कोलकाता/मुर्शिदाबाद: पश्चिम बंगाल में आगामी छह अक्टूबर को होने वाले दो विधानसभा उपचुनावों से ठीक पहले राजनीतिक सरगर्मी के बीच कानूनी कार्रवाइयों का सिलसिला तेज हो गया है। शनिवार को मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार सैफुल इस्लाम को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, यह गिरफ्तारी वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान दो गुटों के बीच हुई हिंसक झड़प से जुड़े एक मामले में की गई है।
इस घटनाक्रम से ठीक एक दिन पहले, शुक्रवार को नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार मिलन प्रधान को गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी भूमि अधिग्रहण के विरोध में चले आंदोलन से संबंधित लगभग दो दशक पुराने एक मामले में हुई। दोनों सीटों पर उपचुनाव की घोषणा के बाद से ही सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस, भाजपा, कांग्रेस और वाम मोर्चे के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। ऐसे में प्रमुख उम्मीदवारों की गिरफ्तारियों ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि सैफुल इस्लाम आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के नेता हुमायूं कबीर से जुड़े हुए हैं। एजेयूपी का गठन हुमायूं कबीर ने किया था और यह पार्टी अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले में एक पहचान रखती है। सैफुल की गिरफ्तारी के समय और उसके पीछे के आधार को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव से ठीक पहले विपक्षी उम्मीदवारों को निशाना बनाने के लिए पुराने मामलों को आधार बनाया जा रहा है। हालांकि, पुलिस प्रशासन का कहना है कि ये कार्रवाइयां न्यायिक प्रक्रिया और लंबित वारंट के तहत नियमित रूप से की जा रही हैं और इनका चुनावी समय से कोई लेना-देना नहीं है।
रेजीनगर सीट की बात करें तो यह सीट 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के खाते में गई थी। बाद में यह सीट रिक्त हुई, जिसके चलते उपचुनाव कराया जा रहा है। निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, दोनों सीटों—नंदीग्राम और रेजीनगर—पर मतदान छह अक्टूबर को होगा, जबकि मतगणना की तारीख बाद में घोषित की जाएगी।
उधर, शुक्रवार को ही एक अन्य बड़ी कार्रवाई में एजेयूपी के प्रदेश सचिव आशिक इकबाल को मुर्शिदाबाद जिले में एक पुलिस पिकेट पर वाहन जांच के दौरान गिरफ्तार किया गया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इकबाल के पास से बड़ी मात्रा में नकली नोट और अवैध हथियार बरामद किए गए हैं। उनके साथ यात्रा कर रहे एक अन्य व्यक्ति को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। इस बरामदगी ने जिले में चुनावी माहौल के बीच अवैध गतिविधियों की आशंका को बल दिया है।
आशिक इकबाल की गिरफ्तारी और उनसे नकली नोट व हथियार मिलने की घटना को रेजीनगर के निर्दलीय उम्मीदवार सैफुल इस्लाम की गिरफ्तारी से जोड़कर देखा जा रहा है, क्योंकि दोनों ही एजेयूपी से संबद्ध बताए जाते हैं। हालांकि, पुलिस ने आधिकारिक तौर पर दोनों गिरफ्तारियों के बीच किसी सीधे संबंध की पुष्टि नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि दोनों अलग-अलग मामले हैं और कानून के मुताबिक स्वतंत्र रूप से कार्रवाई की गई है।
नंदीग्राम सीट का अपना राजनीतिक महत्व है। 2021 के विधानसभा चुनाव में यहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भाजपा के शुभेंदु अधिकारी ने हराया था। बाद में शुभेंदु अधिकारी के लोकसभा सांसद चुने जाने या अन्य कारणों से सीट रिक्त होने की स्थिति में उपचुनाव की नौबत आई। कांग्रेस ने यहां से मिलन प्रधान को मैदान में उतारा है। उनकी गिरफ्तारी भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े एक पुराने मामले में हुई है, जो नंदीग्राम के ऐतिहासिक किसान आंदोलन के दौर का बताया जाता है। कांग्रेस ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार देते हुए चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग की है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उपचुनाव भले ही दो सीटों तक सीमित हों, लेकिन इनके नतीजे 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीतिक दिशा का संकेत दे सकते हैं। सत्तारूढ़ दल जहां अपनी पकड़ मजबूत दिखाना चाहता है, वहीं विपक्षी दल इन सीटों को प्रतिष्ठा की लड़ाई मान रहे हैं। ऐसे में उम्मीदवारों की गिरफ्तारियां और नकली नोट व हथियारों की बरामदगी चुनावी विमर्श को कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार के मुद्दों की ओर मोड़ सकती है।
निर्वाचन आयोग ने दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती समेत सभी आवश्यक इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। जिला प्रशासन और पुलिस को आदर्श आचार संहिता का सख्ती से पालन कराने को कहा गया है। उधर, गिरफ्तार किए गए नेताओं के समर्थकों ने थानों के बाहर प्रदर्शन कर रिहाई की मांग की है। पुलिस ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ा दी है।
मामले की अगली कड़ी में अदालती कार्यवाही पर सबकी नजर रहेगी। गिरफ्तार उम्मीदवारों की जमानत अर्जियों और चुनाव लड़ने की पात्रता पर कानूनी राय ली जा रही है। चुनाव आयोग के नियमानुसार, दोषसिद्धि न होने तक उम्मीदवार चुनाव लड़ सकते हैं, लेकिन हिरासत में रहने की स्थिति में प्रचार अभियान प्रभावित होना तय है। आने वाले दिनों में दोनों सीटों पर प्रचार की गति और दिशा इन घटनाक्रमों से तय होगी।


















