राज्य के सभी शहर नए सिरे से विकसित होंगे। इसके लिए नया मास्टर प्लान बनेगा। इसको आगामी बीस वर्षों में बढ़ने वाली आबादी को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। इसमें विभिन्न भूमि का उपयोग यानी आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक आदि मूलभूत सुविधाओं और सड़क निर्म
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नगर विकास मंत्री जीवेश कुमार ने कहा कि शहरी क्षेत्रों का योजनाबद्ध तरीके से विकास करने के लिए सरकार पूरी तरह संकल्पित है। 1350 नए पदों के सृजन से नियोजित शहरीकरण की प्रक्रिया को गति मिलेगी। शहरों और उसके आसपास के क्षेत्रों का विकास तेज गति से हो सकेगा। उन्होंने कहा कि पटना जिला के लिए प्रस्तावित जिला प्लानिंग एरिया ऑथोरिटी, पटना महानगर क्षेत्र प्राधिकार के अतिरिक्त अन्य क्षेत्रों का कार्य करेगा।
जिले के सभी नगर निकायों में होने वाले विकास कार्यों की समेकित रूप से योजना बनाने और उसके निष्पादन में प्राधिकार की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। सेटेलाइट टाउनशिप, एरिया डेवलपमेंट स्कीम जैसी परियोजनाओं और शहरों के आस-पास क्षेत्रों के विकास में तीव्र गति लाने के लिए जिला प्राधिकार कार्य करेगा। इसके साथ प्राधिकार द्वारा जिला स्तर पर अन्य विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य को गति दी जाएगी।
बेल्ट्रॉन या विभाग द्वारा निर्धारित एजेंसी के माध्यम से नियुक्ति
नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह ने कहा कि मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, कार्यपालक अभियंता, नगर निवेशक, सांख्यिकी पदाधिकारी आदि पद है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक जिला आयोजना क्षेत्र प्राधिकार में आवश्यकतानुसार जीआईएस एक्सपर्ट, आईटी मैनेजर, डेटा इंट्री ऑपरेटर, मल्टी टास्किंग स्टॉफ की सेवा निर्धारित मानदेय और पारिश्रमिक पर बेलट्रॉन या विभाग द्वारा निर्धारित एजेंसी के माध्यम से प्राप्त की जाएगी।
जीआईएस बेस्ड मास्टर प्लान बनेगा
शहरों के विस्तार के क्रम में जीआईएस बेस्ड मास्टर प्लान के माध्यम से विकासशील भूमि के अधिकतम उपयोग के साथ आधारभूत संरचना विकास का प्रारूप तैयार किया जाएगा। अभी सभी शहरों के जीआईएस बेस्ड मैपिंग का कार्य विभाग द्वारा किया जा रहा है। राज्य के प्रमुख शहरों में टाउनशिप परियोजना लाने की तैयारी भी है। इन पदों का वर्गीकरण प्रमंडल व जिला मुख्यालय के आधार पर
जिला स्तर पर प्रस्तावित 38 जिला प्लानिंग एरिया ऑथोरिटी में पद सृजन का प्रस्ताव प्रमंडलीय जिला मुख्यालय और अन्य जिला मुख्यालय के आधार पर वर्गीकृत किया गया है। प्रमंडलीय स्तर के 9 जिला मुख्यालय वाले प्राधिकार में प्रति प्राधिकार के लिए 39 पद, अन्य 29 जिला मुख्यालय वाले प्राधिकार में प्रति प्राधिकार 34 पद, पटना महानगर क्षेत्र प्राधिकार के लिए सहायक नगर योजना पर्यवेक्षक के 9 पद, उप नगर योजना पर्यवेक्षक के 4 पद शामिल है।
ये है वर्तमान स्थिति…
पटना समेत राज्य के सभी जिला मुख्यालय के आसपास के इलाके में शहर का विस्तार हो रहा है। लेकिन, प्लानिंग नहीं होने के कारण बेतरतीब ढंग से लोग मकान बना रहे है। नए बसने वाले मोहल्लों में वर्षों तक मूलभूत सुविधाएं बहाल नहीं हो रही है। सड़क, नाली के लिए लोग सरकारी कार्यालयों का चक्कर लगाने को मजबूर रहते हैं। बारिश के दिनों में जलजमाव होने से आम लोग करीब चार महीने तक परेशान रहते हैं।
पार्क, स्कूल अस्पताल के लिए जगह नहीं… प्लानिंग नहीं होने के कारण मूलभूत सुविधाओं में शामिल पार्क, स्कूल, अस्पताल के लिए नए बसने वाली कॉलोनियों में जगह नहीं होती है। मानक के अनुरूप 20 फीट की सड़क नहीं होने की स्थिति में आकस्मिकता से निपटना बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ऐसे स्थिति में प्लानिंग होने से विकास तेजी से होगा।