बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां बढ़ गई है। खबर है कि महागठबंधन खरमास (14 अप्रैल) खत्म होने के बाद पहली बैठक कर सकता है। इसमें विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीति बनाई जाएगी।
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NDA ने अपनी एकजुटता दिखाने के लिए पटना से लेकर दिल्ली तक कुछ बैठकें कर चुका है। भास्कर को मिली जानकारी के मुताबिक, अब महागठबंधन में सीटों को लेकर माथापच्ची शुरू हो गई है।
कांग्रेस के सोर्स के मुताबिक, पार्टी ने अब तक 45 से अधिक सीटों की एक लिस्ट तैयार की है जहां वह मजबूती से चुनाव लड़ना चाहती है। इसमें पिछली बार यानी 2020 विधानसभा चुनाव में जीती गई सभी 19 सीटें भी शामिल हैं।
बाकी की 26 सीटों में कुछ सीटें ऐसी भी हैं, जिस पर पिछली बार RJD और लेफ्ट पार्टियां चुनाव लड़ी थी। हालांकि, इसमें से कुछ सीटें घट-बढ़ सकती हैं।
इस स्पेशल रिपोर्ट में पढ़िए और देखिए कांग्रेस की मजबूत दावेदारी वाली सीटों के बारे में और चुनाव को लेकर पार्टी की क्या है रणनीति?
कांग्रेस के टॉप सोर्स के मुताबिक, पार्टी बिहार में सीटों की संख्या से ज्यादा जीत को तरजीह देगी। वह उन सीटों पर लड़ने का प्रयास करेगी, जहां मजबूत हो। इसके लिए सीटों की अदला-बदली भी हो सकती है।
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के इंटरनल सर्वे में बिहार की 50 सीटों पर मजबूत स्थिति बनती हुई दिख रही है। उन सीटों पर पार्टी अपना कैंडिडेट्स उतारने का प्रयास करेगी।
जिलाध्यक्ष और पर्यवेक्षक तय करेंगे विधानसभा के कैंडिडेट
सोर्स के मुताबिक, कांग्रेस ने टिकट बांटने के लिए खास रणनीति तैयार कर रही है। पार्टी ने तय किया है कि जिला अध्यक्ष और पर्यवेक्षक ही तय करेंगे कि किसे कैंडिडेट बनाया जाए। इसके लिए पार्टी ने जिला अध्यक्षों को पावरफुल बनाने का निर्णय लिया है।
शुक्रवार को दिल्ली के इंदिरा भवन में कांग्रेस के सीनियर लीडर और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बिहार के नवनियुक्त 40 जिलाध्यक्षों के साथ मीटिंग की। लगभग 4 घंटे की इस मीटिंग में जिला अध्यक्षों को ताकत देने के साथ-साथ आर्थिक तौर पर मजबूत बनाने का भी भरोसा दिया गया है।
राहुल गांधी ने सभी जिलाध्यक्षों को निर्देश दिया है कि वे जिला, प्रखंड, पंचायत और गांव के स्तर पर मनरेगा के लाभुकों को खोजें। उन्हें बताए कि इस योजना की शुरुआत कांग्रेस ने की थी। इसका लाभ कितने लोगों को मिला है। साथ ही उन्हें कांग्रेस से जोड़ने और वोट करने को कहिए। उन्होंने जिलाध्यक्षों को बताया कि मनरेगा हमारी सबसे बड़ी स्कीम थी।
संगठन को मजबूत बनाने के लिए BJP का फॉर्मूला
संगठन को मजबूत करने के लिए कांग्रेस ने बीजेपी का फॉर्मूला अपनाया है। राहुल गांधी ने मीटिंग में सभी जिला अध्यक्षों से अपने बूथ को मजबूत करने की सलाह दी है। सभी जिला अध्यक्षों से कहा गया है कि वे अपने बूथ को मजबूत करें। इसके बाद 15-20 बूथों को बनाकर एक मंडल कमेटी बनाए।
कांग्रेस की टॉप लीडरशिप ने शुक्रवार को दिल्ली में बिहार के जिला अध्यक्षों के साथ बैठक की। इसमें उन्हें टिकट के चयन से लेकर कई तरह की पावर दी गई।
बैठक में शामिल एक जिलाध्यक्ष ने भास्कर को बताया कि बूथ कमेटी और मंडल कमेटी को केवल कागजों पर नहीं बनाना है, बल्कि उनसे हर सप्ताह बात करनी है। उनका फीडबैक लेना है।
गया के जिलाध्यक्ष ने कहा- फंड की कमी के कारण होती है परेशानी
जिलाध्यक्षों की बैठक में बिहार, झारखंड, असम, लद्दाख, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के जिला अध्यक्ष शामिल हुए। इनमें कांग्रेस की टॉप लीडरशिप ने हर राज्य के जिला अध्यक्षों की बात सुनी। बिहार से दो जिलाध्यक्ष गया के संतोष कुशवाहा और शिवहर की नूरी बेगम को अपनी बात रखने का मौका मिला।
दोनों ने बताया कि जिला में संगठन के पास फंड की काफी किल्लत है। इसके कारण काम में काफी परेशानी होती है। इस पर राहुल गांधी ने आश्वासन दिया कि अब जिलाध्यक्ष को फंड की कोई किल्लत नहीं होगी। उन्हें आर्थिक तौर पर भी मदद की जाएगी।
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