प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ‘द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स’ इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में भाग लेकर पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर उन्होंने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के लिए एक मोबाइल ऐप लॉन्च किया, जिसका उद्देश्य पर्यावरणीय मामलों को सुधारने और नागरिकों को सशक्त बनाने के लिए त्वरित जानकारी और समाधान प्रदान करना है।
पीएम मोदी ने भारत की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि भारत G20 का इकलौता ऐसा देश है, जिसने पेरिस में आयोजित कॉप-21 समिट में लिए गए तीन प्रमुख परिदृढ़ लक्ष्यों को समय से पूरा करके दिखाया है। उन्होंने बताया कि कार्बन उत्सर्जन की जिम्मेदारी अक्सर विकासशील देशों पर अत्यधिक बढ़ी दी जाती है, जबकि भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन आज भी दुनिया के औसतन से आधे से कम है। इस प्रकार के असमान दबाव को ध्यान में रखकर भारत ने अपने विकास के साथ-साथ जलवायु सुरक्षा के लिए भी जिम्मेदारी निभाई है।
विस्तार से समझाते हुए पीएम मोदी ने बताया कि वर्ष 2015 में पेरिस में हुए कॉप-21 सम्मेलन में भारत ने तीन बड़े लक्ष्य तय किए थे। पहला लक्ष्य था कि वर्ष 2030 तक 2005 के सापेक्ष कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता में 33 से 35 प्रतिशत कमी लाना। दूसरा लक्ष्य था कि उसी समय सीमा तक देश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त करना। तीसरा लक्ष्य था कि पेड़ लगाने और वनों के संरक्षण के माध्यम से 2.5 से 3 अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड सोखने की क्षमता विकसित करना। इन्हीं लक्ष्यों को प्राप्त करने में भारत ने एक अनोखा सफर तय किया है, जिसे वैश्विक स्तर पर सेहसम्मान प्राप्त हुआ है।
मोदी ने आगे कहा कि भारत दुनिया में पर्यावरणीय सुरक्षा के नए मानदंड स्थापित कर रहा है और इसके लिए देश ने न केवल नीतिगत ढांचा बनाया है बल्लि उसके कार्यान्वयन में भी समय पर सफलता हासिल की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जलवायु परिवर्तन का समाधान एक वैश्विक मुद्दा है और इसके लिए सभी देशों को मिलकर कदम उठाने की आवश्यकता है, विशेषकर उन विकासशील देशों के साथ जिन्हें अपने ऐतिहासिक दायित्व के बावजूद भी अत्यधिक दबाव डाला जाता है।
उन्होंने पेरिस कॉप-21 के बारे में एक संक्षिप्त ऐतिहासिक पृष्ठभूमि प्रस्तुत की, जिसमें उन्होंने बताया कि यह जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के तहत आयोजित 21वां अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन था। यह सम्मेलन 30 नवंबर से 12 दिसंबर 2015 तक फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित किया गया था। इसमें करीब 195 देशों ने भाग लिया और इसके तहत पेरिस समझौता अपनाया गया। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य दुनिया के औसत तापमान में होने वाली वृद्धि को 2°C से काफी नीचे रखना और उसे 1.5°C तक सीमित करने की दिशा में कदम उठाना था। इसके तहत हर देश ने अपने-अपने आधार पर कार्बन उत्सर्जन कम करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अपने लक्ष्य तय किए थे।
पीएम मोदी ने भारत के प्रयासों की जानकर वैश्विक समुदाय को प्रेरणा मिलेगी और भविष्य में भी इसी प्रकार के जिम्मेदारीपूर्ण कदमों के साथ जलवायु सुरक्षा के मामले में अग्रणी भूमिका निभाते हुए दुनिया के साथ मिलकर एक स्वच्छ और सतत भविष्य की ओर बढ़ागा। उन्होंने कहा कि भारत निरंतर अपने विकास को जलवायु सुरक्षा के साथ संतुलित करते हुए आगे बढ़ रहा है और इसके लिए देश ने नीति, प्रौद्योगिकी और नागरिक सहभागिता के माध्यम से एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया है।
इस कॉन्फ्रेंस में पर्यावरण क्षेत्र के विशेषज्ञों, अकादमीकians और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया, जिन्होंने जलवायु सुरक्षा, सतत ऊर्जा और पर्यावरणीय न्याय के महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त किए। इस प्रकार की अंतरराष्ट्रीय स्तर की गतिविधियों के माध्यम से भारत न केवल अपने वादों को पूरा कर रहा है बल्लि वैश्विक समुदाय के साथ सहयोग भी बढ़ा रहा है।













