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Sat, Oct 10, 2026Updated 10:41 AM IST
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ट्रम्प ने नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलने पर जताई तीखी नाराजगी, कहा- मैंने 8 युद्ध रोके, नॉर्वे ने अपने ऊपर ऐसा दाग लगाया जो कभी नहीं मिटेगा

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वाशिंगटन। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य के प्रमुख नेता डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलने पर अपनी तीखी नाराजगी व्यक्त की है। शुक्रवार को दिए गए अपने बयान में ट्रम्प ने नोबेल समिति और नॉर्वे पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि यह पुरस्कार उन्हें नहीं देकर नॉर्वे ने अपने ऊपर ऐसा दाग लगा लिया है, जो इतिहास में कभी नहीं मिटेगा। उन्होंने स्पष्ट रूप से दावा किया कि उन्होंने अपने कार्यकाल और राजनीतिक प्रभाव के दौरान कुल आठ युद्धों को रोकने का काम किया है, जिसके लिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार दिया जाना चाहिए था।

डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को मीडिया और अपने समर्थकों के सामने यह बात रखी कि नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा में उनके योगदान को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति ने आठ अलग-अलग युद्धों को रोकने में सफलता हासिल की है, तो उसे हर उस युद्ध को रोकने के बदले में शांति पुरस्कार मिलना चाहिए था। ट्रम्प का तर्क था कि वैश्विक शांति स्थापित करने के लिए इससे बड़ा कोई योगदान नहीं हो सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनकी नीतियों और कूटनीतिक दबाव ने कई संभावित सैन्य संघर्षों को टाल दिया, जिससे लाखों लोगों की जान बची और वैश्विक स्थिरता को बनाए रखने में मदद मिली।

ट्रम्प ने नॉर्वे की नोबेल समिति के फैसले को ऐतिहासिक भूल करार देते हुए कहा कि नॉर्वे ने खुद को दुनिया के सामने शर्मिंदा किया है। उनका कहना था कि यह पुरस्कार जिसे भी दिया गया है, वह उनके द्वारा किए गए वास्तविक कामों के सामने कुछ भी नहीं है। ट्रम्प ने नॉर्वे पर निशाना साधते हुए कहा कि इस निर्णय से नॉर्वे की विश्वसनीयता पर एक ऐसा स्थायी धब्बा लग गया है जिसे आने वाली पीढ़ियां भी याद रखेंगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि नोबेल समिति का यह फैसला राजनीतिक पूर्वाग्रह से प्रेरित है और इसमें योग्यता के बजाय अन्य कारकों को प्राथमिकता दी गई है।

इस दौरान डोनाल्ड ट्रम्प ने नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त करने वाले व्यक्ति का नाम लेते हुए कड़ी आलोचना की। उन्होंने ‘पिल्लै’ का जिक्र करते हुए कहा कि इस व्यक्ति को कोई नहीं जानता है। ट्रम्प ने सवाल उठाया कि जब दुनिया इस नाम से अपरिचित है, तो ऐसे व्यक्ति को विश्व का सबसे प्रतिष्ठित शांति पुरस्कार क्यों दिया गया। उन्होंने अपने दावे को दोहराया कि उन्होंने जो आठ युद्ध रोके हैं, वे ठोस और ऐतिहासिक उपलब्धियां हैं, जबकि पुरस्कार विजेता का योगदान जनता की नजरों में कहीं भी दिखाई नहीं देता।

गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रम्प पहले भी कई मौकों पर नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर असंतोष जता चुके हैं। उन्होंने अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान उत्तर कोरिया के तत्कालीन नेता किम जोंग उन से हुई ऐतिहासिक मुलाकातों और मध्य पूर्व में अब्राहम समझौतों (Abraham Accords) के तहत इजरायल और कई अरब देशों के बीच कराए गए शांति समझौतों का हवाला देते हुए कई बार कहा है कि वे इस पुरस्कार के सबसे बड़े हकदार थे। ट्रम्प का मानना रहा है कि उनकी ‘अधिकतम दबाव’ (Maximum Pressure) की नीति और व्यक्तिगत कूटनीति ने कई क्षेत्रों में युद्ध की स्थिति को टाल दिया।

नोबेल शांति पुरस्कार नॉर्वे की नोबेल समिति द्वारा हर साल दिया जाता है। यह पुरस्कार उन व्यक्तियों या संगठनों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने राष्ट्रों के बीच भाईचारे को बढ़ावा देने, स्थायी सेनाओं के उन्मूलन या शांति सम्मेलनों के आयोजन के लिए सबसे अधिक या सबसे अच्छा काम किया हो। इस पुरस्कार की चयन प्रक्रिया अत्यंत गोपनीय होती है और इसके लिए दुनिया भर के विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों, पूर्व विजेताओं, सांसदों और सरकारों द्वारा नामांकन भेजे जाते हैं। हालांकि, ट्रम्प जैसे वैश्विक नेताओं का लगातार यह आरोप रहा है कि समिति का चयन राजनीतिक रूप से प्रभावित होता है और वास्तविक शांति प्रयासों को अनदेखा किया जाता है।

ट्रम्प के इस ताजा बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर चर्चा छेड़ दी है। उनके समर्थक इस बात से सहमत हैं कि ट्रम्प की विदेश नीति ने अमेरिका को नए युद्धों से दूर रखा और वैश्विक स्तर पर शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए। वहीं, उनके आलोचक इस बयान को उनकी आत्मप्रशंसा और नोबेल संस्थान की गरिमा को कम करने का प्रयास बता रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय संबंधों के विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प का यह बयान उनकी उसी राजनीतिक शैली का हिस्सा है जिसमें वे अपनी उपलब्धियों को सबसे बड़ा बताते हैं और विरोधियों या संस्थाओं पर सीधा हमला करते हैं। शुक्रवार को दिए गए इस बयान में उन्होंने न सिर्फ अपने आठ युद्ध रोकने के दावे को दोहराया, बल्कि नॉर्वे पर लगाए गए ‘दाग’ और ‘पिल्लै’ को लेकर की गई टिप्पणी से यह स्पष्ट कर दिया कि वे नोबेल समिति के फैसले को बिल्कुल भी स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। फिलहाल, नॉर्वे की नोबेल समिति की ओर से ट्रम्प के इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह विवाद आने वाले दिनों में वैश्विक मीडिया और राजनीतिक मंचों पर छाया रहने की संभावना है।

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ट्रम्प ने नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलने पर जताई तीखी नाराजगी, कहा- मैंने 8 युद्ध रोके, नॉर्वे ने अपने ऊपर ऐसा दाग लगाया जो कभी नहीं मिटेगा

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वाशिंगटन। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलने को लेकर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है। शुक्रवार को दिए गए अपने बयान में ट्रम्प ने नोबेल समिति और नॉर्वे पर सीधा हमला बोला। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह पुरस्कार उन्हें नहीं देकर नॉर्वे ने अपने ऊपर ऐसा दाग लगा लिया है, जो कभी नहीं मिटेगा। ट्रम्प का यह बयान नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर चल रही वैश्विक चर्चाओं के बीच आया है और इसने अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

ट्रम्प ने अपने संबोधन में दावा किया कि उन्होंने अपने कार्यकाल और उसके बाद कई महत्वपूर्ण वैश्विक संघर्षों को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कुल 8 युद्धों को रुकवाने का काम किया है। ट्रम्प का तर्क था कि उनके द्वारा रोके गए हर एक युद्ध के लिए उन्हें अलग से शांति पुरस्कार मिलना चाहिए था। उन्होंने कहा कि इतने बड़े स्तर पर शांति स्थापित करने के प्रयासों के बावजूद उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से वंचित रखना पूरी तरह से अनुचित और अन्यायपूर्ण है। ट्रम्प ने अपने इस दावे को दोहराते हुए कहा कि विश्व शांति के क्षेत्र में उनका योगदान किसी से छिपा नहीं है और इतिहास इसे दर्ज करेगा।

अपनी नाराजगी को और अधिक तीखा करते हुए ट्रम्प ने इस वर्ष के नोबेल शांति पुरस्कार विजेता का भी उल्लेख किया और उनकी तुलना अपने कार्यों से की। स्रोत सामग्री के अनुसार, ट्रम्प ने पुरस्कार विजेता का नाम लेते हुए ‘पिल्लै’ का जिक्र किया और कहा कि उन्हें कोई नहीं जानता। ट्रम्प का यह कहना था कि जिन व्यक्ति को यह सम्मान दिया गया है, वह वैश्विक स्तर पर उतने जाने-पहचाने नहीं हैं, जबकि उन्होंने खुद दुनिया के सबसे बड़े संघर्षों को खत्म करने का काम किया है। ट्रम्प ने यह सवाल उठाया कि ऐसे व्यक्ति को पुरस्कार क्यों दिया जा रहा है जिसे लोग पहचानते तक नहीं हैं, जबकि उनके जैसे नेता को नजरअंदाज किया जा रहा है जिन्होंने वास्तव में युद्ध रोके हैं।

ट्रम्प ने नॉर्वे पर निशाना साधते हुए कहा कि नोबेल शांति पुरस्कार का चयन करने वाली समिति ने एक ऐतिहासिक भूल की है। उन्होंने कहा कि नॉर्वे ने यह पुरस्कार उन्हें नहीं देकर अपने देश और अपनी उस संस्था पर एक ऐसा स्थायी दाग लगा दिया है, जिसे भविष्य में कभी भी मिटाया नहीं जा सकेगा। ट्रम्प के अनुसार, नोबेल शांति पुरस्कार की प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए यह जरूरी था कि इसे उस व्यक्ति को दिया जाता जिसने वास्तव में धरातल पर शांति लाने का काम किया हो। उन्होंने आरोप लगाया कि इस निर्णय में राजनीतिक कारणों ने दखल दिया है, जिसकी वजह से असली हकदार को इस सम्मान से दूर रखा गया।

गौरतलब है कि नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा हर साल नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में की जाती है। अन्य नोबेल पुरस्कार स्वीडन में दिए जाते हैं, लेकिन शांति पुरस्कार का चयन और वितरण नॉर्वे की नोबेल समिति द्वारा किया जाता है। यह परंपरा अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत के अनुसार चली आ रही है। ट्रम्प पहले भी कई मौकों पर यह दावा कर चुके हैं कि वे नोबेल शांति पुरस्कार के असली हकदार हैं। उन्होंने बीते समय में भी मध्य पूर्व और एशिया के कुछ क्षेत्रों में शांति समझौतों का जिक्र करते हुए कहा था कि उनके प्रशासन ने ऐतिहासिक कूटनीतिक सफलताएं हासिल की हैं, जिनके लिए उन्हें यह पुरस्कार मिलना ही चाहिए था।

ट्रम्प के इस ताजा बयान ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान खींचा है। हालांकि, नोबेल समिति या नॉर्वे की सरकार की ओर से ट्रम्प के इन आरोपों पर अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। नोबेल समिति का हम से यह रुख रहा है कि पुरस्कार का चयन एक स्वतंत्र और गोपनीय प्रक्रिया के तहत होता है, जिसमें बाहरी राजनीतिक दबावों का कोई स्थान नहीं होता। समिति अपने फैसलों को लेकर विस्तृत स्पष्टीकरण देने से आमतौर पर बचती है।

इस पूरे मामले में यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि ट्रम्प ने जिन 8 युद्धों को रोकने का दावा किया है, उनके बारे में उन्होंने विस्तृत जानकारी या सूची सार्वजनिक रूप से साझा नहीं की है। उनके बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ये 8 युद्ध किन देशों के बीच थे या किस समय अवधि में इन्हें रोका गया। इस संबंध में अनिश्चितता बनी हुई है और उनके इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है। ट्रम्प ने अपने भाषण में मुख्य रूप से अपनी उपलब्धियों का वर्णन करते हुए नॉर्वे और नोबेल समिति के फैसले की आलोचना पर ही अपना पूरा जोर रखा।

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर हमेशा से बहस होती रही है। कई बार विभिन्न वैश्विक नेताओं और संगठनों ने इस पुरस्कार के चयन मानदंडों पर सवाल उठाए हैं। ट्रम्प का यह बयान इसी लंबी बहस की एक नई कड़ी है। वांदे भारत न्यूज़ की इस रिपोर्ट में ट्रम्प द्वारा शुक्रवार को दिए गए बयान और उनके दावों को ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है। नोबेल समिति की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया न आने के कारण, फिलहाल यह मामला एकतरफा बयानबाजी के रूप में ही सामने है। ट्रम्प के समर्थकों और विरोधियों दोनों की ओर से इस मुद्दे पर सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।