लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर इंदौर में अनुमति और आयोजन स्थल को लेकर विवाद सामने आ रहा है। कार्यक्रम पहले 12 सितंबर को नेहरू स्टेडियम में प्रस्तावित था, लेकिन इसकी अनुमति नहीं दी गई। कांग्रेस ने तारीख बढ़ाकर 19 सितंबर की। इसके बाद कांग्रेस ने रीजनल पार्क के सामने आईडीए के मैदान को चुना। मैदान के अस्थायी उपयोग के लिए करीब 12 हजार वर्गमीटर के मैदान के लिए 10.08 लाख रुपए जमा किए गए। आईडीए की मंजूरी के बाद 17 सितंबर को करीब 4 लाख रुपए की अतिरिक्त राशि जमा कराने को कहा गया। बताया गया कि निर्धारित तारीख से पहले डोम और अन्य तैयारियां शुरू करने के कारण यह राशि मांगी गई। कांग्रेस ने आपत्ति जताई, लेकिन कार्यक्रम तय समय पर कराने के लिए राशि जमा कर दी।
आईडीए ने मैदान के लिए पहले पांच शर्तें लगाई थीं। कांग्रेस ने इनको पूरा किया तो पुलिस ने गुरुवार को कांग्रेस शहराध्यक्ष चिंटू चौकसे को कार्यक्रम की अनुमति के साथ 31 सुरक्षा शर्तों की सूची दे दी। इनमें भीड़ प्रबंधन, प्रवेश-निकास, तलाशी, सीसीटीवी, पार्किंग, चिकित्सा, आपातकालीन निकासी और मंच की सुरक्षा से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। पुलिस ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 21 मई 1991 को श्रीपेरंबदूर में हुई हत्या की जांच के लिए गठित वर्मा आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सुरक्षा व्यवस्था में आयोजकों की जिम्मेदारियां तय की हैं।
पूर्व मंत्री और कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य (सीडब्ल्यूसी) कमलेश्वर पटेल ने इन घटनाक्रमों को विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यक्रम की घोषणा के बाद से ही भाजपा की ओर से अलग-अलग तरह की बातें सामने आ रही हैं। देश के जिन शहरों में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम हुए, वहां किसी न किसी स्तर पर अड़चनें सामने आई हैं। वह इंदौर पुलिस की सभी शर्तों का पालन करेगी।
‘छात्रों की गूंज’ अभियान की शुरुआत 17 जून को राजस्थान के कोटा से हुई थी। इसके बाद देहरादून, प्रयागराज और पुणे में कार्यक्रम हुए। इंदौर पांचवां शहर है, जहां कार्यक्रम आयोजित होगा। कांग्रेस का दावा है कि कार्यक्रम को लेकर विद्यार्थियों में उत्साह है। पार्टी ने अलग-अलग इलाकों में छात्रों से संवाद के साथ बारकोड के जरिए पंजीयन भी कराया है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक करीब एक लाख विद्यार्थी कार्यक्रम में पहुंच सकते हैं।
कार्यक्रम में शिक्षा, परीक्षाओं, पेपर लीक, भर्ती और रोजगार जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। कांग्रेस का कहना है कि एकेडमिक कैलेंडर लागू होना चाहिए, परीक्षाएं समय पर होनी चाहिए और शिक्षित बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर मिलने चाहिए। मध्यप्रदेश में व्यापमं, एमपीपीएससी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी छात्रों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाने की बात कही गई है।
कांग्रेस नेताओं के अनुसार, कार्यक्रम स्थल में 250 नेताओं के बैठने के लिए अलग से व्यवस्था की जा रही है। स्थल में इनके लिए अलग से व्यवस्था होगी। यह छात्रों के एरिया से अलग रहेगा। इसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा, सुप्रिया श्रीनेत्र, हरिश चौधरी सहित मध्य प्रदेश के सभी कांग्रेस विधायक एवं वरिष्ठ नेता शामिल रहेंगे।
इंदौर में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के एक दिन पहले लड़कियों के फिल्मी गाने पर डांस को लेकर मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि जो वीडियो सामने आया है, यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। राहुल गांधी और कांग्रेस दावा कर रहे हैं कि यह ‘छात्रों की गूंज’ का कार्यक्रम है। क्या इस तरह फूहड़ता के साथ कार्यक्रम किया जाएगा? क्या इस तरह युवाओं को संस्कार दिया जा रहा है? कांग्रेस ने हर समय समाज को बिगाड़ने का काम किया है। आश्चर्य होता है कि इस तरह से राहुल गांधी के कार्यक्रम की पब्लिसिटी की जा रही है। राहुल गांधी और कांग्रेस को संस्कार और संस्कृति से कोई लेना-देना नहीं है। कांग्रेस ने हर समय महिलाओं और बेटियों का अपमान किया है। इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण और कुछ नहीं हो सकता। ये हिंदुस्तान के संस्कार नहीं हैं। जिस तरह से फूहड़ता हो रही है, ये कांग्रेस का चरित्र है।
‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के तहत छात्रों की समस्याओं और सुझावों को देशभर से जुटाया जा रहा है। राज्यसभा सांसद एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष (मीडिया विभाग) पवन खेड़ा ने बताया कि इसके लिए एक कंट्रोल रूम बनाया गया है। यहां छात्रों से मिले मुद्दों को संकलित कर यह तय किया जा रहा है कि उन्हें किस प्लेटफॉर्म पर उठाया जाए। जिन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं, वहां की कांग्रेस इकाइयों के साथ कंट्रोल रूम समन्वय कर रहा है। छात्रों से मिले सुझावों को चुनावी घोषणापत्र में शामिल करने के लिए भी कहा जा रहा है। उन्होंने बताया कि छात्रों ने परीक्षा का निश्चित शेड्यूल और टाइमलाइन तय करने, परीक्षा कैलेंडर सार्वजनिक करने और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने जैसे सुझाव दिए हैं।
यूपीआई पर एमडीआर लगाए जाने की चर्चा को लेकर खेड़ा ने सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने डिजिटल और कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा दिया, लेकिन अब यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाने की बात सामने आ रही है। उनके मुताबिक, इसका असर व्यापारियों के साथ अंततः ग्राहकों पर भी पड़ सकता है। खेड़ा ने अमेरिका के दबाव में आर्थिक फैसले लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार को देश के हितों को प्राथमिकता देकर नीतियां बनानी चाहिए।
इंदौर को लेकर खेड़ा ने कहा कि इंदौर को भाजपा का गढ़ नहीं, उम्मीद का किला कहिए, अब उम्मीदें टूट रही है। इसलिए किला कभी भी धड़धड़ाकर गिर जाएगा। ‘हेडलाइन और इवेंट मैनेजमेंट से चल रही सरकार, बेरोजगारी से युवा परेशान’ खेड़ा ने कहा कि आज की पीढ़ी को फ्रस्ट्रेशन, कुंठा और आत्महत्या की कगार पर ले जाने के लिए कई कारण जिम्मेदार हैं। इसे रोकना राजनीति, व्यापार, पत्रकारिता समेत हर क्षेत्र से जुड़े लोगों की जिम्मेदारी है। खेड़ा ने बेरोजगारी और आर्थिक आंकड़ों को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार 7.8 प्रतिशत जीडीपी की बात करती है, लेकिन इससे युवा की जेब में पैसा नहीं आता और न ही उसे नौकरी मिलती है। उन्होंने कहा कि खाली जेब और नौकरी की तलाश में शाम को घर लौटने वाले युवाओं की कुंठा को आंकड़ों से नहीं छिपाया जा सकता। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि माता-पिता बच्चों की कोचिंग के लिए बचत करते हैं, लेकिन समय पर परीक्षा नहीं होती, पेपर लीक होने पर परीक्षा रद्द हो जाती है और रिजल्ट टल जाता है। इससे युवाओं के रोजगार के अवसर प्रभावित होते हैं।
खेड़ा ने कहा कि राहुल गांधी जिन मुद्दों को उठा रहे हैं, वे केवल वर्तमान नहीं, बल्कि देश के भविष्य से जुड़े मुद्दे हैं। साथ ही उन्होंने सरकार पर ‘हेडलाइन मैनेजमेंट’ और ‘इवेंट मैनेजमेंट’ के जरिए काम करने का आरोप लगाया। भाजपा नेताओं द्वारा राहुल गांधी पर दिए बयान पर कहा कि जिन्होंने 12 साल में देश को सर्कस बना दिया। प्रधानमंत्री खुद ही मनोरंजन के लिए काफी है।
इंदौर में 19 सितंबर को होने वाले कार्यक्रम ‘छात्रों की गूंज’ को लेकर कांग्रेस नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने कहा- मंदबुद्धि के समर्थकों ने उन्हें राजा बनाया, लेकिन संविधान ने उन्हें देश का प्रधानमंत्री बनाया।
कुल मिलाकर, इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर अनुमति, स्थान, शुल्क और सुरक्षा शर्तों को लेकर विवाद गहरा गया है। कांग्रेस का कहना है कि वह सभी शर्तों का पालन करेगी, जबकि भाजपा नेताओं ने कार्यक्रम की आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है।


















