महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पेपर लीक केस में ठाणे पुलिस का नया खुलासा हुआ है। पुलिस के मुताबिक, परीक्षा का पेपर उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित महीम पटरन प्राइवेट लिमिटेड प्रिंटिंग प्रेस से लीक हुआ था। आरोपियों ने पेपर के पन्नों को जूते की सोल में छिपाकर प्रेस से बाहर निकाला। चार्जशीट में दावा किया गया है कि इस काम के लिए आरोपियों को ₹8 हजार दिए गए और आगरा में जमीन का प्लॉट देने का भी वादा किया गया।
ठाणे पुलिस ने शुक्रवार को भिवंडी की स्थानीय अदालत में 3,500 पृष्ठों की चार्जशीट दाखिल की। इस में मास्टरमाइंड बिजेंद्र गुप्ता समेत 18 लोगों को आरोपी बनाया गया है। गुप्ता का नाम इससे पहले भी ओडिशा के एक पेपर लीक केस में सामने आ चुका है। अब तक 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अशोक साव और प्रकाश मिसाल फरार हैं।
पुलिस की जांच में पता चला कि परीक्षा से एक दिन पहले यानी 28 जून की TET परीक्षा से पहले ही पेपर लीक हो चुका था। इसके बाद महाराष्ट्र स्टेट एक्सामिनेशन काउंसिल ने परीक्षा स्गठित करने से माना कर दिया और परीक्षा स्थगित कर दी।
डीसीपी पवन बंसोड को सूचना मिली थी कि तीन लोग भिवंडी के एक व्यक्ति को परीक्षा के पेपर बेचने की कोशिश कर रहे हैं। इसी सूचना के आधार पर पुलिस ने कोंगांव इलाके में आरोपियों को पकड़ा। उनके पास से पेपर के चार सेट मिले। महाराष्ट्र स्टेट काउंसिल ऑफ एग्जामिनेशन के अधिकारियों ने इन सेटों को असली बताया।
चार्जशीट के अनुसार, पेपर आगरा की महीम पटरन प्राइवेट लिमिटेड प्रिंटिंग प्रेस से लीक हुए थे। इसी प्रेस में TET परीक्षा के गोपनीय पेपर छापे जा रहे थे। 15 से 17 जून के बीच प्रेस के दो कर्मचारियों और एक सावकीय कर्मचारी ने पेपर के पन्नों को मोड़कर जूतों की सोल में छिपा लिया।
प्रेस में सिक्योरिटी गार्ड कर्मचारियों की कपड़ों की तलाशी लेते थे, लेकिन जूतों की जांच नहीं किया जाता था। चार्जशीट में इसी सुरक्षा कमी का फायदा उठाते हुए पेपर को प्रेस से बाहर निकाले जाने का दावा किया गया है।
नकल रोकने के लिए TET परीक्षा के दो पेपरों के चार अलग-अलग सेट तैयार किए गए थे। इनमें से एक सेट परीक्षा के दिन उपयोग में आएगा था। पुलिस की चार्जशीट के अनुसार आरोपियों ने चारों सेट ही प्रिंटिंग प्रेस से बाहर निकाल लिए।
इस लीक कार्रवाई के बदले आरोपियों को ₹8 हजार दिए गए। साथ ही उन्हें आगरा में जमीन का प्लॉट देने का वादा भी किया गया। ठाणे पुलिस ने भिवंडी की अदालत में दाखिल चार्जशीट में इन तमाम बातों को मुख्य मामले के रूप में प्रस्तुत किया है।
TET यानी टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट एक ऐसी परीक्षा है जो यह तय करती है कि कोई अभ्यर्थी क्लास 1 से 8 तक प्राथमिक और उच्च प्राथमिक वर्गों में शिक्षक बनने के लिए योग्य है या नहीं। इस परीक्षा को नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) ने 2010 में अनिवार्य कर दिया था। केंद्रीय और राज्य स्तर पर इसके अलग-अलग रूप से परीक्षाएं होती हैं।
NCTE ने शिक्षक पदों पर नियुक्त होने वाले उम्मीदवारों को TET क्वॉलिफाई करने के लिए प्रारंभ में पाँच वर्ष का समय दिया था, जिसे बाद में घटाकर चार वर्ष कर दिया गया। इस निर्देश के खिलाफ उम्मीदवार कोर्ट में गए। मद्रास हाईकोर्ट की एक बेंच ने जून 2025 में कहा था कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति 29 जुलाई 2011 से पहले हुई थी, उन्हें सेवा में बने रहने के लिए TET पास करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन पदोन्नति के लिए TET पास करना जरूरी रहेगा।
इसके बाद अलग-अलग राज्यों से जुड़े मामले सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। 2 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि शिक्षकों को सेवा में बने रहने या पदोन्नति के लिए TET पास करना होगा। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति मनमोहन की बेंच ने कहा कि जिन शिक्षकों की नौकरी में पाँच साल से अधिक अवशेष बचा है, वे भी इस नियम के दायरे में आएंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने TET पास करने की समय-सीमा 31 अगस्त 2027 से बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी। जिन शिक्षकों के पास TET नहीं है, वे या तो इस्तीफा देंगे या फिर कंपलसरी रिटायरमेंट लेंगे। कोर्ट ने इन निर्देशों को अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए दिए।
परीक्षा सुरक्षा से जुड़ा एक संबंधित संदर्भ में, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आवश्यकता पड़ने पर नीट परीक्षा प्रणाली की जांच के लिए जज नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के कार्यालय का दौरा कर सकते हैं। उनका उद्देश्य यह देखना होगा कि परीक्षा को सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से कराने के इंतजाम वास्तव में कारगर हैं या नहीं।













