किया है कि याचिका के साथ संलग्न मल्लिकार्जुन खड़गे का पहचान पत्र यानी आईडी कार्ड धुंधला है। न्यायिक प्रक्रियाओं में याचिकाकर्ताओं की पहचान सुनिश्चित करने के लिए जो दस्तावेज लगाए जाते हैं, उनका स्पष्ट और पठनीय होना आवश्यक होता है। धुंधले आईडी कार्ड के कारण रजिस्ट्री ने इसे भी एक प्रक्रियागत दोष के रूप में चिह्नित किया है।

गौरतलब है कि वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों को अपडेट और शुद्ध करने के लिए चलाया जाने वाला एक विशेष अभियान होता है। इस प्रक्रिया में मतदाता सूची में नए नाम जोड़े जाते हैं, मृतक मतदाताओं या स्थानांतरित हो चुके लोगों के नाम हटाए जाते हैं और डुप्लीकेट एंट्री को समाप्त किया जाता है। लेकिन विपक्षी दलों का आरोप रहा है कि इस विशेष संशोधन प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर उनके समर्थकों और आम मतदाताओं के नाम बिना उचित कारण और सूचना के हटा दिए गए हैं। विपक्षी नेताओं ने दावा किया था कि इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और निष्पक्ष चुनावों पर असर पड़ सकता है।

इस याचिका में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी आरोप लगाए गए थे। विपक्षी नेताओं ने याचिका के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया था कि किस प्रकार मतदाता सूची के संशोधन में अनियमितताएं बरती गई हैं। राहुल गांधी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव जैसे दिग्गज नेताओं के एक साथ इस याचिका में शामिल होने से यह मामला राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील बन गया था। 11 विपक्षी नेताओं के इस संयुक्त कदम को सरकार और चुनाव आयोग पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा था।

सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री द्वारा 14 खामियां गिनाए जाने का सीधा अर्थ यह है कि याचिका को वर्तमान रूप में सुनवाई के लिए स्वीकार नहीं किया जा सकता। भारत के सर्वोच्च न्यायालय में कोई भी याचिका दायर करते समय कुछ सख्त प्रक्रियागत नियमों का पालन करना होता है। इनमें सही कोर्ट फीस जमा करना, सभी दस्तावेजों की स्पष्ट प्रतियां लगाना, हलफनामे का सही प्रारूप होना और अन्य तकनीकी शर्तों को पूरा करना शामिल है। रजिस्ट्री का काम यही सुनिश्चित करना होता है कि कोई भी याचिका बिना इन औपचारिकताओं को पूरा किए न्यायाधीशों की पीठ के सामने न पहुंचे।

अब याचिकाकर्ताओं के पास इन खामियों को दूर करने का विकल्प मौजूद है। उन्हें रजिस्ट्री द्वारा बताए गए सभी 14 दोषों को सुधारना होगा, जिसमें 220 रुपये की अतिरिक्त कोर्ट फीस जमा करना और मल्लिकार्जुन खड़गे के आईडी कार्ड की साफ प्रति संलग्न करना शामिल है। इसके अलावा अन्य जो भी तकनीकी खामियां रजिस्ट्री ने बताई हैं, उन्हें भी दुरुस्त करना होगा। खामियां दूर करने के बाद ही इस याचिका को फिर से रजिस्ट्री के पास पेश किया जा सकेगा और उसके बाद ही यह तय होगा कि इसे सुनवाई के लिए किसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा या नहीं।

मतदाता सूची में हेरफेर और नाम हटाने का मुद्दा भारतीय राजनीति में हमेशा से एक संवेदनशील विषय रहा है। विपक्षी दलों का मानना है कि चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी है, जबकि इस तरह की प्रक्रियागत खामियों के सामने आने से याचिकाकर्ताओं की कानूनी तैयारियों पर भी सवाल खड़े होते हैं। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने अपना काम करते हुए याचिका में मौजूद कमियों को स्पष्ट कर दिया है और अब यह पूरी तरह से 11 विपक्षी नेताओं पर निर्भर करता है कि वे कितनी जल्दी इन 14 खामियों को दूर करके अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष रख पाते हैं।