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विश्व दृष्टि दिवस पर कोरबा में छात्राओं को दी गई आंखों की देखभाल की जानकारी, नेत्र रोगों से बचाव पर जोर

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कोरबा। वंदे भारत न्यूज। विश्व दृष्टि दिवस 2026 के अवसर पर छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्कूली छात्राओं के लिए एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चियों को आंखों की उचित देखभाल और नेत्र रोगों से बचाव के तरीकों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करना था। स्वास्थ्य विभाग और साइटसेवर्स इंडिया के मार्गदर्शन में संचालित ‘नेत्र वसंत’ कार्यक्रम के तहत यह जागरूकता शिविर परिवहन नगर स्थित साडा कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शामिल विशेषज्ञों ने छात्राओं से अपील की कि वे आंखों की किसी भी प्रकार की परेशानी को नजरअंदाज न करें और समय रहते चिकित्सकीय जांच कराएं।

विश्व दृष्टि दिवस प्रतिवर्ष अक्टूबर महीने के दूसरे गुरुवार को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह दिन 8 अक्टूबर को पड़ा। इस दिवस को मनाने का वैश्विक उद्देश्य अंधापन और दृष्टि दोष जैसी समस्याओं के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना है। दुनिया भर में लाखों लोग रोकथाम योग्य कारणों से अपनी दृष्टि खो रहे हैं। ऐसे में समय पर जांच और उचित उपचार से कई नेत्र रोगों को रोका जा सकता है। इसी वैश्विक संदेश को स्थानीय स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कोरबा में ‘नेत्र वसंत’ कार्यक्रम के अंतर्गत यह पहल की गई।

परिवहन नगर स्थित साडा कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला में आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम में स्कूल की छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने बच्चियों को बताया कि आंखें हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील अंग हैं। पढ़ाई के दौरान लगातार किताबों या डिजिटल स्क्रीन को देखने से आंखों पर अत्यधिक तनाव पड़ता है। इसलिए नियमित अंतराल पर आंखों को आराम देना बहुत जरूरी है। छात्राओं को बताया गया कि पढ़ते समय उचित रोशनी का होना अनिवार्य है। कम रोशनी या सीधे तेज धूप में पढ़ने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे दृष्टि दोष की समस्या तेजी से बढ़ सकती है।

‘नेत्र वसंत’ कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य विभाग और साइटसेवर्स इंडिया की टीम ने छात्राओं को आंखों की स्वच्छता बनाए रखने के व्यावहारिक तरीके बताए। विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि आंखों को बार-बार गंदे हाथों से नहीं छूना चाहिए, क्योंकि इससे संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है। यदि आंखों में लालपन, खुजली, पानी आना या धुंधला दिखाई देने जैसे लक्षण महसूस हों, तो उन्हें सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत अपने शिक्षकों या अभिभावकों को सूचित करना चाहिए और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर नेत्र चिकित्सक से जांच करानी चाहिए।

कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों ने बताया कि साइटसेवर्स इंडिया एक ऐसी संस्था है जो देश भर में रोकथाम योग्य अंधापन को समाप्त करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से चलाया जा रहा ‘नेत्र वसंत’ कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस कार्यक्रम का मुख्य फोकस स्कूली बच्चों, विशेषकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों तक पहुंचना है। बचपन में ही यदि नेत्र स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता पैदा कर दी जाए, तो भविष्य में गंभीर नेत्र रोगों की दर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

साडा कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला के शिक्षकों ने भी इस जागरूकता कार्यक्रम की सराहना की। उनका कहना था कि छात्राओं के लिए इस प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी अत्यंत लाभदायक है। कई बार बच्चे आंखों में होने वाली छोटी-मोटी परेशानियों को अपने माता-पिता या शिक्षकों को बताते नहीं हैं, जिससे समस्या समय के साथ गंभीर रूप ले लेती है। इस कार्यक्रम के बाद छात्राएं अपनी आंखों के स्वास्थ्य को लेकर अधिक सतर्क और जिम्मेदार हुई हैं। शिक्षकों ने आश्वासन दिया कि वे स्कूल में नेत्र स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बनाए रखने के लिए नियमित रूप से छात्राओं को मार्गदर्शन देते रहेंगे।

विश्व दृष्टि दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम में आंखों की जांच से जुड़ी बुनियादी बातों की भी जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि हर व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार अपनी आंखों की विस्तृत जांच जरूर करानी चाहिए। बच्चों के मामले में यह और भी अधिक आवश्यक है, क्योंकि उनके विकास और शैक्षणिक प्रदर्शन में अच्छी दृष्टि की भूमिका सबसे अहम होती है। सही समय पर चश्मे का उपयोग या अन्य चिकित्सीय उपाय करने से बच्चों की पढ़ाई पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।

कोरबा जिले में स्वास्थ्य विभाग और साइटसेवर्स इंडिया द्वारा संयुक्त रूप से संचालित ‘नेत्र वसंत’ कार्यक्रम के तहत आगे भी इसी तरह के जागरूकता शिविर और नेत्र जांच कैंप आयोजित किए जाने की संभावना है। इस पहल का उद्देश्य जिले के अधिक से अधिक स्कूलों को अपने दायरे में लाना है, ताकि हर बच्चे तक नेत्र स्वास्थ्य का संदेश पहुंच सके। कार्यक्रम के अंत में छात्राओं ने आंखों की सुरक्षा और देखभाल से जुड़े नियमों का पालन करने का संकल्प लिया। इस जागरूकता अभियान से न केवल स्कूली बच्चियों, बल्कि उनके अभिभावकों और शिक्षकों में भी नेत्र स्वास्थ्य को लेकर एक नई समझ विकसित होने की उम्मीद जताई जा रही है।