तरनतारन में पराली जलाने पर 4 लोगों के खिलाफ दर्ज हुए मामले, प्रशासन ने तय किया जीरो पराली बर्निंग का लक्ष्य

पंजाब के तरनतारन जिले में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। सैटेलाइट से प्राप्त रिपोर्ट और जमीनी स्तर पर काम कर रही चेकिंग टीमों की सूचना के आधार पर जिले में पराली में आग लगाने के आरोप में चार अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में दो किसानों को नामजद किया गया है, जबकि दो अन्य मामलों में अज्ञात लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। यह कदम पंजाब सरकार और जिला प्रशासन द्वारा पराली प्रबंधन को लेकर उठाए जा रहे गंभीर कदमों का हिस्सा है।
तरनतारन जिला प्रशासन ने इस वर्ष फसल अवशेष यानी पराली को खेतों में जलाने की घटनाओं को पूरी तरह से रोकने का लक्ष्य रखा है। प्रशासन की ओर से ‘जीरो पराली बर्न’ का संकल्प लिया गया है, जिसके तहत किसी भी किसान या व्यक्ति को खेतों में धान की पराली में आग लगाने की छूट नहीं दी जाएगी। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जिला प्रशासन ने निगरानी का पूरा तंत्र सक्रिय कर दिया है। उपग्रह यानी सैटेलाइट की मदद से खेतों में आग लगने की वास्तविक समय की जानकारी ली जा रही है, ताकि तुरंत संबंधित क्षेत्र में कार्रवाई की जा सके। इसके अतिरिक्त, विशेष चेकिंग टीमें भी गांव-गांव जाकर निरीक्षण कर रही हैं और पराली जलाने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कर रही हैं।
दर्ज किए गए चार मामलों की बात करें तो प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दो मामलों में उन किसानों को सीधे तौर पर नामजद किया गया है, जिनके खेतों में पराली जलाई गई थी। वहीं, अन्य दो मामलों में अभी तक आग लगाने वाले व्यक्तियों की पहचान नहीं हो पाई है, इसलिए उन्हें अज्ञात रखते हुए प्राथमिकी दर्ज की गई है। प्रशासन का मानना है कि ऐसी सख्त कार्रवाई से अन्य किसानों में भी एक संदेश जाएगा और वे पराली जलाने से पहले कई बार सोचेंगे।
हालांकि, जिला प्रशासन का जोर केवल दंडात्मक कार्रवाई पर ही नहीं है, बल्कि किसानों को पराली प्रबंधन के वैकल्पिक और लाभकारी तरीकों के बारे में जागरूक करना भी इस अभियान का एक प्रमुख हिस्सा है। प्रशासन की ओर से कृषि विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के माध्यम से किसानों को लगातार बताया जा रहा है कि पराली को जलाने के बजाय उसका समुचित प्रबंधन कैसे किया जा सकता है। किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के उन तरीकों की जानकारी दी जा रही है, जिनसे न केवल पर्यावरण को नुकसान से बचाया जा सकता है, बल्कि खेतों की मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाई जा सकती है।
किसानों को यह समझाया जा रहा है कि पराली को खेत में ही मशीनों की मदद से मिलाकर या उसे बिखेरकर अगली फसल की बुवाई की जा सकती है। इससे मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ती है, जो भविष्य में रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करने में सहायक होती है। इसके साथ ही, पराली को बायोमास ऊर्जा संयंत्रों, पेपर मिलों या अन्य औद्योगिक इकाइयों को बेचकर भी किसान अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं। प्रशासन द्वारा किसानों को इन सभी फायदों के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है, ताकि वे खुद पराली जलाने से बचें और इसके प्रबंधन के आधुनिक तरीकों को अपनाएं।
पंजाब में हर वर्ष धान की कटाई के बाद पराली जलाने की समस्या एक गंभीर चुनौती बन जाती है। इससे न केवल राज्य बल्कि दिल्ली सहित पूरे उत्तर भारत में वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक सीमा तक पहुंच जाता है। धुएं और हानिकारक गैसों के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। ऐसे में तरनतारन जिला प्रशासन द्वारा ‘जीरो पराली बर्न’ का लक्ष्य निर्धारित करना और उसके लिए सैटेलाइट निगरानी तथा चेकिंग टीमों की मदद से सख्ती बरतना एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
प्रशासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता शिविर और बैठकों का आयोजन भी शुरू किया है, जहां किसानों को पराली प्रबंधन मशीनरी जैसे हैप्पी सीडर, सुपर सीडर और मल्चर के उपयोग के बारे में जानकारी दी जा रही है। किसानों को बताया जा रहा है कि इन मशीनों के उपयोग से पराली को जलाए बिना ही गेहूं या अन्य फसलों की बुवाई समय पर और कम लागत में की जा सकती है।
अधिकारियों का कहना है कि पराली जलाना कानूनन अपराध है और ऐसा करने वालों के खिलाफ नियमित रूप से कार्रवाई जारी रहेगी। हालांकि, उनका मुख्य उद्देश्य किसानों को शिक्षित करना और उन्हें पराली जलाने से होने वाले नुकसान व इसके प्रबंधन से होने वाले फायदों के प्रति जागरूक करना है। तरनतारन जिले में दर्ज ये चार मामले इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि प्रशासन अपने ‘जीरो पराली बर्न’ के लक्ष्य को लेकर पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

