तरनतारन: गुरुद्वारा बीर बाबा बुड्ढा साहिब जी में तीन दिवसीय सालाना जोड़ मेला संपन्न, तीसरे दिन गुरमत समागम में उमड़ी हजारों श्रद्धालुओं की भीड़

तरनतारन। पंजाब के तरनतारन जिले में स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा बीर बाबा बुड्ढा साहिब जी में आयोजित तीन दिवसीय सालाना जोड़ मेला 2026 का समापन हो गया है। इस भव्य और पवित्र आयोजन का तीसरा और अंतिम दिन विशेष गुरमत समागम के रूप में मनाया गया, जिसमें बड़ी संख्या में संगत ने हिस्सा लिया। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पावन मौजूदगी में आयोजित इस गुरमत समागम ने पूरे परिसर को भक्ति और श्रद्धा के अनूठे वातावरण से भर दिया। दीवान हॉल में हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने गुरबानी कीर्तन का गहरा आनंद लिया और गुरमत विचारों को सुनकर अपनी आध्यात्मिक यात्रा को और अधिक सुदृढ़ किया।
ऐतिहासिक गुरुद्वारा बीर बाबा बुड्ढा साहिब जी सिख धर्म और इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र स्थान माना जाता है। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी यहां तीन दिवसीय सालाना जोड़ मेले का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं को गुरमत मार्ग से जोड़ना और उन्हें गुरबानी के उपदेशों से अवगत कराना रहा। मेले के पहले और दूसरे दिन से ही देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा, लेकिन तीसरे दिन का गुरमत समागम इस पूरे आयोजन का केंद्र बिंदु रहा। इस दौरान दीवान हॉल पूरी तरह से श्रद्धालुओं से भरा हुआ था, जहां सभी ने शांति और अनुशासन के साथ बैठकर धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया।
तीसरे दिन के गुरमत समागम की शुरुआत श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की मौजूदगी में हुई, जो इस आयोजन की सबसे बड़ी आध्यात्मिक विशेषता रही। गुरुद्वारा साहिब के दीवान हॉल में जब गुरबानी कीर्तन की धुनें गूंजीं, तो वहां उपस्थित हर एक श्रद्धालु निहाल हो गया। रागी जत्थों द्वारा पेश किए गए गुरबानी के शब्दों ने संगत के मन-मस्तिष्क को शांति प्रदान की। श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा और एकाग्रता के साथ गुरबानी कीर्तन का लाभ उठाया। इसके अतिरिक्त, इस अवसर पर गुरमत विचारों को भी संगत के समक्ष रखा गया। गुरमत विचारकों और विद्वानों ने सिख इतिहास, गुरु साहिबान के जीवन चरित्र और बाबा बुड्ढा जी के योगदान पर प्रकाश डालते हुए संगत को गुरमत के सिद्धांतों पर चलने की प्रेरणा दी।
इस तीन दिवसीय जोड़ मेले में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति यह दर्शाती है कि गुरुद्वारा बीर बाबा बुड्ढा साहिब जी के प्रति लोगों की आस्था आज भी अटूट है। तरनतारन और आसपास के क्षेत्रों के अलावा दूर-दराज के इलाकों से भी श्रद्धालु इस ऐतिहासिक मेले में शामिल होने के लिए पहुंचे। दीवान हॉल में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए गुरुद्वारा प्रबंधन द्वारा व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से बनाए रखा गया। श्रद्धालुओं के बैठने, लंगर छकने और अन्य सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया, ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और सभी लोग शांतिपूर्वक गुरमत समागम का हिस्सा बन सकें।
बाबा बुड्ढा जी सिख इतिहास की एक अत्यंत सम्मानित और पूजनीय हस्ती हैं। उन्होंने सिख धर्म के प्रारंभिक दौर से लेकर कई गुरुओं के समय तक अहम भूमिका निभाई थी। उनके नाम पर स्थापित यह ऐतिहासिक गुरुद्वारा उनकी यादों और उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग को जीवंत रखता है। इसी कारण से हर वर्ष आयोजित होने वाला यह सालाना जोड़ मेला श्रद्धालुओं के लिए एक विशेष महत्व रखता है। गुरमत समागम के माध्यम से नई पीढ़ी को बाबा बुड्ढा जी के जीवन मूल्यों और गुरमत शिक्षाओं से जोड़ने का निरंतर प्रयास किया जाता है।
मेले के तीसरे दिन संपन्न हुए इस गुरमत समागम ने श्रद्धालुओं को एक नई ऊर्जा और आध्यात्मिक दिशा प्रदान की। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की मौजूदगी में संपन्न हुए इस कार्यक्रम ने स्पष्ट संदेश दिया कि गुरबानी और गुरमत विचार ही मानव जीवन को सही मार्ग पर ले जाने का माध्यम हैं। दीवान हॉल में गूंजता कीर्तन और गुरमत विचारों की गूंज ने पूरे वातावरण को पवित्र कर दिया। हजारों श्रद्धालुओं ने एक साथ बैठकर गुरबानी कीर्तन का लाभ उठाया, जो अपने आप में एक दुर्लभ और अत्यंत प्रभावशाली दृश्य था।
तरनतारन के ऐतिहासिक गुरुद्वारा बीर बाबा बुड्ढा साहिब जी में आयोजित यह तीन दिवसीय सालाना जोड़ मेला 2026 अपने सभी धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। तीसरे दिन के गुरमत समागम ने इस आयोजन को एक भव्य और गरिमामयी समाप्ति प्रदान की। श्रद्धालु गुरबानी कीर्तन और गुरमत विचारों का लाभ उठाकर अपने घरों को लौटे, और उनके चेहरों पर एक अलग ही आध्यात्मिक संतुष्टि झलक रही थी। गुरुद्वारा प्रबंधन और सेवादारों की अथक मेहनत के कारण यह जोड़ मेला पूर्ण रूप से शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रहा। आने वाले समय में भी इस ऐतिहासिक गुरुद्वारे में ऐसे ही आयोजनों के माध्यम से संगत को गुरमत से जोड़ने का सिलसिला जारी रहेगा।

