आज का एक्सप्लेनर:पीएम मोदी क्यों चाहते हैं कि आप सोना न खरीदें, ऐसी 7 अपील के पीछे की कहानी; क्या आपको चिंता करनी चाहिए

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पीएम मोदी ने रविवार को तेलंगाना की एक रैली में देश से 7 अपीलें कीं। इनमें एक अपील सोना न खरीदने की भी थी। पीएम मोदी ने कहा- देशहित में हमें यह तय करना होगा कि सालभर तक घर में कोई कार्यक्रम हो, हम सोने के गहने नहीं खरीदेंगे। हालांकि सरकार ने खुद पिछले कुछ सालों से RBI के जरिए सोने की खरीद बढ़ा दी है। पीएम मोदी की अपील के पीछे असली वजह क्या है और क्या आपको वाकई चिंता करनी चाहिए; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… 1. एक साल तक सोना न खरीदने से क्या होगा? पीएम मोदी ने कहा: ‘एक समय था, जब संकट आने पर देशहित में लोग सोना दान दे देते थे। आज दान की जरूरत नहीं है, लेकिन देशहित में हमें यह तय करना होगा कि सालभर तक घर में कोई कार्यक्रम हो, हम सोने के गहने नहीं खरीदेंगे। विदेशी मुद्रा बचाने के लिए हमारी देशभक्ति हमें चुनौती दे रही है और हमें यह स्वीकार करके विदेशी मुद्रा बचानी होगी।’ ऐसा क्यों कहा: पीएम मोदी ने भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए ये अपील की। भारत अपने इस्तेमाल का करीब 99% सोना विदेशों से खरीदता है। 2025-26 में सोने का ये इम्पोर्ट बिल करीब 6.4 लाख करोड़ रुपए का था। विदेशों से खरीदे जाने वाले सामान के कुल खर्चे में 9% हिस्सेदारी के साथ सोना दूसरे नंबर पर है। 2. पेट्रोल-डीजल के कम इस्तेमाल और ‘वर्क फ्रॉम होम’ से क्या होगा? पीएम मोदी ने कहा: ‘भारत के पास दूसरे देशों की तरह बड़े-बड़े तेल के कुएं नहीं हैं। हमें पेट्रोल डीजल का उपयोग कम करना होगा। शहरों में जहां मेट्रो है, वहां हम तय करें कि हम ज्यादा से ज्यादा मेट्रो का ही उपयोग करेंगे। अगर कार में ही जाना जरूरी है, तो फिर कार पूल करने का प्रयास करें। और भी लोगों को साथ बिठा लें। अगर हमें कहीं सामान भेजना हो तो कोशिश करनी है कि वह ज्यादा से ज्यादा रेलवे गूड्स सर्विज से भेजें। वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन कान्फ्रेंसेस, वर्चुअल मीटिंग, इनको हमें फिर से प्राथमिकता देनी है।’ ऐसा क्यों कहा: अमेरिका-ईरान जंग शुरू होने के बाद दुनियाभर में तेल की कीमतें 50% तक बढ़ी हैं। ईरान पर अमेरिकी हमले के एक दिन पहले यानी 27 फरवरी को इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमत 72.87 डॉलर प्रति बैरल थी, जो 11 मई को 103.78 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। 3. फर्टिलाइजर के बजाय प्राकृतिक खेती पर शिफ्ट होने की अपील क्यों? पीएम मोदी ने कहा: ’ये बहुत जरूरी है कि हम केमिकल फर्टिलाइजर की खपत 25-50% तक घटाएं, उसे आधी कर दें। हम इसके साथ-साथ नेचुरल फार्मिंग की तरफ बढ़े। मैं कोविड काल से कहता आया हूं कि हम स्थानीय चीजें खरीदें। वोकल फॉर लोकल के मंत्र को लेकर चलें। हम मेड इन इंडिया चीजें खरीदकर भी विदेशी मुद्रा बचा सकते हैं।’ ऐसा क्यों कहा: भारत फर्टिलाइजर, यानी खाद के मामले में दुनिया के सबसे बड़े खरीदारों में से एक है। भारत अपनी जरूरत का 25-30% यूरिया, 90% DAP और 100% पोटाश विदेशों से खरीदता है। भारत के इम्पोर्ट बिल में इसका हिस्सा करीब 3% है। फर्टिलाइजर का कम इस्तेमाल करने की अपील के पीछे 3 बड़ी वजहें हैं… यानी फर्टिलाइजर की कम खपत से इम्पोर्ट बिल और सब्सिडी का खर्च कम होगा। हालांकि इससे पैदावार घटने का संकट भी खड़ा हो सकता है। 4. घूमने यानी शादी के लिए विदेश नहीं जाने से क्या होगा? पीएम मोदी ने कहा: ‘आजकल मिडिल क्लास में विदेशों में शादियों का, विदेश घूमने का और वैकेशन पर जाने का कल्चर बढ़ता जा रहा है। हमें तय करना होगा कि जब यह संकट का काल है और हमारी देशभक्ति हमें ललकार रही है, तो कम से कम एक साल के लिए हमें विदेश जाने की बातों को टालना चाहिए।’ ऐसा क्यों कहा: मार्च 2025 में आई टूरिज्म डिपार्टमेंट की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में 3.27 करोड़ भारतीयों ने विदेश यात्रा की। इसमें से 43.5% छुट्टी मनाने या घूमने वगैरह के लिए विदेश गए, जो 2024 से 6% ज्यादा है। 5. खाने का तेल कम खाने की बात क्यों कही? पीएम मोदी ने कहा: ‘खाने के तेल आयात के लिए भी बहुत बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। हर परिवार अगर खाने के तेल का उपयोग 10% कम करे, तो भी वह देशभक्ति का बहुत बड़ा काम है।’ ऐसा क्यों कहा: भारत अपने खाने के तेल की जरूरतों का लगभग 60-65% हिस्सा विदेशों से मंगाता है। 59% पाम ऑयल, 23% सोयाबीन ऑयल, 15% सनफ्लावर ऑयल इम्पोर्ट करता है। सवाल: क्या पीएम मोदी की अपीलों के पीछे कोई गहरी चिंता छिपी हुई है? जवाब: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा, ‘12 साल में देश को इस मुकाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है- क्या खरीदें, क्या न खरीदें, कहां जाएं, कहां न जाएं।’ समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने पोस्ट किया, ‘सारी पाबंदियां चुनाव के बाद ही क्यों याद आई हैं? भाजपाइयों ने चुनाव में जो हजारों चार्टर हवाई यात्राएं कीं वो क्या पानी से उड़ रहीं थीं? वो क्या होटलों में नहीं ठहर रहे थे या सिलेंडर की फोटो लगाकर खाना बनाकर खा रहे थे?’ दरअसल, पीएम मोदी की 7 अपीलों की पीछे की वजह भारत का घटता फॉरेन रिजर्व है। 1 मई को भारत का कुल फॉरेन रिजर्व 690.69 बिलियन डॉलर, यानी करीब 65.6 लाख करोड़ रुपए पर आ गया। एक हफ्ते में ये करीब 26 हजार करोड़ रुपए कम हुआ है। फरवरी 2026 में यह अपने ऑल टाइम हाई लेवल पर था। तब यह कुल 728.49 बिलियन डॉलर था। यानी पिछले ढाई महीनों में इसमें करीब 37.8 बिलियन डॉलर की गिरावट आई है। वहीं भारत के स्ट्रैटजिक ऑयल रिजर्व को देखें तो मार्च के आखिर में सरकार ने बताया था कि कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन की क्षमता में से करीब 3.37 मिलियन मीट्रिक टन तेल स्टॉक में हैं। यानी कुल क्षमता का 64% तेल भरा हुआ है, जबकि 36% खाली है। पीएम मोदी ने जिन 4 चीजों- सोना, कच्चा तेल, फर्टिलाइजर और खाने के तेल को लेकर अपील की है, उनका इम्पोर्ट बिल 240 बिलियन डॉलर, यानी करीब 22 लाख करोड़ रुपए है। ये कुल इम्पोर्ट बिल का करीब 31% है। ब्रिटिश न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के 46 अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि भारत में महंगाई दर मार्च 2026 में 3.4% थी, जो अप्रैल में बढ़कर 3.8% हो गई। अलग-अलग अर्थशास्त्रियों ने इसके 2.8% से 4.2% तक होने का अनुमान लगाया है। पूर्व भारतीय डिप्लोमैट निरुपमा राव के मुताबिक, ‘ईरान जंग से भारतीयों की रोजमर्रा की जिंदगी पर असर पड़ा है। पीएम की अपील का मतलब है कि हमें यह संकट समझने की जरूरत है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि भारत की अर्थव्यवस्था संकट में है। जो बोझ पड़ रहा है उसे सरकार, व्यवसायों और आम लोगों के बीच बांटना जरूरी है।’ इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के गुजरात प्रेसिडेंट नैनेश पच्चीगर के मुताबिक पीएम मोदी की अपील भारत के फॉरेन एक्सचेंज बचाने में मदद कर सकती है। सवाल: आम लोगों को सोना न खरीदने को कहा, लेकिन सरकार खुद ज्यादा क्यों खरीद रही? जवाब: एक तरफ पीएम मोदी ने देशवासियों से 1 साल तक सोना न खरीदने की अपील की है। दूसरी तरफ भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI का गोल्ड रिजर्व अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 के बीच 104.2 टन तक बढ़ा है। अभी भारत के पास करीब 880 टन गोल्ड रिजर्व है। पिछले 10 सालों में यह 57.81% तक बढ़ा है। 2023 से 2025 के बीच 280 टन सोना RBI ने जुटाया। दरअसल, सोना खरीदने का यह ट्रेंड भारत ही नहीं दुनिया के कई देशों के सेंट्रल बैंकों अपना रहे हैं। चीन, ब्राजील, तुर्किये, पोलैंड जैसे कई देश गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका ने रूस का 300 बिलियन डॉलर फॉरेन रिजर्व पर रोक लगा दी थी। इसके बाद से दुनियाभर के देशों में डॉलर के प्रति भरोसा कम होने लगा और वो अपना फॉरेन रिजर्व दूसरी करेंसी और खासकर सोने में डाइवर्सिफाय करने लगे। सोने को एक सुरक्षित निवेश समझा जाता है, जो जरूरत के समय काम आता है। पहले भारत अपना सोना दूसरे देशों के बैंकों में भी रखता था। अब इसे भी घर में ही रख रहा है। 2023 में RBI का 38% सोना ही देश में था। अब 77% देश में है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ज्यादा सोना देश में रखने से वैश्विक अस्थिरता के समय देश में सुरक्षा सुनिश्चित रहती है। दूसरे देशों पर निर्भरता भी कम होती है। ———————- ये खबर भी पढ़ें… चुनाव बाद कितना महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल; ईरान जंग में पाक से अमेरिका तक 44% कीमतें बढ़ीं, भारत ने कैसे रोके रखा ईरान जंग शुरू होने के बाद से पाकिस्तान में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 320 पाकिस्तानी रुपए से बढ़कर 460 रुपए पहुंच गई। यानी महज 50 दिनों में करीब 44% की बढ़ोत्तरी। इसी तरह अमेरिका में 42% और चीन में 31% तक तेल की कीमतें बढ़ीं। हालांकि भारत में इस दौरान तेल के दाम ज्यों के त्यों रहे। इससे तेल कंपनियों को हर दिन करोड़ों का नुकसान हो रहा है। पढ़ें पूरी खबर…



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