तरनतारन में पराली जलाने पर तीन के खिलाफ एफआईआर दर्ज, प्रशासन की सख्ती के बावजूद नहीं रुक रहीं घटनाएं

तरनतारन। पंजाब के तरनतारन जिले में धान की कटाई का सीजन चल रहा है और इसी के साथ किसानों द्वारा खेतों में पराली यानी धान के अवशेष जलाने की घटनाएं भी लगातार सामने आ रही हैं। जिला प्रशासन और पुलिस विभाग की ओर से बार-बार दी जा रही चेतावनियों, जागरूकता अभियानों और कड़े निर्देशों के बावजूद खेतों में पराली जलाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा कार्रवाई में तरनतारन पुलिस ने पर्यावरण प्रदूषण को रोकने और माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के स्पष्ट आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में पराली जलाने के आरोप में कुल तीन नए मामले दर्ज किए हैं।
पुलिस द्वारा दर्ज किए गए इन तीन मामलों में दो आरोपी अज्ञात व्यक्तियों के रूप में चिह्नित किए गए हैं, जबकि एक मामले में एक किसान को नामजद किया गया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में की गई है जब पूरे पंजाब राज्य में पराली जलाने के मुद्दे को लेकर प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह से सक्रिय है और पर्यावरण संरक्षण के नियमों को लागू करने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। तरनतारन पुलिस ने स्पष्ट किया है कि एनजीटी के दिशा-निर्देशों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कानूनों के तहत सख्ती बरती जा रही है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की ओर से लगातार किसानों को पराली न जलाने की अपील की जा रही है। इसके लिए गांव-गांव जाकर जागरूकता शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, लाउडस्पीकरों के जरिए घोषणाएं कराई जा रही हैं और सोशल मीडिया सहित अन्य माध्यमों से भी लोगों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में बताया जा रहा है। इसके अलावा, किसानों को पराली प्रबंधन के वैकल्पिक तरीकों जैसे हैप्पी सीडर, सुपर एसएमएस और मल्चर जैसी आधुनिक कृषि मशीनों के उपयोग के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। सरकार की ओर से इन मशीनों पर सब्सिडी देने का प्रावधान भी किया गया है, ताकि किसान पराली को खेतों में ही दबाकर या उसे हटाकर अगली फसल की बुवाई कर सकें। हालांकि, इन सभी प्रयासों के बावजूद कुछ किसान अभी भी परंपरागत तरीके से पराली जलाने का रास्ता चुन रहे हैं, जिससे प्रशासन के सामने चुनौतियां बढ़ गई हैं।
पराली जलाने से वायु प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ता है, जो न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे उत्तर भारत के पर्यावरण के लिए एक गंभीर खतरा बन चुका है। सर्दियों के मौसम में जब हवा की गति कम होती है, तो पराली का धुआं वायुमंडल में लंबे समय तक बना रहता है। इससे सांस संबंधी बीमारियां, आंखों में जलन और दृश्यता में भारी कमी जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। कई बार धुंध और धुएं के कारण सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। इन्हीं गंभीर परिणामों को देखते हुए माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने पराली जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया हुआ है और राज्यों को इसके लिए जिम्मेदार किसानों तथा अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
तरनतारन जिला प्रशासन और पुलिस ने आम जनता और विशेष रूप से किसानों से पुनः अपील की है कि वे खेतों में पराली बिल्कुल न जलाएं। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि अगर कोई व्यक्ति पराली जलाते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, भारतीय दंड संहिता और एनजीटी के आदेशों के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिले में निगरानी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं, जो दिन और रात दोनों समय खेतों पर नजर रख रही हैं। ड्रोन कैमरों और अन्य तकनीकी उपकरणों की मदद से भी पराली जलाने की घटनाओं का पता लगाया जा रहा है, ताकि तुरंत कार्रवाई की जा सके।
यह ध्यान देने योग्य है कि हाल ही में दर्ज किए गए ये तीन मामले इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि प्रशासन अब किसी भी प्रकार की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। दो अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज होना यह दर्शाता है कि पुलिस उन जगहों पर भी कार्रवाई कर रही है जहां पराली जलाने वाले की पहचान तत्काल नहीं हो पाती, लेकिन बाद में जांच करके उन्हें चिह्नित किया जाएगा। वहीं, एक किसान को नामजद करना यह संदेश देता है कि नियम तोड़ने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा।
तरनतारन पुलिस ने स्पष्ट किया है कि पराली जलाना केवल एक प्रशासनिक नियम का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह समाज और पर्यावरण के खिलाफ एक गंभीर अपराध है। आने वाले दिनों में जब धान की कटाई अपने चरम पर होगी, तब प्रशासन अपनी निगरानी और कार्रवाई को और अधिक तेज करेगा। जिला प्रशासन का कहना है कि पराली प्रबंधन के लिए किसानों को हर संभव मदद उपलब्ध कराई जा रही है और उन्हें चाहिए कि वे सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर पर्यावरण सुरक्षित रखने में अपना योगदान दें। वंदे भारत न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस और प्रशासन मिलकर इस समस्या से निपटने के लिए प्रतिबद्ध हैं और आगे भी ऐसे ही सख्त कदम उठाए जाते रहेंगे।

