दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव के परिणामों की गिनती में अध्यक्ष पद की दौड़ बेहद रोमांचक बनी हुई है। 14वें राउंड की गिनती के बाद, NSUI के उम्मीदवार विजय मीणा 16,107 वोटों के साथ ABVP के यश डबास से मात्र एक वोट की बढ़त बनाए हुए हैं। यह अंतर 9वें राउंड में भी एक वोट का ही था, जो दर्शाता है कि यह चुनाव किस कदर आमने-सामने का मुकाबला है।
अध्यक्ष पद की यह कड़ी टक्कर चुनाव के अन्य पदों की तुलना में अधिक रोमांचक है, जहाँ परिणाम अधिक स्पष्ट हैं। उपाध्यक्ष पद पर, निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने 21,247 वोट हासिल किए हैं, जिससे उनकी जीत लगभग तय हो चुकी है। उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी, ABVP के ईशु मौर्य को 10,920 वोट मिले हैं, जबकि NSUI के वीर चतरथ को 4,911 वोट प्राप्त हुए हैं। इस प्रकार, उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार का प्रदर्शन चुनाव के इस दौर में सबसे अधिक प्रभावशाली रहा है।
सचिव पद पर, ABVP की रिया छावड़ी 13,737 वोटों के साथ आगे चल रही हैं, जबकि NSUI की नम्रता चौधरी को 10,641 वोट मिले हैं। यह अंतर 5,096 वोटों का है, जो सचिव पद की दौड़ को अध्यक्ष पद की तुलना में अधिक स्पष्ट बनाता है।
संयुक्त सचिव पद पर, NSUI के गोपाल चौधरी 11,222 वोटों के साथ आगे हैं। ABVP के लक्ष्य राज सिंह को 10,589 वोट मिले हैं, जबकि निर्दलीय विशेष यादव को 10,405 वोट प्राप्त हुए हैं। संयुक्त सचिव पद की दौड़ भी काफी रोमांचक है, क्योंकि तीनों उम्मीदवारों के बीच का अंतर केवल 733 वोटों का है।
DUSU चुनाव के लिए शुक्रवार को 52 कॉलेजों में मतदान हुआ था। कुल 1,51,519 छात्रों को मतदान का अधिकार था, जिनमें से 61,312 छात्रों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो कुल मतदान प्रतिशत 40.46% के रूप में दर्ज किया गया। यह मतदान प्रतिशत दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनावों में आमतौर पर देखे जाने वाले रुझानों के अनुरूप है, जिसमें विभिन्न छात्र संगठनों की सक्रियता और छात्रों की भागीदारी देखी जाती है।
चुनाव के दौरान, NSUI और ABVP दोनों ने अपने-अपने उम्मीदवारों के समर्थन में व्यापक प्रचार किया था। दोनों संगठनों ने कॉलेज परिसरों में विभिन्न कार्यक्रमों और रैलियों का आयोजन किया था, जिसमें छात्रों को अपने-अपने मुद्दों और प्रस्तावों के बारे में जानकारी दी गई थी। चुनाव के दौरान, छात्रों ने विभिन्न मुद्दों जैसे कि शुल्क वृद्धि, छात्रावास सुविधाओं, रोजगार के अवसरों और शैक्षणिक सुधारों पर चर्चा की थी, जिन्होंने इस चुनाव को प्रभावित किया था।
गिनती प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए, दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की थी। विभिन्न कॉलेजों से वोटों की गिनती के आंकड़े एकत्र किए गए और उन्हें मुख्य गिनती केंद्र पर भेजा गया, जहाँ आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक मशीनों का उपयोग करके गिनती की प्रक्रिया को तेज किया गया। गिनती की प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए, विभिन्न छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों को पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया गया था।
अध्यक्ष पद पर एक वोट का अंतर चुनाव के इस दौर में उम्मीदवारों और उनके समर्थकों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। NSUI और ABVP दोनों ही इस पद को जीतने के लिए प्रतिबद्ध हैं, और एक वोट का अंतर चुनाव के परिणाम को पूरी तरह से बदल सकता है। गिनती के शेष राउंड के परिणामों पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि अंतिम परिणामों की घोषणा तक यह दौड़ जारी रहेगी।
उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन की जीत लगभग तय है, लेकिन संयुक्त सचिव पद पर मुकाबला अभी भी रोमांचक है। NSUI के गोपाल चौधरी, ABVP के लक्ष्य राज सिंह और निर्दलीय विशेष यादव के बीच का अंतर केवल 733 वोटों का है, जो इस पद की दौड़ को अत्यधिक प्रतिस्पर्धी बनाता है। गिनती के शेष राउंड के परिणामों के आधार पर, संयुक्त सचिव पद का अंतिम विजेता तय किया जाएगा।
चुनाव के परिणामों का दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा। विजेता छात्र संघ शुल्क वृद्धि, छात्रावास सुविधाओं, रोजगार के अवसरों और शैक्षणिक सुधारों जैसे विभिन्न मुद्दों को संबोधित करने के लिए जिम्मेदार होगा। साथ ही, विजेता छात्र संघ विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ विभिन्न मुद्दों पर बातचीत करने और छात्रों के हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए भी जिम्मेदार होगा।
चुनाव के परिणामों की घोषणा के बाद, विजेता उम्मीदवारों को शपथ दिलाई जाएगी और उन्हें अपने पदों का कार्यभार संभालने के लिए कहा जाएगा। इस दौरान, सभी छात्र संगठनों से अपेक्षा की जाती है कि वे चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाए रखने में सहयोग करेंगे और परिणामों का सम्मान करेंगे, चाहे वे किसी के भी पक्ष में हों।
चुनाव के परिणामों की गिनती के हर अपडेट के लिए, नीचे लाइव ब्लॉग को देखते रहें, जहाँ गिनती की प्रक्रिया के बारे में ताजा जानकारी प्रदान की जाएगी।
इस प्रकार, दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के परिणामों की गिनती अभी भी जारी है, जिसमें अध्यक्ष पद पर एक वोट का अंतर, उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार की लगभग तय जीत, और सचिव तथा संयुक्त सचिव पदों पर कड़ी टक्कर देखी जा रही है। चुनाव के परिणामों की अंतिम घोषणा के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ का नेतृत्व कौन करेगा और आगामी वर्षों में छात्रों के हितों का प्रतिनिधित्व कौन करेगा।













